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जब होगा पटेल के स्टैच्यू का अनावरण तो नहीं जलेगा हज़ारों किसानों के घर चूल्हा, जानें क्यों

आदिवासियों का हक़ छिनने वाला गुजरात है

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भारत इस समय दुनिया की सबसे मूर्ति वाला देश बन गया है। देश के लोगों को इसपर काफ़ी गर्व भी हो रहा है। बता दें 182 मीटर ऊँची मूर्ति का अनावरण देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 31 अक्टूबर बुधवार के दिन किया जाएगा। लेकिन कम ही लोग यह बात जानते हैं कि जब दुनिया की इस सबसे बड़ी मूर्ति का अनावरण होगा, उस समय देश के हज़ारों किसानों के घर का चूल्हा ठंडा पड़ा होगा। सरदार सरोवर बाँध परियोजना का सबसे ज़्यादा ख़ामियाज़ा भुगतने वाली बस्ती केवड़िया कॉलोनी के किसान उकाभाई पटेल ने बताया कि, हमारी आठ एकड़ ज़मीन सरदार सरोवर परियोजना की भेंट चढ़ गयी।

आज भी नहीं मुहैया हो पाया साफ़ पानी:

पटेल

उन्होंने आगे बताया कि मुआवज़े के इंतज़ार में वे आज लगभग 70 साल के हो गए हैं। जिन कॉलोनियों में उन्हें विस्थापित किया गया, वहाँ विस्थापन के दस साल बाद किसी तरह बिजली के खम्बे गाड़े गए। लेकिन आज भी पीने का साफ़ पानी मुहैया नहीं हो पाया है। दरअसल सरदार सरोवर बाँध के बनने की सज़ा काटने वाले ये लोग आदिवासी समुदाय के किसान हैं। बता दें उकाभाई पटेल की कहानी केवड़िया कॉलोनी पर अधिग्रहण की स्थिति पर 1999 में लिखे गए लेख ग्रेटर कॉमन गुड का हिस्सा मालूम होती है।

किया गया ग़रीबों के हितों को अनदेखा:

अपने इस लेख में अरुंधती राय लिखती हैं, बांध परियोजनाओं के दौरान हैं, किस तरह से गरीबों की हितों की अनदेखी की गई इसे समझने के लिए केवड़िया कॉलोनी जाना जरूरी है। उन्होंने लिखा है, ‘केवड़िया कॉलोनी इस बांध के नाम किए गए अत्याचार की कहानी समझने के लिए दुनिया की कुंजी है। वहां जाइये, रहस्य अपने आप आपके सामने उद्घटित हो जाएँगे।’ यहां कि देवी बेन का उदाहरण देते हुए उन्होंने लिखा है। ‘देवी बेन अब विधवा हो चुकी हैं, से ग्यारह एकड़ भूमि अधिग्रहित कर स्वामीनारायण नाम के एक विशाल धार्मिक ट्रस्ट को दे दी गई। बाकी पर खेती होती है और अब देवी बेन कटीले-बाड़ के पार से यह सब देखती रहती है।’

आदिवासियों का हक़ छिनने वाला गुजरात है:

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किसान नेता जेके पटेल कहते हैं कि लगभग 5000 किसान सरदार पटेल के स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी के अनावरण के समय अपना विरोध जताएँगे। सरदार पटेल को हम किसान नेता मानते हैं। उन्होंने कहा कि, हमारा विरोध उनके स्टैच्यू से नहीं है, बल्कि यह तो हमारे लिए सम्मान की बात है। जिस तरह से सरकार किसानों का हक़ मारकर उनके स्टैच्यू को बनाकर वाह-वाही लूट रही है, वह सरदार पटेल के सिद्धांतों के ख़िलाफ़ है। आगे जेके पटेल कहते हैं, गुजरात का किसान दुनिया भर में प्रचारित किए गए गुजरात मॉडल के तले दबाया जा रहा है। दरअसल यह वाइब्रेंट गुजरात नहीं बल्कि किसानों और आदिवासियों का हक़ छिनने वाला गुजरात है।

मरते हुए किसानों को बचाने के लिए नहीं है कोई योजना:

जेके पटेल यहीं नहीं रुकते हैं। वे आगे कहते हैं, इस समय राज्य में सत्ता पक्ष का सबसे बड़ा विपक्ष किसान ही है। उधर छोटा उदयपुर, पंचमहल, बड़ोदरा और नर्मदा जिले के गन्ना किसानों ने तो अनावरण के समय जल समाधि लेने की चेतावनी दी है। छोटा उदयपुर के किसान रंजन तडवी ने बताया कि इन चार जिलों के किसानों का 11 करोड़ रुपया चीनी मिलों में बक़ाया है। 2007 से इस चीनी मिल को बंद कर दिया गया था, लेकिन किसानों का बक़ाया आजतक नहीं चुकाया गया है। वे आगे कहते हैं कि 2400 करोड़ रुपए की लागत से पूरी की गयी सरदार बल्लभ भाई पाटील के स्टैच्यू की परियोजना दरअसल किसानों को यह जताने का तरीक़ा है कि सरकार दिखावे के लिए कुछ भी कर सकती है, लेकिन मरते हुए किसानों को बचाने के लिए उसके पास कोई योजना नहीं है।


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