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टीपू सुल्तान के समय के 1000 रॉकेट मिले, 250 साल पहले होते थे युद्ध में इस्तेमाल

टीपू सुल्तान के समय के कुछ रॉकेट रखें हैं लंदन म्यूज़ियम में

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आज के इस तकनीकी युग में जिस चीज़ के बारे में लोग सोचते हैं, वह चीज़ आपको कुछ दिन बाद देखने को मिल जाती है। आज से सौ साल पहले किसी ने नहीं सोचा था कि कभी लोग एक जगह से बैठकर दूसरे जगह एक छोटे यंत्र से भी बात कर सकेंगे। उस समय अगर इसके बारे में कोई बात करता तो शायद यह लोगों को अजीब लगता और लोग हँसते, लेकिन आज यह सम्भव हो गया है। आज लोग छोटे से फ़ोन से देश-विदेश में आसानी से बात कर रहे हैं।

 

युद्ध में किया था तोपों का इस्तेमाल:

tipu sultan
Source: sankriti.blogspot.com

ठीक ऐसे ही आज के समय में कई ऐसी चीज़ों के बारे में वैज्ञानिकों ने पता लगाया है, जिसके बारे में पहले लोग सोचते भी नहीं थे। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि आज से लगभग 250 साल पहले भारत में एक व्यक्ति था जो अपने समय से बहुत आगे की सोचता था और ऐसा कुछ करता था, जिसके बारे में आज लोग सोच रहे हैं। जी हाँ टीपूँसुल्तान ही पहला व्यक्ति था जिसने युद्ध में तोपों का इस्तेमाल किया था।

 

 

जाँच में पता चला कि ये है रॉकेट:

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हाल ही में मैसूर के शासक टीपू सुल्तान के समय के एक हज़ार से ज़्यादा रॉकेट मिले हैं। पुरातत्व विभाग का कहना है कि ये रॉकेट टीपू सुल्तान के समय के हैं, जिसे वह युद्ध में इस्तेमाल किया करता था। यह रॉकेट 18वीं सदी के हैं। शनिवार को मज़दूर कर्नाटक के शिवमोगा जिले में बिदानुरू क़िले के पास खुदाई कर रहे थे। तभी एक कुएँ के पास से लोहे की एक बेलनाकार चीज़ प्राप्त हुई। जब इसकी जाँच की गयी तो पता चला की ये रॉकेट है।

 

टीपू सुल्तान के समय के कुछ रॉकेट रखें हैं लंदन म्यूज़ियम में:

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Source: webduniya

जानकारी के अनुसार इसके अंदर पोटैशियम नाइट्रेट, चारकोल, मैग्निशियम पाउडर भरा हुआ था। एक अफ़सर ने बताया कि खुदाई के दौरान प्राप्त किए गए सभी रॉकेटों को शिवप्पा नायक म्यूज़ियम में रखा जाएगा। 2012 में भी शिवमोगा में ही 160 रॉकेट मिले थे। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि टीपू सुल्तान के समय के कुछ रॉकेट लंदन म्यूज़ियम में भी रखे गए हैं। ऐतिहासिक दस्तावेज़ों को छानने पर पता चलता है कि शिवमोगा पहले मैसूर रियासत का हिस्सा था। उस समय 1750 से 99 के बीच अंग्रेज़ों और टीपू सुल्तान के बीच कई युद्ध लड़े गए थे। उसी युद्ध के दौरान टीपू सुल्तान ने इन रॉकेटों का इस्तेमाल किया था।


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