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मोदी सरकार को बड़ी कामयाबी, अगस्ता वेस्टलैंड मामले में मिशेल के बाद राजीव सक्सेना और दीपक तलवार को लाया गया भारत

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अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले के बारे में किसी को बताने की ज़रूरत नहीं है। जिस तरह से कांग्रेस राफ़ेल घोटाले की बात करती है, उसी तरह कांग्रेस के समय में अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला हुआ था। इस मामले में मोदी सरकार को एक और बड़ी कामयाबी मिली है। जानकारी के अनुसार क्रिश्चियन मिशेल के बाद मामले में आरोपी राजीव सक्सेना और दीपक तलवार को भारत वापस लाया गया है। फिलहाल दोनों को प्रवर्तन निदेशालय (ED) के दफ्तर में रखा गया है। इस घोटाले में आरोपी कारोबारी राजीव सक्सेना को संयुक्त अरब अमीरात के दुबई में पकड़ा गया था। भारत पहुंचते ही ईडी ने राजीव सक्सेना और दीपक तलवार को हिरासत में ले लिया। इस मामले में गिरफ्तार क्रिश्चयन मिशेल के बाद इस तरह की यह दूसरी कार्रवाई है। बताया जा रहा है कि लॉबिस्ट दीपक तलवार दुबई भाग गया था।

केस के पूछताछ के लिए नहीं हुए थे उपस्थित:

मोदी सरकार

राजीव सक्सेना के अलावा मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी दीपक तलवार को भी भारत लाया जा रहा है। पिछले साल दिसंबर में संयुक्त अरब अमीरात की सरकार ने प्रत्यर्पण के जरिये ब्रिटिश नागरिक क्रिश्चियन मिशेल को भारत को सौंपा था। क्रिश्चियन मिशेल ने 3,600 करोड़ रुपये के VVIP चॉपर डील में बिचौलिये की भूमिका निभाई थी। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिसंबर में दुबई के कारोबारी राजीव सक्सेना की जमानत याचिका के जवाब में कोर्ट में उन्हें भारत लाए जाने के बारे में की गई अपील को लेकर सूचित किया था, क्योंकि बार-बार समन के बावजूद राजीव सक्सेना इस केस में पूछताछ के लिए उपस्थित नहीं हुए।

खेतान हैं अभी ED की हिरासत में:

आपकी जानकारी की लिए बता दें राजीव सक्सेना और उनकी पत्नी शिवानी अगस्ता वेस्टलैंड केस में आरोपी हैं। दोनों दुबई की कंपनी UHY Saxena and Matrix Holdings के निदेशक हैं। प्रवासी भारतीय राजीव सक्सेना मॉरीशस की एक कंपनी इंटरसेलर टेक्नोलॉजिज लिमिटेड के निदेशक और शेयरहोल्डर हैं। आरोप है कि इस कंपनी का चॉपर डील में लांड्रिंग करने में इस्तेमाल किया गया। जांच एजेंसियों के मुताबिक राजीव सक्सेना पेशे से वकील गौतम खेतान के करीबी हैं। खेतान अभी ईडी की कस्टडी में हैं। वहीं दीपक तलवार पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं। उन पर उनके एनजीओ के जरिए 90 करोड़ रुपये से ज्यादा के फंड का दुरुपयोग के आरोप हैं। उन पर फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) के उल्लंघन के आरोप हैं।


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