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इस मंदिर में साक्षात बाल रूप में विराजमान हैं श्रीकृष्ण

केवल हिंदू धर्म के लोग जा सकते हैं मंदिर के अंदर

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भारत में मंदिरों की कोई कमी नहीं है। इसमें से कुछ मंदिर ऐसे भी हैं, जो पूरे विश्व में प्रसिद्ध हैं। हर मंदिर की अपनी एक ख़ासियत है। कई मंदिर ऐसे भी हैं, जिनके चमत्कारों की बात पूरी दुनिया में की जाती है। कई मंदिर इतने प्राचीन भी हैं, कि उनके बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है। वैसे तो हर मंदिर में किसी को भी जानें की अनुमति होती है, लेकिन आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जहाँ हर किसी को जानें की अनुमति प्राप्त नहीं है।

केवल हिंदू धर्म के लोग जा सकते हैं मंदिर के अंदर:

श्रीकृष्ण

जी हाँ आपको यह जानकर थोड़ी हैरानी ज़रूर हुई होगी, लेकिन यह एकदम सच है। बता दें श्रीकृष्ण का एक ऐसा मंदिर हैं, जहाँ केवल हिंदू धर्म के लोगों को अंदर जानें की इजाज़त है। इस मंदिर में किसी अन्य धर्म के लोग को अंदर नहीं जानें दिया जाता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें केरल में स्थित सदियों पुराने इस मंदिर को गुरुवायुर नाम से जाना जाता है। गुरु का अर्थ है देवगुरु बृहस्पति, वायु का मतलब वायुदेव और ऊर एक मलयालम शब्द है, जिसका मतलब होता है भूमि।

बृहस्पति ने वायुदेव के साथ मिलकर किया था मूर्ति को स्थापित:

गुरुवायुर नाम से प्रसिद्ध यह मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित है। इस मंदिर की पीछे एक पौराणिक मान्यता प्रचलित है। कहा जाता है कि देवगुरु बृहस्पति को कलयुग की शुरुआत में भगवान श्रीकृष्ण की एक मूर्ति मिली। जिसको बृहस्पति ने वायुदेव के साथ मिलकर स्थापित किया था। इसी वजह से इस जगह का नाम गुरुवायुर पड़ गया। मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की भव्य प्रतिमा स्थापित है। प्रतिमा के चार हाथ हैं।

बैकुंठ के नाम से भी जाना जाता है इस जगह को:

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लोकमान्यता है कि यहाँ भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप की पूजा की जाती है। यहाँ दर्शन करने के लिए लोग बहुत दूर से आते हैं। यह भी कहा जाता है कि भगवान विष्णु श्रीकृष्ण के रूप में यहाँ आज भी वास करते हैं। यहाँ विष्णु जी स्वयं निवास करते हैं, इसलिए इस जगह को बैकुंठ भी कहा जाता है। इस मंदिर में ग़ैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है।


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