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ख़ूनी ट्रेन के ड्राइवर ने दी सफ़ाई, कहा- धुएँ की वजह से कुछ नहीं दिखा और हो गया हादसा

घटनास्थल पर नहीं थी रौशनी की व्यवस्था

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सही कहा गया है कि जो होना होता है वह हो ही जाता है। आप चाहे कुछ भी कर लें, लेकिन आप होने वाली घटना को रोक नहीं सकते हैं। इस पृथ्वी पर जिसने भी जन्म लिया है, उसे एक ना एक दिन इस दुनिया से जाना ही है। अगर लोग प्राकृतिक मौत मरते हैं तो इसे सामान्य माना जाता है, लेकिन अगर कोई व्यक्ति हादसे में अपनी जान गँवाता है तो यह बहुत ही दुखद माना जाता है। वहीं जब किसी हादसे में बहुत सारे लोग मारे जाते हैं तो यह बहुत ज़्यादा दुखद माना जाता है। हाल ही में एक ऐसी ही घटना पंजाब में अमृतसर में घटी है।

 

रावण जलाने की वजह से आस-पास हो गया धुआँ:

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आपकी जानकारी के लिए बता दें अमृतसर में शुक्रवार की शाम को एक ऐसी हृदयविदारक घटना घटी जिसके पूरे देश को सदमे में डाल दिया है। बता दें अमृतसर में शुक्रवार की शाम दशहरा के मौक़े पर रावण जलाने आए लोगों के ऊपर ट्रेन चढ़ गयी, जिसकी वजह से 60 लोगों की मौत हो गयी। जिस समय यह ट्रेन हादसा हुआ, उस समय जोड़ा फाटक के पास रेल की पटरियों पर खड़े होकर लोग रावण दहन देख रहे थे। उस समय तक लगभग अँधेरा हो गया था। जैसे ही रावण जलाया गया, आस-पास बहुत सारा धुआँ हो गया।

 

घटनास्थल पर नहीं थी रौशनी की व्यवस्था:

रावण जलाने से पहले और उसके बाद तक ख़ूब पटाखे भी फोड़े जा रहे थे। इसी दौरान यहाँ से होकर ट्रेन गुज़री। अब सबसे बड़ा सवाल उठता है कि क्या लोगों की इतनी भीड़ को ट्रेन का ड्राइवर देख नहीं पाया। इस मामले में मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ट्रेन के ड्राइवर का कहना है कि, रावण जलाने की वजह से आस-पास बहुत सारा धुआँ इकट्ठा हो गया था। घटनास्थल पर रौशनी की भी व्यवस्था नहीं की गयी थी। इस वजह से ट्रेन के ड्राइवर को कुछ दिखाई नहीं दिया। ट्रेन के अधिकारी का भी कहना है कि वहाँ बहुत धुआँ था, जिसकी वजह से ड्राइवर कुछ भी देख पाने में असमर्थ था। इसके अलावा ट्रेन घुमावदार मोड़ पर भी थी।

 

हमारी तरफ़ से नहीं दी गयी थी कार्यक्रम की कोई मंज़ूरी:

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इस मामले में रेलवे का कहना है कि रावण दहन देखने के लिए वहाँ लोगों का पटरियों पर इकट्ठा होना, साफ़ तौर पर अतिक्रमण का मामला था। इस कार्यक्रम के लिए लोगों ने रेलवे से मंज़ूरी भी नहीं ली थी। रेलवे ने इस हादसे की ज़िम्मेदारी अमृतसर प्रशासन के कंधों पर डालते हुए कहा कि अधिकारियों को इस कार्यक्रम की जानकारी थी। इस कार्यक्रम में नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी ने भी शिरकत की थी। रेलवे कर अधिकारी ने कहा, हमें इसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी गयी थी और ना ही हमारी तरफ़ से इस कार्यक्रम के लिए कोई मंज़ूरी दी गयी थी। यह अतिक्रमण का स्पष्ट मामला है।

 

ज़रूर जारी किए जाते विभाग की तरफ़ से गाइडलाइंस:

अधिकारी ने आगे कहा कि, इस घटना की ज़िम्मेदारी स्थानीय प्रशासन को लेनी चाहिए। इस मामले में केंद्रीय रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने कहा कि स्थानीय प्रशासन ने कार्यक्रम की सूचना रेलवे विभाग को नहीं दी थी। उन्होंने आगे कहा कि अगर रेलवे को इसकी जानकारी दी जाती तो उनके विभाग की तरफ़ से गाइडलाइंस ज़रूर जारी किए जाते। ट्रेन की तेज़ रफ़्तार के बारे में मनोज सिन्हा ने कहा कि स्पीड पर नियंत्रण ट्रैक की स्थिति के आधार पर लगाया जाता है, ना की भीड़ को देखते हुए। उन्होंने कहा कि अभी उनकी प्राथमिकता घायलों को ज़्यादा से ज़्यादा चिकित्सा मुहैया और दूसरी सुविधाएँ मुहैया करवाना है।


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