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अमृतसर ट्रेन हादसे को लेकर रेलवे हुआ बेनक़ाब, रेलवे की लापरवाही से हुआ था हादसा

नहीं की गयी थी रेलवे की तरफ़ से कोई सुरक्षा व्यवस्था

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19 अक्टूबर यानी शुक्रवार की शाम को जहाँ पूरा देश ख़ुशियाँ मना रहा था, वहीं अमृतसर में लोग मातम मना रहे थे। वहाँ कब लोगों की ख़ुशियाँ मातम में बदल गयी, किसी को पता ही नहीं चला। दरअसल रावण जलाते समय अमृतसर में ट्रेन हादसा हो गया। अमृतसर ट्रेन हादसे के बाद से लगातार प्रशासन अपनी ज़िम्मेदारी से मुँह मोड़ रहा है और लगातार झूठ बोल रहा है। लेकिन रेवले का एक और झूठ सबके सामने आ गया है। बता दें रेलवे ने अमृतसर ट्रेन हादसे को लेकर सफ़ाई देते हुए कहा था कि जिस जगह पर डीएमयू की वजह से इतना बड़ा रेल हादसा हुआ, वहाँ पटरियों पर घुमाव था। इस वजह से ट्रेन का ड्राइवर यह समझ नहीं पाया कि लोग पटरी पर खड़े हैं।

 

नहीं की गयी थी रेलवे की तरफ़ से कोई सुरक्षा व्यवस्था:

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जबकि सच्चाई यह नहीं है। रेलवे द्वारा बोले जानें वाले इस कथन का सच जानने के लिए जब एक न्यूज़ चैनल ने मौक़े का मुआयना किया तो सच्चाई सामने आ गयी और रेलवे का झूठ भी पकड़ा गया। जिस जगह यह हादसा हुआ, यानी जोड़ा फाटक से दोनों तरफ़ जालंधर-अमृतसर रेल ट्रैक एकदम सीधी है।

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ट्रेन के ड्राइवर की नज़र सिक्स बाई सिक्स होती है। ऐसे में ट्रेन के ड्राइवर का रेल की पटरी पर खड़े लोगों का ना देख पाना हैरानी में डालता है। जिस जगह यह हादसा हुआ, वहाँ पर जोड़ा फाटक के पास रेलवे की की तरफ़ से कोई सुरक्षा व्यवस्था भी नहीं की गयी है।

 

एलईडी का मुँह कर दिया गया था पटरी की तरफ़:

केवल यही नहीं रेलवे ने कोई फेंसिंग भी नहीं की है। हालाँकि रावण दहन के कार्यक्रम स्थल के पास रेलवे की ऊँची-ऊँची दीवार है। यहाँ पर विजयदशमी मेले के आयोजकों ने मेला ग्राउंड के साथ-साथ रेल की पटरियों से लगी हुई दीवार के पास की रेलवे की ज़मीन पर खरपतवार और पेड़-पौधों को साफ़ करके लोगों के बैठने की व्यवस्था की हुई थी। स्थानीय लोगों का कहना था कि एलईडी का मुँह पटरी की तरफ़ किया गया था, ताकि लोग रावण दहन का आनंद ले सकें। ऐसे में जब यह सब किया जा रहा था उस समय रेलवे के ट्रैक की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी लेने वाली आरपीएफ़ कहाँ थी? इसके साथ ही उसकी इंटेलीजेंस यूनिट कहाँ थी? जब विजयदशमी का कार्यक्रम हो रहा था तो रेलवे के अधिकारी-सुरक्षाकर्मी क्यों सोए हुए थे?

 

रावण दहन के लिए इकट्ठा हुए सैकड़ों लोगों को कुचलते हुए निकली ट्रेन:

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अब जब यह हादसा हो गया तो रेलवे यह दावा कर रहा है कि ट्रैक पर लोग अनाधिकृत रूप से आ गए थे। लिहाज़ इसमें रेलवे की कोई ग़लती नहीं है। इसके साथ ही रेलवे का यह भी कहना है कि विजयदशमी मेले का आयोजन जहाँ पर किया जाता है, वह जगह भी उनके अंतर्गत नहीं आती है।

इस कारण उनसे परमिशन लेने की भी ज़रूरत नहीं थी। इस पूरी घटना में स्थानीय प्रशासन की लापरवाही को इनकार नहीं किया जा सकता है, लेकिन ऐसा भी नहीं है कि रेलवे दूध की धुली है। शुक्रवार को अमृतसर में जोड़ा फाटक के पास डीएमयू ट्रेन रावण दहन के लिए इकट्ठा हुए सैकड़ों लोगों को कुचलते हुए निकल गयी थी।

 

यह नहीं है कोई रेल दुर्घटना:

इस घटना के बाद रेल मंत्रालय का कहना था कि इसमें ट्रेन के ड्राइवर (लोको पायलट) की कोई ग़लती नहीं है और इसकी सीआरएस जाँच की भी ज़रूरत नहीं है। इस मामले में रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्वनी लोहानी का कहना है कि, इस हादसे में लोको पायलट की कोई गलती नहीं है। कुल मिलाकर रेलवे का कहना है कि जहां पर यह हादसा हुआ वह जगह रेलवे के कानून के मुताबिक लोगों के इकट्ठा होने के लिए नहीं है। ऐसी किसी जगह पर जब लोग इकट्ठा होंगे, तो उसे गैर कानूनी एंट्री माना जाता है। उन्होंने कहा कि रेल संरक्षा आयोग नागर विमानन मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करता है और सभी रेल दुर्घटनाओं की अनिवार्य जांच करता है। यह एक ऐसा हादसा था, जिसमें लोगों ने रेल पटरी पर अनधिकृत प्रवेश किया और यह कोई रेल दुर्घटना नहीं है।

 

हलका मोड़ भी था तो कैसे दिखाई देता ड्राइवर को:

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इसके अलावा रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने घटनास्थल का दौरा करने के बाद कहा था कि घटना के वक्त शाम हो चुकी थी और वहां कि पटरी भी घुमावदार थी, जिसकी वजह से ड्राइवर को आगे नहीं दिखाई पड़ा होगा। जब उनसे ट्रेन की रफ्तार के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा था कि ट्रेनें तो स्पीड से ही चलती हैं।

गेटमैन के खिलाफ कार्रवाई करने के सवाल पर उन्होंने कहा था कि जिस जगह पर रावण का पुतला जलाया जा रहा था, वहां से रेल फाटक 300 मीटर दूर है। मामले की जांच के सवाल पर सिन्हा का कहना था कि किस बात की इनक्वायरी हम कराएं? जब उनसे पूछा गया कि क्या ड्राइवर किसी भी तरह ट्रेन नहीं रोक सकता था, इस पर मंत्री ने कहा था कि पटरी से 70 मीटर दूर कार्यक्रम हो रहा था, इसके अलावा वहां हलका मोड़ भी था, तो ड्राइवर को कैसे दिखाई देता?

 

हादसे के बाद बिछ गयी थी चारों तरफ़ लाशें ही लाशें:

बता दें कि शुक्रवार शाम को अमृतसर के चौड़ा बाजार स्थित जोड़ा फाटक के रेलवे ट्रैक पर लोग मौजूद थे। पटरियों से महज 200 फुट की दूरी पर पुतला जलाया जा रहा था। इसी दौरान जालंधर से अमृतसर जा रही डीएमयू ट्रेन वहां से गुजरी और ट्रैक पर मौजूद लोगों को कुचलते हुए निकल गयी। इसके बाद जो हुआ वह बहुत ही भयानक था। चारों तरफ़ बस लाशें ही लाशें दिखाई दे रही थी। जानकारी के अनुसार इस भयानक रेल हेड में 60 लोगों की मौत हुई है, जबकि 57 लोग घायल हैं। बताया जा रहा है कि जब यह हादसा हुआ उस समय ट्रेन की रफ्तार लगभग 100 किमी. प्रति घंटे थी।

 

 


 

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