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जेटली के इस फ़ार्मुले से 12 राज्यों में 5 रुपए सस्ता हुआ पेट्रोल डीज़ल, जानिए कैसे?

सरकारी ख़ज़ाने पर पड़ेगा 10 लाख 500 करोड़ रुपए का बोझ

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भारत में पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतों में जैसे आग लगी हुई है। पिछले कुछ दिनों से पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतें लगातार आसमान छूती जा रही हैं। बढ़ती पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतों का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ा है। इससे आम लोगों में मोदी सरकार के ख़िलाफ़ जमकर ग़ुस्सा भर रहा है। समय-समय पर लोगों का यह ग़ुस्सा आंदोलन के रूप में सामने भी आया है। तेल के बढ़ते दामों की वजह से देश में लगातार राजनीति भी तेज़ हुई है। विपक्ष इस समय तेल के बढ़ते दाम की वजह से मोदी सरकार पर हमलावर है।

 

तेल की क़ीमतें हो जाएँगी 5 रुपए तक सस्ती:

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लगातार सरकार की इमेज ख़राब होते देख केंद्र सरकार ने कई राज्यों में तेल की क़ीमतों में 5 रुपए प्रति लीटर तक की कमी करने का फ़ैसला लिया है। बता दें केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतों में 2.50 रुपए प्रति लीटर की कटौती का ऐलान किया। इसके साथ ही उन्होंने राज्यों से भी अपने वैट में कटौती करते हुए क़ीमतों में कमी करने का सुझाव दिया। बता दें जेटली के इस सुझाव को 12 भाजपा शासित राज्यों ने स्वीकार करते हुए 2.5 रुपए की और कमी कर दी। इस तरह से इन राज्यों में तेल की क़ीमतें 5 रुपए प्रति लीटर तक सस्ती हो जाएँगी।

 

राज्यों ने अपने वैट में कमी करके दी जाता को राहत:

वित्त मंत्री अरुण जेटली के इस ऐलान के तुरंत बाद ही महाराष्ट्र और गुजरात की भाजपा सरकार ने भी अपनी तरफ़ से वैट की क़ीमतों में कटौती करते हुए 2.50 रुपए प्रति लीटर की कटौती का ऐलान किया। यानी अब से इन राज्यों में 5 रुपए प्रति लीटर पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतें सस्ती हो जाएँगी। इसके बाद उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, असम, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर सरकार ने भी अपने वैट की क़ीमतों में कमी करते हुए तेल के दामों में राहत दी है।

 

महाराष्ट्र सरकार ने दी केवल पेट्रोल पर छूट:

 

इस हिसाब से देखा जाए तो अब से कुल 12 राज्यों में पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतें 5 रुपए प्रति लीटर सस्ती हो गयी हैं। हालाँकि इस समय जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल का शासन है। बता दें भाजपा शासित राज्यों में से केवल महाराष्ट्र ने सिर्फ़ पेट्रोल पर ही 2.50 रुपए प्रति लीटर पर राहत देने का फ़ैसला लिया, जबकि झारखंड ने पहले डीज़ल पर यह छूट देने का ऐलान किया था। लेकिन कुछ समय बाद पेट्रोल पर भी यही छूट देने की घोषणा कर दी। डीज़ल की क़ीमतों में फ़िलहाल के लिए कोई राहत नहीं दिए जानें पर महाराष्ट्र सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि डीज़ल की क़ीमतों में कमी लानें की बात चल रही है। जल्दी ही इसपर फ़ैसला लिया जाएगा।

 

केरल ने कटौती करे से साफ़-साफ़ कर दिया मना:

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जानकारी के अनुसार पेट्रोल-डीज़ल पर केंद्र सरकार द्वारा प्रति लीटर 2.50 रुपए की कटौती करने के लिए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने ट्वीट करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली को धन्यवाद कहा है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार ने भी 2.50 रुपए वैट कम किया है। इससे उपभोक्ताओं को 5 रुपए प्रति लीटर की राहत मिल जाएगी। हालाँकि केरल ने ऐसा कुछ करने से साफ़-साफ़ मना कर दिया है। केरल के वित्त मंत्री थामस इसाक ने कहा कि राज्य अभी इस तरह की कटौती करने की स्थिति में नहीं है। हमने कुछ दिन पहले ही ऐसा किया था।

 

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आम जनता को उठानी पड़ी है काफ़ी परेशानी:

तेल की क़ीमतों में कमी करने के जेटली के सुझाव पर बिहार के उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि हमें जेटली जी से कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। हम पहले केंद्र सरकार का आदेश देखेंगे, उसके बाद पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतों पर फ़ैसला करेंगे। हर राज्य की अपनी-अपनी स्थिति होती है, इसलिए पहले पत्र आने दीजिए। इससे पहले एक प्रेस कॉन्फ़्रेन्स में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शेयर बाज़ार, पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतों पर विस्तार से अपनी बात रखी थी। इस कटौती ने रेवेन्यू विभाग को 1.50 रुपए और ओएमसी को एक रुपए वहन करना होगा। पिछले कुछ दिनों में पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे देश की आम जनता काफ़ी परेशान हैं।

 

सरकारी ख़ज़ाने पर पड़ेगा 10 लाख 500 करोड़ रुपए का बोझ:

बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार के इस ऐलान के बाद आम जनता को काफ़ी राहत मिलने वाली है। जेटली ने कहा कि पेट्रोल-डीज़ल के दाम में इस कटौती की वजह से केंद्र सरकार के ख़ज़ाने पर 10 हज़ार 500 करोड़ रुपए का बोझ पड़ेगा। केन्द्र सरकार ने अंतरमंत्रालयी पहल करते हुए रेवेन्यू और पेट्रोलियम मंत्रालय से बातचीत हुई है। पिछले साल केन्द्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में 2 रुपये की कटौती की थी। जेटली ने कहा कि सरकार तभी कोई छूट दे सकती है, जब राजस्व की क्षमता बढ़ती है। रेवेन्यू विभाग के जरिए कंज्यूमर को रिलीफ देने का काम तीन हिस्सों में बांटकर किया जाएगा।

 

राज्यों के लिए यह काम करना है बहुत आसान:

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लिहाजा जेटली ने बताया कि राज्यों से कहा जा रहा है कि केंद्र की 2.50 रुपए की कटौती की तर्ज़ पर वह भी अपने-अपने राज्यों में 2.50 रुपए प्रति लीटर की कटौती की प्रभावी करे। यह काम राज्यों के लिए करना बहुत ही आसान है। वित्त मंत्री जेटली ने ऐलान किया कि राज्य सरकारों के पास एडवैलोरम टैक्स है। राज्यों का औसत 29 प्रतिशत है। इसलिए जब-जब कच्चे तेल का दाम बढ़ता है तो राज्यों को इसका अधिक इज़ाफ़ा होता है। वहीं केंद्र सरकार की कमाई स्थिर ही रहती है। वित्त मंत्री जेटली ने आगे कहा कि हमने तेल कम्पनियों को 10 बिलियन डॉलर विदेशी ऑयल बॉंड के ज़रिए उठाए की अनुमति दी है।

 

घरेलू बाज़ार में बदलाव का असर पड़ रहा है पूरी दुनिया पर:

उन्होंने कहा कि, सरकार ने आईएसएंडएफएस में निर्णायक फैसला लिया है। सरकार ने आयात पर लगाम लगाने की कवायद की है। भारतीयों को मसाला बॉन्ड पर टैक्स चोरी रोकने के लिए कदम उठाए हैं। जेटली ने आगे कहा कि पहली तिमाही नतीजों में 8.5 प्रतिशत बढ़ोतरी दिखी है। रेवेन्यू के जो आंकड़े मिल रहे हैं वह अच्छे हैं। डायरेक्ट टैक्स से सरकार को उम्मीद से बेहतर मिल रहा है। इससे फिसकल डेफिसिट कम करने में फायदा होगा। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों पर अमेरिका में घरेलू बाजार में हो रहे बदलाव का असर पूरी दुनिया पर पड़ा है। लेकिन घरेलू संकेत अच्छे हैं। हालांकि कच्चे तेल के चलते करेंट अकाउंट डेफिसिट पर चुनौती है, लेकिन अन्य आंकड़े सरकार के पक्ष में हैं।


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