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अरुण जेटली बिहार में बने NDA के संकटमोचक, इस तरह ख़त्म करवाया भेदभाव

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यह किसी को बताने की ज़रूरत नहीं है कि NDA के इस समय बुरे दिन चल रह हैं। पिछले कुछ दिनों में कई पार्टियों ने NDA से किनारा कर लिया है। हाल ही में सीट शेयरिंग को लेकर बिहार में NDA के घटक दलों में खींचतान हो गई। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने रविवार को जदयू और लोजपा नेताओं के साथ बैठक की। इस बैठक के बाद साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में तीनों पार्टियों के बीच सीटों के बंटवारे का ऐलान किया गया। सूत्रों के मुताबिक इस खींचतान को खत्म करने में केंद्रीय वित्त मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2013 के बाद वे पहली बार पार्टी के लिए अपनी पुरानी ‘संकटमोचक’ की भूमिका में नजर आए।

अमित शाह एक बार फिर करेंगे चर्चा:

अरुण जेटली

सूत्रों के अनुसार, ‘बिहार के नेताओं से भलीभांति परिचित’ अरुण जेटली ने बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को रामविलास पासवान की पार्टी को 6 लोकसभा सीटों के अलावा 1 राज्यसभा सीट देने के लिए तैयार किया। इससे पहले पिछले हफ्ते भी सीट शेयरिंग के मुद्दे पर अरुण जेटली और रामविलास पासवान के बीच करीब घंटे भर लंबी मीटिंग चली थी।

आपको बता दें कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने सीट बंटवारे की घोषणा करते हुए कहा कि बिहार की 40 लोकसभा सीटों में से 17 पर भाजपा, 17 पर जदयू और छह पर लोक जनशक्ति पार्टी चुनाव लड़ेगी। हालांकि, किस पार्टी को कौन सी सीट दी जाएगी इस पर कोई फैसला नहीं हुआ है। शाह ने कहा कि इस मुद्दे पर तीनों दलों के नेता एक बार फिर साथ बैठकर चर्चा करेंगे।

इस बार नतीजे आएँगे 2009 से भी बेहतर:

प्रेस कॉन्फ्रेंस में नीतीश कुमार ने कहा, ‘अब तय हो गया है कि हम सब मिलकर काम करेंगे और किसी भी मुद्दे पर बैठकर बात करेंगे। राम विलास पासवान राज्यसभा जाएंगे. जहां भी पहले चुनाव होगा, वहीं से उन्हें राज्य सभा भेजा जाएगा। बीजेपी का धन्यवाद कि उन्होंने पासवान की इच्छा का ध्यान रखेगा। 2009 में बीजेपी और जेडीयू का गठबंधन था, तब पूरे देश में सिर्फ बिहार में ही एनडीए को 40 में से 32 सीटें मिली थी। इस बार उम्मीद है कि 2014 से ही नहीं बल्कि 2009 से भी बेहतर नतीजे आएंगे।’ वहीं रामविलास पासवान ने कहा कि अमित शाह, नीतीश कुमार और अरुण जेटली का धन्यवाद। हमें समझौता सम्मानजनक होने की उम्मीद थी।


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