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अटल बिहारी वाजपेयी: ऐसा व्यक्तित्व जिसने सबको बनाया अपना दीवाना

2014 में नवाज़ा गया सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से

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अटल बिहारी वाजपेयी भारत के दसवें प्रधानमंत्री थे। पहली बार ये 16 मई से 1 जून 1996 तक प्रधानमंत्री के पद पर रहे थे। इसके बाद 19 मार्च 1998 से लेकर 22 मई 2004 तक प्रधानमंत्री के तौर पर काम किया था। वाजपेयी जी हिंदी कवि, पत्रकार और एक प्रखर वक़्ता थे। भारतीय जनसंघ (अभी की भारतीय जनता पार्टी) के संस्थापकों में से एक थे। अटल बिहारी वाजपेयी 1968 से 1973 तक इसके अध्यक्ष भी रहे थे। उन्होंने लम्बे समय तक राष्ट्रधर्म, पाञ्चजन्य और वीर अर्जुन आदि राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत अनेक पत्र-पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया। इन्होंने जीवनभर अविवाहित रहकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के काम करने का निर्णय लिया था।

 

राजनीति के लिए कर दिया पूरा जीवन समर्पित:

अटल बिहारी वाजपेयी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के पहले प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने ग़ैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री के तौर पर सफलता पूर्वक अपने 5 साल के कार्यकाल को पूरा किया था। 13 दलों के गठबंधन से इन्होंने सरकार बनाई थी। जिसमें 81 मंत्री थे। काफ़ी समय पहले ही अटल बिहारी वाजपेयी राजनीति से सन्यास ले चुके थे। 2009 से ही ये गम्भीर बीमारी से पीड़ित थे। 16 अगस्त 2018 को दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में श्री वाजपेयी जी का निधन हो गया। इन्होंने अपना पूरा जीवन भारतीय राजनीति के लिए समर्पित कर दिया था।

 

बचपन से ही आ गए थे काव्य के गुण:

atal bihari vajpayee

इनका जन्म 25 दिसम्बर 1924 को ग्वालियर में हुआ था। इनके पिता पंडित कृष्ण बिहारी वाजपेयी मध्य प्रदेश की ग्वालियर रियासत में अध्यापक थे। वहीं इनका जन्म कृष्णा वाजपेयी की कोख से हुआ था। इनके पिता कृष्ण बिहारी एक अध्यापक के साथ-साथ हिंदी और ब्रज भाषा के सिद्धहस्त कवि भी थे। इसी वजह से अटल जी में भी बचपन से ही काव्य के गुण आ गए थे। जानकारी के अनुसार महात्मा रामचंद्र वीर द्वारा रचित अमर कृति ‘विजय पताका’ पढ़कर अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन की दिशा ही बदल गयी। अटल जी ने ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज से बीए की शिक्षा हासिल की। छात्र जीवन में ही वो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक बन गए थे।

 

2014 में नवाज़ा गया सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से:

उसी समय से ये राष्ट्रीय स्तर की वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में भाग लेते रहे। इन्होंने कानपुर के डीएवी कॉलेज से राजनीति शास्त्र में एम ए की डिग्री प्रथम श्रेणी से हासिल की। इसके बाद इन्होंने कानपुर से ही एल एल बी की पढ़ाई शुरू की, लेकिन बीच में ही पढ़ाई छोड़कर ये पूरी निष्ठा से संघ के कार्य में जुट गए। डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के निर्देशन में इन्होंने राजनीति का पाठ तो पढ़ा ही, इसके साथ ही इन्होंने पाञ्चजन्य, राष्ट्रधर्म, दैनिक स्वदेश और वीर अर्जुन जैसे पत्र-पत्रिकाओं के सम्पादन का भी कार्य सफलता पूर्वक सम्भाला। इनके बेहतर कामों के लिए इन्हें मोदी सरकार ने 2014 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाज़ा।

 

विदेशों में भी बनायी भारत की छवि:

atal bihari vajpayee

अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय जनसंघ की स्थापना करने वालों में से एक थे। सन् 1968 से 1973 तक वह उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष भी थे। सन् 1955 में अटल बिहारी वाजपेयी ने पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा, दुर्भाग्य से इन्हें सफलता नहीं मिल पायी। इसके बाद भी इन्होंने हिम्मत नहीं हारी और सन् 1957 में बलरामपुर (जिला गोण्डा, उत्तर प्रदेश) से जनसंघ के प्रत्याशी के रूप में विजयी होकर लोकसभा में पहुँचे। सन् 1957 से 1977 तक जनता पार्टी की स्थापना तक वे बीस वर्ष तक लगातार जनसंघ के संसदीय दल के नेता रहे। मोरारजी देसाई की सरकार में सन् 1977 से 1979 तक विदेश मन्त्री रहे और विदेशों में भारत की छवि बनायी।

 

देश ने छुए प्रगति के कई आयाम:

1980 में जनता पार्टी से असन्तुष्ट होकर इन्होंने जनता पार्टी छोड़ दी और भारतीय जनता पार्टी की स्थापना में मदद की। 6 अप्रैल 1980 में बनी भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पद का दायित्व भी वाजपेयी को सौंपा गया। दो बार राज्यसभा के लिये भी निर्वाचित हुए। लोकतन्त्र के सजग प्रहरी अटल बिहारी वाजपेयी ने सन् 1997 में प्रधानमन्त्री के रूप में देश की बागडोर संभाली। 19 अप्रैल 1998 को पुनः प्रधानमन्त्री पद की शपथ ली और उनके नेतृत्व में 13 दलों की गठबन्धन सरकार ने पाँच वर्षों में देश के अन्दर प्रगति के अनेक आयाम छुए।

 

रहते थे दिल्ली के सरकारी आवास में:

सन् 2004 में कार्यकाल पूरा होने से पहले भयंकर गर्मी में सम्पन्न कराये गये लोकसभा चुनावों में भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबन्धन (एनडीए) ने वाजपेयी के नेतृत्व में चुनाव लड़ा और भारत उदय (अंग्रेजी में शाइनिंग इण्डिया) का नारा दिया। इस चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला। ऐसी स्थिति में वामपंथी दलों के समर्थन से काँग्रेस ने भारत की केन्द्रीय सरकार पर कायम होने में सफलता प्राप्त की और भाजपा विपक्ष में बैठने को मजबूर हुई। अटल बिहारी वाजपेयी राजनीति से संन्यास ले चुके थे और नई दिल्ली में 6-ए कृष्णामेनन मार्ग स्थित सरकारी आवास में रहते थे।

 

प्रधानमंत्री के रूप में अटल बिहारी सरकार की उपलब्धियाँ:

बनाया भारत को परमाणु शक्ति सम्पन्न राष्ट्र:

atal bihari vajpayee

अटल सरकार ने 19 और 13 मई 1998 को पोखरण में पाँच भूमिगत परमाणु परीक्षण विस्फोट करके भारत को परमाणु शक्ति संपन्न देश घोषित कर दिया। इस कदम से उन्होंने भारत को निर्विवाद रूप से विश्व मानचित्र पर एक सुदृढ वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित कर दिया। यह सब इतनी गोपनीयता से किया गया कि अति विकसित जासूसी उपग्रहों व तकनीकी से संपन्न पश्चिमी देशों को इसकी भनक तक नहीं लगी। यही नहीं इसके बाद पश्चिमी देशों द्वारा भारत पर अनेक प्रतिबंध लगाए गए लेकिन वाजपेयी सरकार ने सबका दृढ़तापूर्वक सामना करते हुए आर्थिक विकास की ऊचाईयों को छुआ।

 

पाकिस्तान से सम्बन्धों में सुधार की कोशिश:

19 फ़रवरी 1999 को सदा-ए-सरहद नाम से दिल्ली से लाहौर तक बस सेवा शुरू की गई। इस सेवा का उद्घाटन करते हुए प्रथम यात्री के रूप में वाजपेयी जी ने पाकिस्तान की यात्रा करके नवाज़ शरीफ से मुलाकात की और आपसी संबंधों में एक नयी शुरुआत की।

 

कारगिल युद्ध विजय:

पाकिस्तान से रिश्ते सुधर ही रहे थे कि कुछ ही समय बाद पाकिस्तान के तत्कालीन सेना प्रमुख परवेज़ मुशर्रफ की शह पर पाकिस्तानी सेना व उग्रवादियों ने कारगिल क्षेत्र में घुसपैठ करके कई पहाड़ी चोटियों पर कब्जा कर लिया। अटल सरकार ने पाकिस्तान की सीमा का उल्लंघन न करने की अंतर्राष्ट्रीय सलाह का सम्मान करते हुए धैर्यपूर्वक किंतु ठोस कार्यवाही करके भारतीय क्षेत्र को मुक्त कराया। इस युद्ध में प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण भारतीय सेना को जान माल का काफी नुकसान हुआ और पाकिस्तान के साथ शुरु किए गए संबंध सुधार एकबार फिर ख़राब हो गए।

 

स्वर्णिम चतुर्भुज योजना:

atal bihari vajpayee

भारत भर के चारों कोनों को सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना (अंगरेजी में- गोल्डन क्वाड्रिलेट्रल प्रोजैक्ट या संक्षेप में जी क्यू प्रोजैक्ट) की शुरुआत की गई। इसके अंतर्गत दिल्ली, कलकत्ता, चेन्नई व मुम्बई को राजमार्ग से जोड़ा गया। ऐसा माना जाता है कि अटल जी के शासनकाल में भारत में जितनी सड़कों का निर्माण हुआ इतना केवल शेरशाह सूरी के समय में ही हुआ था।

 

एक कवि के रूप में अटल बिहारी वाजपेयी:

अटल बिहारी वाजपेयी राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ एक कवि भी थे। मेरी इक्यावन कविताएँ इनके प्रसिद्ध काव्यसंग्रह थे। वाजपेयी जी को काव्य रचनाशीलता एवं रसास्वाद के गुण विरासत में मिले हैं। उनके पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी ग्वालियर रियासत में अपने समय के जाने-माने कवि थे। वे ब्रजभाषा और खड़ी बोली में काव्य रचना करते थे। पारिवारिक वातावरण साहित्यिक एवं काव्यमय होने के कारण उनकी रगों में काव्य रक्त-रस अनवरत घूमता रहा है। उनकी सर्व प्रथम कविता ताजमहल थी। इसमें शृंगार रस के प्रेम प्रसून न चढ़ाकर “एक शहंशाह ने बनवा के हसीं ताजमहल, हम गरीबों की मोहब्बत का उड़ाया है मजाक” की तरह उनका भी ध्यान ताजमहल के कारीगरों के शोषण पर ही गया।

वास्तव में कोई भी कवि हृदय कभी कविता से वंचित नहीं रह सकता। राजनीति के साथ-साथ समष्टि एवं राष्ट्र के प्रति उनकी वैयक्तिक संवेदनशीलता आद्योपान्त प्रकट होती ही रही है। उनके संघर्षमय जीवन, परिवर्तनशील परिस्थितियाँ, राष्ट्रव्यापी आन्दोलन, जेल-जीवन आदि अनेक आयामों के प्रभाव एवं अनुभूति ने काव्य में सदैव ही अभिव्यक्ति पायी। विख्यात गज़ल गायक जगजीत सिंह ने अटल जी की चुनिंदा कविताओं को संगीतबद्ध करके एक एल्बम भी निकाला था।


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