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एससी-एसटी एक्ट के ख़िलाफ़ एकजुट हुए सवर्ण, मध्य प्रदेश में आज भारत बंद का ऐलान

मोदी सरकार पर लगाया दलितों की तुष्टिकरण का लगाया आरोप

sc st act
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एससी-सएसटी एक्ट को मूल रूप से बहाल करने के बाद देशभर के सवर्ण काफ़ी नाराज़ हुए हैं। सवर्णों की नाराज़गी वर्तमान भाजपा सरकार के फ़ैसले से है। आपको बता दें मध्य प्रदेश के साथ ही छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भी सवर्ण एकजुट होने लगे हैं। सबसे कड़ा विरोध मध्य प्रदेश में देखने को मिल रहा है। वहीं भारत के कई सवर्ण संगठनों ने 6 सितम्बर को भारत बंद का ऐलान भी किया है। फ़िलहाल मध्य प्रदेश सरकार ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश के कई जिलों में धारा 144 लागू कर दिया है। इसके साथ ही पूरे प्रदेश में हाई अलर्ट भी जारी कर दिया गया है।

 

दलितों की तुष्टिकरण का लगाया आरोप:

आपको बता दें भारत बंद को ध्यान में रखते हुए ग्वालियर के सभी स्कूल-कॉलेजों को बंद रखने का भी निर्देश दे दिया गया है। ज्ञात हो कि केंद्र सरकार ने एससी-एसटी एक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट की तरफ़ से दिए गए फ़ैसले को भी पलट दिया। इसके बाद भाजपा के फ़ैसले को लेकर धीरे-धीरे सवर्णों में नाराज़गी बढ़ने लगी। वहीं कई संगठनों में भाजपा की मोदी सरकार पर दलितों के तुष्टिकरण का भी आरोप लगाया है। जानकारी के अनुसार सवर्णों की नाराज़गी मध्य प्रदेश के अलावा अब धीरे-धीरे अन्य राज्यों की तरफ़ भी बढ़ने लगी है।

 

SC-एसटी एक्ट को कर दिया मूल रूप में बहाल:

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सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए SC-एसटी एक्ट में तत्काल गिरफ़्तारी नहीं किए जानें का आदेश दिया था। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज होने वाले केसों में अग्रिम ज़मानत को भी मंज़ूरी दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस क़ानून के तहत दर्ज मामलों में तुरंत गिरफ़्तारी की बजाय पुलिस को सात दिनों के अंदर जाँच करनी चाहिए और इसके बाद आगे की कार्यवाई करनी चाहिए। लेकिन केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को बदलते हुए एससी-एसटी एक्ट को वापस मूल स्वरूप में बहाल कर दिया।

 

 

इस एक्ट के तहत बिना जाँच के सम्भव है गिरफ़्तारी:

बता दें हाल ही में यह संशोधित एससी-एसटी (एट्रोसिटी एक्ट) फिर से लागू कर दिया गया है। इस एक्ट के लागू होने के बाद फिर से बिना जाँच के ही गिरफ़्तारी सम्भव हो गयी है। यानी अगर कोई एससी-एसटी व्यक्ति इस एक्ट के तहत किसी के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज करवाता है तो मामले की जाँच किए बग़ैर ही पुलिस को गिरफ़्तार करना होगा। बता दें मोदी सरकार के संशोधित एससी-एसटी एक्ट के विरोध की सबसे बड़ी वजह गिरफ़्तारी वाला पहलू ही माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि इस गिरफ़्तारी वाले प्रावधान की वजह से कई बार इस एक्ट का दुरुपयोग भी हुआ है और कई मामले सामने भी आए हैं।

 

35 संगठन कर चुके हैं भारत बंद का आह्वान:

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इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ऐसा ना हो। इस प्रावधान में संशोधन कर गिरफ़्तारी से पहले जाँच की बात कही थी। मोदी सरकार के एक्ट को पुनः उसी रूप में लागू करने के बाद से देशभर के सवर्ण एकजुट हो गए हैं और वह मोदी सरकार के ख़िलाफ़ सड़कों पर प्रदर्शन भी कर रहे हैं। सवर्णों ने इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ 6 सितम्बर को भारत बंद का भी ऐलान किया है। जानकारी के अनुसार सवर्णों के 35 संगठन भारत बंद का आह्वान कर चुके हैं। आपको बता दें जब इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपना फ़ैसला सुनाया था तो 2 अप्रैल को दलितों ने भारत बंद का ऐलान किया था। इसके बाद कई जगह हिंसा भी हुई थी। इसी वजह से मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला ही बदल दिया।

 

पुलिस अधीक्षकों को कर दिया गया है अलर्ट:

सवर्ण समाज के छः सितम्बर को प्रस्तावित बंद की वजह से मध्य प्रदेश पुलिस ने सभी पुलिस अधीक्षकों को अलर्ट कर दिया है। कुछ जिलों में प्रशासन को अलग-अलग संगठनों ने बंद के आह्वान की सूचना दी है। सोशल मीडिया पर चल रहे संदेशों से प्रदेश पुलिस ने लोगों को सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। पुलिस महानिरीक्षक (क़ानून व्यवस्था) मकरंद देउस्कर ने बताया कि एससी-एसटी एक्ट में संशोधन को लेकर स्ववर्ण समाज का विरोध अब तक मंदसौर, नीमच, ग्वालियर जैसे कुछ शहरों में रैली के रूप में हुआ है। मध्य प्रदेश के ग्वालियर, चम्बल और उज्जैन संभाग में विरोध के स्वर काफ़ी तीखे बताए जा रहे हैं।

 

नहीं महसूस की जा रही है इंटरनेट निलम्बन की ज़रूरत:

वहीं कटनी, सतना, जबलपुर, रीवा, विदिशा, हरदा, बदनावर, सागर, टीकमगढ़, मंडला, श्योपुर जैसे जिलों में एक्ट में संशोधन कोलेकर नाराज़गी स्वरूप विरोध प्रदर्शन हुए हैं। पुलिस महानिरीक्षक मकरंद ने बताया कि सपाक्स सहित लगभग 30-35 सवर्ण संगठनों ने भारत बंद का आह्वान किया है, जो केवल सोशल मीडिया पर चल रहा है। होशंगाबाद और कुछ अन्य स्थानों पर एक-दो संगठनों ने भारत बंद की सूचना प्रशासन को दी है। उन्होंने कहा कि अभी प्रदेश में इंटरनेट निलम्बन जैसी ज़रूरत नहीं महसूस की जा रही है। इसके बाद भी जिलों को जन्माष्टमी के दौरान उपलब्ध कराई गयी पुलिस फ़ोर्स को वापस नहीं बुलाया गया है। भारत बंद के समय वे क़ानून व्यवस्था के लिए उपयोग कर सकते हैं।

 


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