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भूपेन हज़ारिका का परिवार नागरिकता क़ानून के विरोध में, किया भारत रत्न लौटाने का ऐलान

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नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध में हाल ही में भारत रत्न से सम्मानित भूपेन हज़ारिका की परिवार ने एक बहुत बड़ा फ़ैसला लिया है। उनके परिवार वालों ने बिल के विरोध में भारत रत्न लौटाने का निर्णय लिया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बीते 25 जनवरी को ही भूपेन हज़ारिका को मोदी सरकार ने यह सम्मान देने की घोषणा की थी। हालाँकि उनके परिवार के लोग इस मुद्दे पर एकमत नज़र नहीं आ रहे हैं। अमेरिका में रहने वाले उनकी बेटे तीज हज़ारिका और समर हज़ारिका इस फ़ैसले पर एकमत नहीं हैं। समर के परिवार का कहना है कि भूपेन हजारिका जैसे लीजेंड के लिए इस तरह व्यक्तिगत रूप से इतना बड़ा फैसला नहीं लिया जा सकता है।

लिया जा चुका है सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में:

नागरिकता संशोधन विधेयक पर असम में पिछले कई दिनों से प्रदर्शन हो रहा है। अब तक सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जा चुका है। हाल ही में गुवाहाटी दौरे पर पीएम मोदी ने कहा था कि जो सम्मान भूपेन हजारिका को बहुत पहले मिल जाना था, वे अब जाकर मिला है। पीएम मोदी ने यह भी कहा था कि नागरिकता कानून को लेकर कुछ लोग भ्रम फैला रहे हैं। केंद्र सरकार असम और पूर्वोत्तर के सभी राज्यों की सांस्कृति, भाषा और संसाधनों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले धार्मिक अल्पसंख्यक मां भारती में आस्था रखने वाले सच्चे संतान हैं। पहले ये भारत का ही हिस्सा था इसलिए वहां से प्रताड़ित होकर आए हिंदू, सिख, इसाई, पारसियों का संरक्षण हमारा दायित्व है।

करता है धर्म के आधार पर नागरिकता देने की बात:

दरअसल, नागरिकता संशोधन विधेयक, 2016 के तहत नागरिकता कानून, 1955 में संशोधन कर पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए गैर मुस्लिम धार्मिक अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है। इस कानून में इन देशों से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई जो बिना वैध यात्रा दस्तावेजों के भारत आए हैं, या जिनके वैध दस्तावेजों की समय सीमा खत्म हो गई है, उन्हें भारतीय नागरिकता प्राप्त करने लायक बनाता है। नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध में हाल ही में पूर्वोत्तर के तमाम क्षेत्रीय दलों ने गुवाहाटी में बैठक की थी।

भूपेन हज़ारिका

इसमें बीजेपी के सहयोगी दल भी शामिल हुए थे। इसके साथ ही असम स्टूडेंट यूनियन (आसू) और पूर्वोत्तर के अन्य संगठन भी लगातार बिल का विरोध कर रहे हैं। इन दलों और संगठनों का मानना है कि यह विधेयक उनकी सांस्कृतिक, भाषाई और पारंपरिक विरासत के साथ खिलवाड़ करता है। इसके साथ ही यह विधेयक धर्म के आधार पर नागरिकता देने की बात करता है, जबकि राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण यानी NRC में धर्म का कोई जिक्र नहीं।


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