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उत्तराखंड में भाजपा की तरफ़ से शुरू हो गयी ब्राह्मण नेता की तलाश

त्रिवेंद्र रावत के सलाहकार छुप जाते थे अमित शाह के दौरे से

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उत्तराखण्ड में ब्राह्मण नेता की तलाश शुरू हो गयी है, माना जा रहा है कि बीजेपी अगले कुछ महीनों में नेतृत्व परिवर्तन करने जा रही है, बीजेपी सूत्र बता रहे है कि पार्टी हाई कमान के पास जो सर्वे रिपोर्ट्स आयी है उसके मुताबिक त्रिवेन्द्र सरकार की छवि का ग्राफ पब्लिक में नीचे चला गया है, सरकार असरदार साबित नहीं हो रही है। अटपटे निर्णय, बेलगाम अफसरशाही और मुख्यमंत्री का मंत्रियों विधायको और जनता के साथ संवादहीनता इसके प्रमुख कारण बताए गए है। खबर है कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व पहले से ही खफा था अब पिछले दिनों हरिद्वार में अटल जी अस्थियो को लेकर आई यात्रा के दौरान हुए ड्रामे ने मुख्यमंत्री की छवि को केंद्रीय अध्यक्ष की नज़रों में और माइनस कर दिया।

दिल्ली दरबार में हो रही हैं तीन नामों की चर्चा:

जो संदेश हरिद्वार से पूरे देश मे जाना चाहिए था वो गया नही। जानकारों की माने तो उत्तराखण्ड में लोकसभा चुनावों से पहले नेतृत्व परिवर्तन हो सकता है, और इसबार कमान ब्राह्मण नेता को सौंपी जा सकती है। अभी तक उत्तराखण्ड में नारायण दत्त तिवारी ही एक मात्र ब्राह्मण नेता रहे जिन्होंनें पूरे पांच साल राज किया। दिल्ली दरबार मे तीन नाम चर्चा में है, अनुभवी विजय बहुगुणा जिनके लिए कांग्रेस से बीजेपी में आये विधायको ने माहौल पहले से ही बनाया हुआ है। डोरा नाम प्रकाश पंत का है जिन्हें त्रिवेन्द्र रावत की ताजपोशी के वक्त भी मुख्यमंत्री पद का दावेदार माना गया था।

राज्यसभा में जानें के बाद कहलाए एक क़द्दावर नेता:

खबर यहां तक है कि आरएसएस लॉबी भी श्रींपन्त को ही अब आगे देखना चाहती है। अनुभवी मंत्री और शांत स्वभाव वाले श्री पन्त को पार्टी हाई कमान भी वाच कर रहा है। तीसरा नाम उत्तराखण्ड और देश की राजनीति में तेज़ी से उभरा है वो है अनिल बलूनी का, श्री बलूनी राज्यसभा में जाने के बाद से एक कद्दावर नेता कहलाये जाने लगे है। सबसे बड़ी बात उनका पीएम मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह का विश्वासपात्र होना है। अनिल बलूनी के राजनीतिक उदय से उत्तराखंड के सभी नेता सकते में है। देहरादून काठगोदाम ट्रेन चलवाने में उनके प्रयासों से सांसद भगत सिंह कोशियारी तक राजनीतिक पटकी खा गए। श्री बलूनी को जिस तरह से राजनीतिक समीक्षक देख रहे है, वो उन्हें भविष्य का नेता बता रहे है।

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भाजपा ने बना लिया है उत्तराखंड में परिवर्तन का मन:

राजनीतिक समीक्षक ये कहते है कि त्रिवेन्द्र रावत को राज्यसभा में बलूनी की जगह भेजा जा सकता है और त्रिवेन्द्र रावत को पार्टी संगठन के कामों में लगाएगी। पिछले लोकसभा चुनावों में त्रिवेन्द्र रावत ने पश्चिम उत्तरप्रदेश में अमित शाह के साथ सह प्रभारी के रूप में शानदार काम किया था। श्री रावत वैसे भी संगठन के कामो में माहिर माने जाते है। झारखंड के भी वो प्रभारी रहे। वहां भी राज्य सरकार बीजेपी की बनी थी। बरहाल ये तय है कि उत्तराखंड में बीजेपी हाई कमान ने नेतृत्व परिवर्तन का मन बना लिया है। देखना अब ये है कि ये काम लोक सभा चुनाव से पहले पूरा होता है या बाद में?

त्रिवेंद्र रावत के सलाहकार छुप जाते थे अमित शाह के दौरे से:

त्रिवेन्द्र सरकार किरकिरी कराने में उनके सलाहकार भी कम पीछे नही है। पिछले दिनों हरिद्वार में अटल कलश यात्रा के दौरान पूरे देश का मीडिया तंत्र वहां जमा था। अगर वहां कोई नही था तो वो थे त्रिवेन्द्र रावत के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट। जिसपर पार्टी के मीडिया विभाग नाराजगी जताई। ये भी गौर करने की बात है कि जब जब अमित शाह का देहरादून दौरा हुआ, त्रिवेन्द्र रावत के ये सलाहकार कहीं छुप जाते रहे है। जिसका इस बार नोटिस लिया गया है। देहरादून का मीडिया वैसे ही इनसे खफा रहता है, क्योंकि मीडिया का मानना है। मुख्यमंत्री और उनके बीच खाई पैदा करने वाले ये सलाहकार ही है। महिला टीचर पन्त प्रकरण में भी इन्ही की कार गुजारियो ने सीएम की छवि की फजीहत करवाई। आगे इन्वेस्टर मीट होने जा रही है जिसको लेकर सरकार भी खासी चिंता में है।

द अड्डा के लिए उत्तराखंड से दिनेश मनसेरा की रिपोर्ट


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