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इमरजेंसी : भारतीय राजनीति के इतिहास का काला अध्याय , छिन गए थे जनता के सारे अधिकार

जब 25 जून 1975 की आधी रात लागू हुई थी इमरजेंसी !

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इंदिरा गांधी

इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 की आधी रात को देश में इमरजेंसी की घोषणा की थी. आपातकाल के फैसले को भारतीय राजनीति के इतिहास में ‘ब्लैक डे’ मनाया जाता है. ये करीब 2 साल तक रहा. 1975 में 25-26 जून की रात जब आपातकाल लागू किया गया तो पूरे देश में इंदिरा गांधी के खिलाफ राजनीतिक विरोध हुआ. 

दरअसल संजय गांधी के राजनीति में आने के बाद नसबंदी का प्रोग्राम का गलत इस्तमाल होने लगा. इस बात की भानक जब इंदिरा को लगी तो उन्होंने अचानक इमरजेंसी हटाने का फैसला किया. उस समय  खबर तो ये भी थी कि संजय गांधी 35 साल तक इमरजेंसी रखना चाहते थे लेकिन इंदिरा ने चुनाव करवा दिए.  अचानक इलेक्शन करवाने की वजह से कांग्रेस को चुनाव में हारना पड़ा . यही नहीं इंदिरा गाँधी अपने गढ़ रायबरेली से भी चुनाव हार गईं थीं. 

अगले कुछ सालों के भीतर ही इंदिरा गांधी की सत्‍ता हाथों से चली गई. 

इंदिरा गांधी1971 के आम चुनाव में ‘गरीबी हटाओ’ के नारे के साथ कांग्रेस भरी बहुमत ( 518 में से 352 सीटें) के साथ इलेक्शन जीती थी. इंदिरा गांधी ने उसी साल के अंत में पाकिस्‍तान को युद्ध में हराया और बांग्‍लादेश दुनिया को नक्‍शे पर लाया, तो कभी ‘गूंगी गुडि़या’ कही जाने वाली इंदिरा को ‘मां दुर्गा’ कहा जाने लगा. उनको ‘आयरन लेडी’ भी कहा गया. उसी साल उनको भारत रत्‍न से भी नवाजा गया. लेकिन अगले कुछ सालों के भीतर ही इंदिरा गांधी की सत्‍ता हाथों से चली गई. 

इमरजेंसी के बाद इलेक्शन में जनता पार्टी भारी बहुमत से सत्ता में आई और मोरारजी देसाई देश के प्रधानमंत्री बने. कांग्रेस के लोकसभा सदस्यों की संख्या 350 से घट कर सिर्फ 153 पर सिमट गई. 

 कई अखबारों ने मुखर होकर आपातकाल का विरोध किया था.

इमरजेंसी के दौरान सारी पावर इंदिरा गांधी के पास थी, ना उनके खिलाफ कोई बोल सकता था और ना ही लिख सकता था. इंदिरा गांधीसरकार कोई भी कानून पास करा सकती थी. इमरजेंसी के दौराव प्रेस की फ्रीडम पर भी हमला हुआ था और राजधानी दिल्ली के बहादुर शाह जफर मार्ग स्थित अखबारों के ऑफिसेज की बिजली काट दी गई थी. उस दौरान कई अखबारों ने मुखर होकर आपातकाल का विरोध किया था. अगर इसी तरह इमरजेंसी 35 साल तक लगे रहते तो आप सोचा सकते है कि आज देश का क्या हालत होती. 
आपको बता दें कि 25 जून 1975 की आधी रात को आपातकाल की घोषणा की गई, जो 21 मार्च 1977 तक जारी रहा. इमरजेंसी के आज 43 साल पूरे हो गया. इसलिए आज और कल पूरे देश में बीजेपी ‘काला दिवस’ मनाएगी. 

 


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