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जानिए कौन थे लैला -मजनूँ और कैसे इनकी प्रेम कहानी हो गयी अमर?

laila majnu
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शुक्रवार को निर्देशक इम्तियाज़ अली के भाई साजिद अली के निर्देशन में बनी फ़िल्म लैला-मजनूँ रिलीज़ हो गयी है। लेकिन लैला-मजनूँ की असली कहानी के बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं। आपको बता दें दोनो की क़ब्र श्रीगंगानगर में आज भी स्थित है। हर साल 15 जून को लैला-मजनूँ की याद में अनूपगढ़ (श्रीगंगानगर, राजस्थान) के बिंजौर में सालाना मेले का आयोजन किया जाता है। इस दिन देश के कोने-कोने से प्रेमी जोड़े यहाँ आकर चादर चढ़ाते हैं और मन्नत माँगते हैं।

 

दोनों को साथ में कर दिया गया दफ़्न:

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आख़िर इस मेले की शुरुआत भारत-पाकिस्तान सीमा पर बसे गाँव बिंजौर गाँव से कैसे हुई? लैला मजनूँ का इस गाँव से क्या रिश्ता है? दोनो की मज़ार यहाँ कैसे बनी और दोनो यहाँ पाकिस्तान से आए कैसे? यह एक बड़ा सवाल है। ज़्यादातर लोगों का मानना है कि उस समय पाकिस्तान में जन्में लैला-मजनूँ अंतिम समय में अनूपगढ़ के बिंजौर गाँव में ही आए थे। दरअसल लैला के भाई दोनो को मारने के लिए खोज रहे थे। दोनो सबसे छुपते-छुपाते यहाँ पहुँचे थे और पानी की तलाश में भटकते हुए यहीं पर दोनो की प्यास से मौत हो गयी। इसके बाद दोनो को यहीं पर एक साथ दफ़ना दिया गया।

 

जन्म के समय ही हुई थी भविष्यवाणी की दर-दर भटकेगा मजनूँ:

दोनों की क़ब्रों का राज यहाँ आज़ादी के बाद खुला। इसके बाद 1960 से यहाँ मेला लगने लगा। आज हम आपको लैला-मजनूँ की पूरी कहानी के बारे में बताने जा रहे हैं। यक़ीनन आप लैला मजनूँ की कहानी जानकर हैरान हो जाएँगे। जानकारी के अनुसार लैला-मजनूँ का जन्म 11वीं शताब्दी में हुआ था। उस समय भारत-पाकिस्तान एक ही था। पाक स्थित सिंध प्रांत में मजनूँ का जन्म एक मुस्लिम परिवार में हुआ था। मजनूँ का नाम कायस इब्न अल-मुलाव्वाह था। ऐसा कहा जाता है कि जब मजनूँ का जन्म हुआ था तभी भविष्यवाणी कर दी गयी थी कि इसे प्रेम रोग होगा और यह दर-दर भटका करेगा।

 

लैला की शादी परिवार वालों ने करवा दी किसी और से:

मदरसे में पढ़ाई के दौरान ही मजनूँ को लैला नाम की एक लड़की से इश्क़ हो गया। धीरे-धीरे लैला भी उसे चाहने लगी। मुलाव्वाह का कविताओं में काफ़ी मन लगता था। मजनूँ जो भी कविता लिखता था, उसमें लैला का ज़िक्र ज़रूर होता था। मजनूँ ने लैला के परिवार वालों से उसका हाथ माँगा, लेकिन लैला के परिवार वालों ने इनकार कर दिया। लैला की शादी उसके परिवार वालों ने एक अमीर व्यापारी से करवा दी। लैला इस शादी से बिलकुल ख़ुश नहीं थी और उसने अपने पति को मजनूँ के बारे में सबकुछ बता दिया। यह सुनकर उसका पति नाराज़ हो गया और उसे तलाक़ दे दिया।

 

पानी की तलाश में भटकते हुए प्यास से मर गए लैला मजनूँ:

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पिता के घर आने के बाद जब मजनूँ ने लैला को देखा तो दोनो वहाँ से भाग गए। जब लैला के भाइयों को पता चला कि वह मजनूँ के साथ भाग गयी है तो वो ग़ुस्सा हो गए और दोनो को ढूँढने लगे। वहीं परिवार से बचते हुए लैला-मजनूँ दर-दर भटकने लगे। बताया जाता है कि दोनो भागते-भागते श्रीगंगानगर की अनूपगढ़ तहसील के गाँव बिंजौर पहुँच गए। यही रेगिस्तानी क्षेत्र में पानी ना मिलने की वजह से प्यास से तड़प-तड़पकर दोनों की मृत्यु हो गयी। इसके बाद लोगों ने दोनों को वहीं पर दफ़ना दिया।

 

मजनूँ की पहली कविता जो उसने लैला के लिए लिखी थी:

“मैं इन दीवारों से गुजरता जाऊंगा, जिनसे लैला गुजरती है और मैं उस दीवार को चूमा करूंगा, जिनसे लैला गुजरती है
यह मेरे दिल में दीवारों के प्रति प्यार नहीं है, जो मेरे दिल को खुश करता है लेकिन जो उन दीवारों के पास से चलकर मेरा ध्यान आकर्षित करती है, उससे मुझे प्यार है।”

 

हिंदू मुस्लिम दोनों करते हैं मज़ार में पूजा:

लैला-मजनूँ की मज़ार में हिंदू और मुस्लिम दोनों की आस्था है। दोनों ही समुदायों के लोग इस मज़ार में आकर सिर झुकाते हैं। यहाँ आने वाले लोग मन्नत का धागा भी बाँधते हैं। दोनों समुदायों के लोग इस जगह को अलग-अलग नामों से भी पुकारते हैं। जहाँ मुस्लिम समुदाय के लोग इसे लैला-मजनूँ की मज़ार के नाम से जानते हैं, वहीं हिंदू समुदाय के लोग इसे लैला-मजनूँ की समाधि के नाम से पूजते हैं। पाँच दिनों तक चलने वाले इस मेले में राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तर-प्रदेश और बिहार सहित कई राज्यों के लोग आते हैं। यहाँ आकर प्रेमी जोड़े अपने प्रेम की सफलता के लिए मन्नत भी माँगते हैं।

 

पाकिस्तान से भी आते थे प्रेमी:

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आपको जानकर हैरानी होगी कि पूरे देश में संभवतः यहाँ पहली सीमा चौकी होगी जो प्यार करने वालों के नाम पर बनी हुई है। सीमा पर बसे इस गाँव में बीएसएफ़ की सीमा चौकी का नाम पहले लैला-मजनूँ था, जिसका बाद में नाम बदलकर मजनूँ कर दिया गया। पहले इस जगह पर पाकिस्तान से बड़ी संख्या में प्रेमी आया करते थे। लेकिन भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते मतभेद को देखते हुए यहाँ तारबंदी कर दी गयी। इसके बाद से पाकिस्तान से प्रेमियों का आना बंद हो गया। यक़ीनन आप भी लैला-मजनूँ की इस अमर प्रेम कहानी के बारे में जानकर हैरान हुए होंगे।

 

 


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