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हिमालय की घाटी में खिला ब्रह्मकमल, देखने के लिए दूर-दूर से पहुँच रहे लोग

उत्तराखंड में बनाया जाएगा ब्रह्मकमल का बीज बैंक

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इस दुनिया में कई ऐसी अद्भुत चीज़ें हैं, जिनके बारे में सुनकर आपको यक़ीन नहीं होगा। ऐसी चीज़ों को देखकर लोगों की आँखें फटी की फटी रह जाती हैं। इन्ही में से एक है ब्रह्मकमल। जी हाँ हिमालय की वादियों में खिलने वाला ऐसा अद्भुत फूल जो साल में केवल एक बार खिलता है। आपको बता दें यह फूल तीन हज़ार मीटर की ऊँचाई पर सिर्फ़ रात के समय खिलता है। जैसे ही सुबह होती है, यह फूल बंद हो जाता है। इसे देखने के लिए इस समय दुनियाभर के लोग पहुँच रहे हैं। बता दें हाल ही में ब्रह्मकमल की एक तस्वीर भारत-तिब्बत सीमा पुलिस ने जारी की है।

 

उत्तराखंड का राज्य पुष्प है ब्रह्मकमल:

Brahma Kamal

बता दें इस फूल को उत्तराखंड का राज्य पुष्प भी कहा जाता है। ब्रह्मकमल को अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग नामों से जाना जाता है। इसे उत्तराखंड में ब्रह्मकमल, हिमाचल में दूधाफूल, कश्मीर में गलगल और उत्तर-पश्चिमी भारत में बरगनडटोगेस कहा जाता है। आज हम आपको इस फूल की ख़ासियत के बारे में बताने जा रहे हैं। यक़ीनन इस फूल की ख़ासियत के बारे में बहुत कम लोग ही जानते होंगे। इसके बारे में जानकर आपको ज़रूर हैरानी होने वाली है।

 

ब्रह्मकमल के बारे में 5 बातें जो कम लोग ही जानते हैं:

बहुत ठंडी जगह पर पाया जाता है ब्रह्मकमल:

आपको बता दें ब्रह्मकमल हिमालय के उत्तरी और दक्षिणी-पश्चिमी चीन में भी पाया जाता है। यह अद्भुत फूल हिमालय के बहुत ही ठंडे इलाक़ों में पाया जाता है। बदरीनाथ, केदारनाथ के साथ ही फूलों की घाटी, हेमकुंड साहिब, वासुकीताल, वेदनी, बुग्याल, मद्दहेश्वर, रूप कुंड और तुंगनाथ में भी यह फूल पाया जाता है। हिंदू धार्मिक मान्यता के अनुसार ब्रह्मकमल भगवान शिव का प्रिय फूल माना जाता है। इस फूल का नाम ऋष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी के नाम पर पड़ा है।

चीन भी भी खिलता है ब्रह्मकमल:

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ब्रह्मकमल को सुंदर, सुगंधित और दिव्य फूल कहा जाता है। वनस्पति शास्त्र में ब्रह्मकमल की 31 प्रजातियों के बारे में बताया गया है। आपको बता दें चीन में भी ब्रह्मकमल खिलता है, जिसे तानहुआयिझियान के नाम से जाना जाता है। इसका अर्थ होता है प्रभावशाली लेकिन कम समय तक ख्याति रखने वाला। ब्रह्मकमल का वनस्पतिक नाम साउसुरिया ओबुवालाटा है। यह फूल केवल जुलाई से सितम्बर के बीच ही मध्य रात्रि में खिलता है और सुबह होते ही बंद हो जाता है। ब्रह्मकमल को सुखाकर कैंसर रोग की दवा में भी इस्तेमाल किया जाता है।

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केदारनाथ धाम के ब्रह्म वाटिका में भी ब्रह्मकमल:

आपको बता दें केदारनाथ धाम में पुलिस ने ब्रह्म वाटिका बनाई है, जहाँ यह फूल खिले हुए हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि शायद यह इंसानों द्वारा बनाई गयी पहली वाटिका है जहाँ ब्रह्मकमल खिला हुआ है। यह सूरजमुखी के परिवार का एस्टिरेसी का पौधा है। केदारनाथ पुलिस के अनुसार इस अद्भुत वाटिका को बनाने में लगभग तीन साल का समय लगा था।

 

औषधीय गुणों की वजह से रखा गया है संरक्षित प्रजाति में:

ब्रह्मकमल की सुंदरता और इसके औषधीय गुणों की वजह से इसे संरक्षित प्रजाति में रखा गया है। आपको जानकर हैरानी होगी कि ब्रह्मकमल से कैंसर जैसी घातक बीमारी का भी इलाज सम्भव है। ऐसा भी माना जाता है कि घर में ब्रह्मकमल रखने से कई दोष भी दूर हो जाते हैं।

 

उत्तराखंड में बनाया जाएगा ब्रह्मकमल का बीज बैंक:

Brahma Kamal

 

वन अनुसंधान केंद्र ने राज्य पुष्प ब्रह्मकमल का बीज बैंक बना लिया है। आपको बता दें दुर्लभ फूलों को बचाने के लिए शुरू की गयी एक मुहिम के अंतर्गत यह किया गया है। इसके तहत चमोली जिले के रुद्रनाथ और मंडल वन प्रभाग में तीन-तीन हेक्टेयर में पौधशाला तैयार कर ली गयी है। वन अनुसंधान केंद्र ने विश्व की धरोहर में शामिल चमोली के फूलों की घाटी में पाए जानें वाले राज्य पुष्प ब्रह्मकमल, हत्था जड़ी, ब्लू लिली सहित आती दुर्लभ क़िस्म के दो दर्जन से ज़्यादा फूलों की प्रजातियों को संरक्षित करने का काम किया है।

 

 

 

ब्रह्मकमल के बारे में और जाने

 

 


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