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सरहद पार बढ़ रही है कट्टरपंथी इस्लामिक गतिविधियाँ, बीएसएफ़ की रिपोर्ट से ख़ुलासा

BSF ने लिया एक अफ़ग़ान नागरिक को हिरासत में

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राजस्थान की भारत-पाकिस्तान सीमा पर कत्थरपंथी इस्लामिक गतिविधियों में पिछले कुछ साल में काफ़ी तेज़ी आयी है। ऐसा हम नहीं कह रहे हैं बल्कि बीएसएफ़ की एक रिपोर्ट में इस बात का ख़ुलासा हुआ है। बीएसएफ़ की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि जैसलमेर से सटे सरहदी इलाक़ों में हाल के कुछ वर्षों में ऐसी गतिविधियाँ बढ़ी हैं, जो सुरक्षाबलों के लिए ख़तरे की वजह बन सकती हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार, 2000 से पहले जैसलमेर बॉर्डर के उस पार कट्टरपंथी इस्लामिक गतिविधियाँ ना के बराबर थीं, लेकिन अब उसमें भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है।

अंदरूनी इलाक़ों से भी आ रहे हैं मस्जिद:

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जैसलमेर के दक्षिणी हिस्से में साल 2000 से पहले मस्जिद नहीं थे, जबकि आज के समय में सरकारी ज़मीन पर कई मस्जिद बन चुके हैं। कई पुराने मस्जिद भी देखे जा सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में मांडला मस्जिद की गतिविधियों में तेज़ी देखी जा रही है। बता दें मांडला मस्जिद दक्षिणी जैसलमेर से 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मांडला मस्जिद में दूर-दूर से लोग आते हैं। पिर पगारा के अनुयायी ना सिर्फ़ जैसलमेर से बल्कि गुजरात के अंदरूनी इलाक़ों से भी इस मस्जिद में आ रहे हैं।

तेज़ी से बढ़ रही है मुस्लिम समुदाय की आबादी:

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तथ्यों पर आधारित इस रिपोर्ट में बताया गया है कि सामान्य दर से बहुत ज़्यादा तेज़ी से इस इलाक़े में मुस्लिम समुदाय की आबादी बढ़ रही है। ख़ासतौर से साम पोकरन और नचना इलाके में आबादी का ग्राफ बड़ी तेजी से बढ़ा है। जैसलमेर के दक्षिणी सरहदी इलाकों में भी अच्छी खासी बढ़ोतरी देखी जा रही है। जैसलमेर सीमा पर विदेशी हरकतें किस प्रकार चालू हैं, इसका अंदाजा पिछले साल की दो अहम घटनाओं से लगाया जा सकता है। साल 2017 की फरवरी में राजस्थान पुलिस ने जैसलमेर जिले से हाजी खान नाम के जासूस को पकड़ा था। खान पर संवेदनशील सूचनाएं चुराने और पाकिस्तान को सप्लाई करने का आरोप लगा था।

BSF ने लिया एक अफ़ग़ान नागरिक को हिरासत में:

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बता दें खान स्वयं जैसलमेर में रहता है, लेकिन उसके रिश्तेदार पाकिस्तान के हैं। फरवरी में ही इस घटना से एक हफ्ते पहले सादिक नाम के एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया था, जिस पर पाकिस्तान को सूचनाएं भेजने का आरोप लगा था। 2017 के दिसंबर में एक और ऐसी घटना घटी, जिसमें बीएसएफ ने एक अफगान नागरिक को हिरासत में लिया और कई राज उगलवाए। काबुल निवासी मोहम्मद परवेज ने पूछताछ में आईबी को बताया था कि वह टूरिस्ट वीजा पर भारत आया था और जैसलमेर के इलाकों में दवाएं बेच रहा था। परवेज ने आईबी को यह भी बताया था कि उसके साथ दो और अफगान भारत आए हैं, जिनमें एक को हिरासत में लिया गया है।

आतंकी कामयाब ना हो पाए अपने मंसूबे में:

सरहदी इलाकों में ऐसी गतिविधियां देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती हैं, क्योंकि अंधेरे का फायदा उठाकर दहशतगर्द भारत की सीमा में गड़बड़ी पैदा कर सकते हैं। जम्मू-कश्मीर के सीमाई इलाकों में भी यही हालत है। भारतीय सीमा के उस पार हालत यह हो गई है कि चरमपंथी गुट हमेशा गड़बड़ करने की फिराक में रहते हैं। आतंकियों के लॉन्चिंग पैड इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। आतंकी अपने मंसूबों में कामयाब न हों, इसके लिए भारत ने सर्जिकल हमले भी किए। कई आतंकी मारे भी गए लेकिन पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद भारत में अभी भी गड़बड़ी फैला रहा है।


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