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जानिए पेट्रोल और डीज़ल के दाम बढ़ने में केंद्र सरकार की क्या भूमिका है

लगातार बढ़ा रही है सरकार की एक्साइज ड्यूटी

diesel petrol price hike
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यह बात किसी को बताने की ज़रूरत नहीं है कि आज के समय में भारत में सबसे महँगा पेट्रोल और डीज़ल मिल रहा है। लगातार बढ़ती क़ीमतों की वजह से आम आदमी काफ़ी परेशान हो गया है। बढ़ रहे पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतों की वजह से देश का किसान बहुत परेशान हैं। पहले से ही भारत के किसानों की स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी, ऐस में बढ़ते पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतों ने उनकी कमर और तोड़कर रख दी है। पेट्रोल-डीज़ल के बढ़ते दामों के पीछे मोदी सरकार का कहना है कि इसके लिए वो नहीं बल्कि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रही कच्चे तेल की क़ीमतें हैं।

 

लगातार बढ़ा रही है सरकार की एक्साइज ड्यूटी:

diesel petrol price hike

पेट्रोल और डीज़ल की बढ़ती क़ीमतों के पीछे भले ही अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की क़ीमतों में आ रही तेज़ी बतायी जा रही है। लेकिन असली वजह यह नहीं है जो सरकार बता रही है। इसके लिए केंद्र सरकार की तरफ़ से लगाया जानें वाला टैक्स भी है। केंद्र सरकार के टैक्स की वजह से ही आज भारत में पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतें लगातार आसमान छूती जा रही हैं। केंद्र सरकार ने नवम्बर 2014 से जुलाई 2017 के बीच पेट्रोल पर 233 फ़ीसदी एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई है। वहीं डीज़ल पर एक्साइज ड्यूटी पेट्रोल के मुक़ाबले दुगुनी रफ़्तार से बढ़ी है।

 

वैट में भी हुई है काफ़ी हद तक बढ़ोत्तरी:

आपको बता दें इस समय मोदी सरकार ने डीज़ल पर 443 फ़ीसदी एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई है। एक्साइज ड्यूटी और वैट में भी काफ़ी हद तक बढ़ोत्तरी हुई है। टैक्स में इतनी ज़्यादा बढ़ोत्तरी करने की वजह से आज पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतें आसमान पर पहुँच गयी हैं। अगर आँकड़ों पर ध्यान दिया जाए तो नवम्बर 2014 से जुलाई 2017 के बीच पेट्रोल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी 9.20 प्रति लीटर से बढ़कर 21.48 रुपए प्रति लीटर हो गयी। वहीं अगर डीज़ल की बात की जाए तो इसे 3.46 रुपए प्रति लीटर से बढ़ाकर 15.33 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है।

 

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केंद्र सरकार लगातार भर रही है अपने ख़ज़ाने:

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पिछले साल मोदी सरकार ने जनता को राहत देते हुए पेट्रोल और डीज़ल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी में अक्टूबर महीने में 2 रुपए की कटौती की थी। केंद्र सरकार की तरफ़ से लोकसभा में दिए गए डिक्लेरेशन के अनुसार ईंधन से केंद्र सरकार की कमाई 2013-14 में जहाँ 88600 करोड़ रुपए थी, वही 2018-19 में यह बढ़कर 257850 करोड़ रुपए हो गयी है। पेट्रोलियम मिनिस्ट्री के अनुसार केंद्र और राज्य सरकार के बीच टैक्स कलेक्शन 2014-15 में 3.32 लाख करोड़ रुपए था जो 2017-18 में यह बढ़कर 5.53 लाख करोड़ रुपए हो गया। इस तरह से देखा जाए तो सिर्फ़ कच्चे तेल की क़ीमतें ही नहीं बल्कि सरकार की तरफ़ से वसूला जानें वाला टैक्स भी बढ़ती तेल की क़ीमतों के लिए ज़िम्मेदार है।

 

कांग्रेस ने किया था भारत बंद का आह्वान:

लगातार तेल की बढ़ती क़ीमतों की वजह से सोमवार को भारत की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने भारत बंद का आह्वान किया था। कांग्रेस के इस भारत बंद का देश की कई पार्टियों ने समर्थन किया था। भारत बंद के दौरान भाजपा पर अन्य विपक्षी दलों ने जमकर हमला किया। वहीं भाजपा अपना बचाव करने में लगी रही। कई जगहों पर भारत बंद के दौरान हिंसक प्रदर्शन भी हुए। वहीं जहानाबाद में हुई एक बच्ची की मौत का ज़िम्मा भाजपा ने कांग्रेस के सिर पर मढ़ने का भी प्रयास किया। भाजपा का कहना था कि बच्ची की मौत कांग्रेस के भारत बंद की वजह से ही हुई है। जबकि सच्चाई कुछ और ही थी। बच्ची की मौत कांग्रेस के भारत बंद की वजह से नहीं बल्कि बच्ची के माता-पिता की ग़लती से हुई थी।

 

 


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