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जानें छठ में क्यों दिया जाता है डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य

सूर्य की पत्नी प्रत्यूषा को दिया जाता है अर्घ्य

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हिंदू धर्म में कई व्रत-त्योहार मनाने की सदियों पुरानी परम्परा है। हर राज्य की अपनी-अपनी कुछ अलग परम्पराएँ और संस्कृतियाँ हैं और उन्ही के आधार पर त्योहार भी मनाए जाते हैं। उन्ही में से छठ पर्व भी है, जो बिहार के सबसे बड़े पर्व के रूप में जाना जाता है। छठ का पहला अर्घ्य षष्ठी तिथि को दिया जाता है। यह अर्घ्य अस्ताचलगामी सूर्य यानी डूबते सूर्य को दिया जाता है। इस समय जल में दूध डालकर सूर्य की अंतिम किरण को अर्घ्य देने की परम्परा है।

सूर्य की पत्नी प्रत्यूषा को दिया जाता है अर्घ्य:

ऐसा माना जाता है कि सूर्य की एक पत्नी का नाम प्रत्यूषा है और ये अर्घ्य उन्ही को दिया जाता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें संध्या के समय अर्घ्य देने से कई तरह के लाभ होते हैं। संध्या के समय जल देने से आँखों की रौशनी बढ़ती है, लम्बी आयु का वरदान मिलता है और साथ ही साथ आर्थिक सम्पन्नता भी आती है। संध्या के समय का अर्घ्य विद्यार्थी भी दे सकते हैं। इससे उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में काफ़ी लाभ होता है। इस बार छठ का पहला अर्घ्य 13 नवम्बर को दिया जाएगा।

 छठ

अस्ताचल सूर्य को जल देने के धार्मिक नियम:

    • अर्घ्य देने के लिए जल में थोड़ा सा दूध मिलाएँ। बहुत ज़्यादा दूध डालकर उसे व्यर्थ ना करें।
    • एक साफ़ टोकरी में फल और ठेकुवा आदि सजाकर सूर्य देव की उपासना करें।
    • उपासना और सूर्यदेव को अर्घ्य देने के बाद आपकी जो भी मनोकामना है उसे पूरी करने के लिए प्रार्थना करें।
    • इस बात का ख़ास ध्यान दें कि जब आप सूर्य को अर्घ्य दे रही हों तो उसका रंग लाल हो।
  • अगर इस समय आप किसी वजह से अर्घ्य ना दे सकीं तो केवल प्रार्थना करने से भी आपको लाभ मिल सकता है।

क्यों दिया जाता है अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य:

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    • सूर्य की बारे में कहा जाता है कि यह मुख्यरूप से तीन समय मी सबसे ज़्यादा प्रभावशाली होता है। प्रातःकाल, मध्याह्न और सायंकाल।
    • सुबह यानी प्रातःकाल के सूर्य आराधना से स्वास्थ्य बेहतर होता है।
    • मध्याह्न के समय सूर्य की आराधना करने से नाम-यश की प्राप्ति होती है।
    • सायंकाल के सूर्य की आराधना करने से सम्पन्नता आती है।
  • जो लोग अस्ताचलगामी सूर्य की उपासना करते हैं, उन्हें प्रातःकाल सूर्य की भी भी उपासना करनी चाहिए।

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ये लोग ज़रूर दें अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य:

    • जो लोग बिना किसी वजह के मुक़दमे में फँस गए हों।
    • जिन लोगों का काम किसी सरकारी विभाग में अटका हुआ हो।
    • जिन लोगों के आँखों की रौशनी कम हो रही हो।
    • जो लोग हर समय पेट की समस्या से परेशान रहते हैं, उन्हें भी अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए।
  • बार-बार असफलता का मुँह देखने वाले विद्यार्थी।

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