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पेट्रोल-डिज़ल की बढ़ती क़ीमतों पर सफ़ाई देने के चक्कर में ट्रोल हुई भाजपा

कांग्रेस ने दिखा दिया भाजपा को आईना

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यह बात हर कोई जानता है कि इस समय देश में लगातार पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतें बाढ़ रही हैं। पहले जो नरेंद्र मोदी बढ़ते हुए पेट्रोल डीज़ल के लिए कांग्रेस पर निशाना साधते थे, वही नरेंद्र मोदी अब चुप हैं। पेट्रोल-डीज़ल के दाम अब तक के इतिहास में सबसे ज़्यादा हैं। पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतों को लेकर कांग्रेस और भाजपा की जंग धीरे-धीरे बाढ़ रही है। सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक दोनो की जंग देखी जा सकती है। आपको बता दें सोमवार को कांग्रेस ने भारत बंद बुलाया था, जिसके बाद भाजपा के अधिकारिक ट्वीटर हैंडल से एक इंफ़ोग्राफ़िक्स चार्ट के माध्यम से पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतों में वृद्धि का आँकड़ा दिया गया।

 

भाजपा ने बढ़ोतरी का सच बताते हुए किया ट्वीट:

इसके बाद कांग्रेस ने जमकर भाजपा पर हमला करना शुरू कर दिया। इसके जवाब में कांग्रेस ने भाजपा के ही आँकड़ों में कच्चे तेल की क़ीमत जोड़ते हुए दिया। ग़ौरतलब है कि भाजपा के अधिकारिक ट्वीटर हैंडल से पेट्रोल-डीज़ल के दामों की बढ़ोतरी का सच बताते हुए दो ट्वीट किए गए। जिसमें भाजपा ने यह बताने की कोशिश की कि किस तरह से यूपीए सरकार के दौरान पेट्रोल-डीज़ल की वृद्धि दर मोदी सरकार की तुलना में बहुत ज़्यादा रही है।

 

यूपीए सरकार में पेट्रोल की क़ीमतों में हुई 75.8 फ़ीसदी की वृद्धि:

भाजपा ने अपने ट्वीट में यह दिखाया कि किस तरह से 16 मई 2009 से लेकर 16 मई 2014 तक यूपीए सरकार के 5 साल के कार्यकाल के दौरान पेट्रोल की क़ीमतों में 75.8 फ़ीसदी की वृद्धि हुई थी। पेट्रोल तब 40.62 रुपए प्रति लीटर मिलता था जो बढ़कर 71.41 रुपए प्रति लीटर हो गया। लेकिन जब से भाजपा सत्ता में आयी है तब से 16 मई 2014 से लेकर 10 सितम्बर 2018 तक पेट्रोल के दामों में केवल 13 फ़ीसदी ही बढ़ोत्तरी हुई है। 2014 में पेट्रोल 71.41 रुपए प्रति लीटर मिलता था जो अब बढ़कर 80.73 रुपए तक पहुँच गया है।

 

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डीज़ल के दाम में भी हुई काफ़ी बढ़ोतरी:

ठीक इसी तरह भाजपा ने डीज़ल के दामों को भी इंफ़ोग्राफ़िक्स के माध्यम से बताने का प्रयास किया। भाजपा के अनुसार डीज़ल के दाम में भी 2009 से लेकर 2014 तक यूपीए सरकार के दौरान 83.7 फ़ीसदी वृद्धि हुई है। पहले डीज़ल की क़ीमत 30.86 रुपए प्रति लीटर हुआ करती थी, जो बढ़कर 56.71 रुपए प्रति लीटर हो गयी। लेकिन जब से भाजपा सत्ता में आयी है यानी 16 मई 2014 से तब से लेकर 10 सितम्बर 2018 के बीच डीज़ल के दामों में बढ़ोत्तरी केवल 28 फ़ीसदी ही रही है। डीज़ल की क़ीमत 56.71 रुपए प्रति लीटर से बढ़कर 72.83 रुपए प्रति लीटर पर पहुँच गयी है।

 

कांग्रेस ने दिखा दिया भाजपा को आईना:

जैसे ही भाजपा ने सोशल मीडिया पर अपने आँकड़ों वाला यह चार्ट ट्वीट किया, उसके बाद कांग्रेस ने जमकर भाजपा पर हमला करना शुरू कर दिया। भाजपा अपने ही बिछाए जाल में फँस गयी। भाजपा कांग्रेस के ऊपर निशाना साधने की कोशिश में लगी हुई थी, उल्टा कांग्रेस ने भाजपा को आईना दिखा दिया। भाजपा के चार्ट ट्वीट करने के ब आड़ कांग्रेस की तरफ़ से नया इंफ़ोग्राफ़िक्स चार्ट ट्वीट किया गया। यह चार्ट दिखने में भाजपा के चार्ट जैसा ही था, बस इसमें कच्चे तेल की क़ीमतों में हुई बढ़ोत्तरी का भी ब्योरा दिया गया था। कांग्रेस ने अपने ट्वीट में लिखा, इसलिए देश की अर्थव्यवस्था सम्भालने में हम बेहतर हैं।

 

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विपक्षी पार्टियों का भी मिला समर्थन:

कांग्रेस ने अपने ट्वीट में बताया कि 16 मई 2009 से लेकर 2014 के बीच जब पेट्रोल की क़ीमत 40.62 रुपए प्रति लीटर से बढ़कर 71.41 रुपए प्रति लीटर हुई, उस समय कच्चे तेल की क़ीमतों में 84 फ़ीसदी का इज़ाफ़ा हुआ था। वहीं मोदी सरकार में 16 मई 2014 से लाकर 10 सितम्बर 2018 के बीच कच्चे तेल के दाम 34 फ़ीसदी घटते हुए 107 डॉलर प्रति बैरल से 71 डॉलर प्रति बैरल हो गया। इसके बाद भी पेट्रोल के दाम में इज़ाफ़ा हुआ और पेट्रोल 71 रुपए से बढ़कर 80 रुपए के पार पहुँच गया। आपकी जानकारी के लिए बता दें कांग्रेस की तरफ़ से सोमवार को बुलाए गए भारत बंद में देश की कई विपक्षी पार्टियों ने समर्थन दिया था।

 

 


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