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कांग्रेस नेता ने की कांग्रेस अध्यक्ष से बग़ावत, कहा- मैं राहुल गांधी का ग़ुलाम नहीं

दिया जाएगा हारे हुए प्रत्याशियों को फिर से मौक़ा

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पाँच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नज़दीक आ रहे हैं, सभी राज्यों में चुनावी हलचल बढ़ती जा रही है। कांग्रेस और भाजपा दोनों अपने-अपने स्तर पर चुनाव प्रचार में लगी हुई हैं। इसी बीच छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में रविवार को कांग्रेस भवन में पार्टी के नेताओं और अनुषांगिक संगठनों के पदाधिकारियों की बैठक बुलाई गयी थी। चुनाव में जीत हासिल करने के लिए कांग्रेसी मंत्र बताया जाता, इससे पहले ही नेता आपस में भीड़ गए। आपको जानकर हैरानी होगी कि महिला नेत्रियों के बीच वरिष्ठ कांग्रेसी नेता गाली-गलौच भी कर रहे थे।

नहीं मानी गयी बूथ स्तरीय कार्यकर्ताओं की बात:

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बैठक में जब पीसीसी महामंत्री अटल श्रीवास्तव के बोलने की बारी आयी तो उन्होंने सीधे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल अर निशाना साध दिया। उन्होंने कहा कि हम राहुल गांधी और भूपेश बघेल के ग़ुलाम नहीं है। उन्होंने कहा कि, मुझे इस बात को लेकर ग़ुस्सा आता है कि बूथ स्तरीय कार्यकर्ताओं की बात नहीं मानी गयी। जिन लोगों ने आवेदन नहीं किया, उन्हें पार्टी ने टिकट दे दिया। पहले राहुल गांधी ने कहा पैराशूट नहीं चलेगा, बिलासपुर में क्या हुआ। पैराशूट को ही टिकट दे दिया गया है।

अग्रवाल से की फ़ोन ना उठाने की शिकायत:

बता दें लाठीचार्ज की घटना के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट करके कांग्रेस भवन को पार्टी का पवित्र स्थान बताया था। यही पर कांग्रेस के बड़े नेताओं ने मर्यादा की सारी सीमाएँ लाँघ दी। कांग्रेस भवन में चुनावी रणनीति बनाने के लिए आयोजित की गयी बैठक में सभी दिग्गज कांग्रेसी नेता तय समय दोपहर 12 बजे तक पहुँच चुके थे। सभी लोग कांग्रेस प्रत्याशी शैलेष पांडे के आने का इंतज़ार कर रहे थे। उस समय पांडे जनसम्पर्क में व्यस्त थे। जब वो कांग्रेस भवन पहुँचे तो बातचीत के दौरान उन्होंने अशोक अग्रवाल से फ़ोन ना उठाने की शिकायत की।

देखता हूँ कैसे जीतता है चुनाव:

कांग्रेस

इसी से शुरू हुई बातचीत कब विवाद में बदल गयी, पता ही नहीं चला। अग्रवाल इस बात से ग़ुस्से में आ गए और दोनों के बीच जमकर विवाद होने लगा। गाली-गलौच के बीच अग्रवाल ने पांडे को चुनौती देते हुए कहा कि देखता हूँ तू चुनाव कैसे जीतता है। बता दें मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए ने कई फ़ार्मूले तैयार किए थे, लेकिन जब फ़ैसले का समय आया तो कई सीटों पर उनकी धज्जियाँ उड़ गयी। कांग्रेस का सबसे अहम फ़ार्मूला पाँच हज़ार से कम अंतर से हारी सीटों पर उन्ही प्रत्याशियों को मौक़ा देने का था। लेकिन पहली सूची में शामिल ऐसी 18 सीटों में से छह के हारे उम्मीदवारों के टिकट काट दिए गए।

दिया जाएगा हारे हुए प्रत्याशियों को फिर से मौक़ा:

जानकारी के अनुसार ने प्रत्याशी चयन के लिए एक मानक तय किया था कि 2013 के विधानसभा चुनाव में जो प्रत्याशी पाँच हज़ार से कम वोट के अंतर से हारे हैं, उन्हें फिर से मौक़ा दिया जाएगा। इसके साथ ही राहुल गांधी ने कहा था कि टिकट वितरण में पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं का ध्यान रखा जाएगा। पैराशूट (दूसरे दलों से आए नेता) को तरजीह नहीं दी जाएगी। हालाँकि कांग्रेस ने शनिवार को 155 सीटों पर प्रत्याशियों की जो पहली सूची जारी की है, उसमें इन दोनों ही फ़ार्मूलों का ध्यान नहीं रखा गया। अब देखना यह है कि कांग्रेस अपने इस दाव में कामयाब हो पाती है या नहीं।


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