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प्रियंका गांधी के पार्टी में आते ही कांग्रेस ने बड़ते तेवर, आंध्र प्रदेश के बाद अब पश्चिम बंगाल में भी अकेले लड़ने की योजना

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काफ़ी समय से देश की सभी पार्टियाँ भाजपा के ख़िलाफ़ लोकसभा चुनाव में इकट्ठा होकर महागठबंधन का निर्माण करने पर ज़ोर दे रही थी। कांग्रेस इसमें सबसे आगे थी, लेकिन अब कांग्रेस अपनी रणनीति को नया आयाम दिया है। कांग्रेस ने अब एक सी अधिक राज्यों में अकेले चुनाव लड़ने का फ़ैसला किया है। आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल उनमें से एक हैं। ने बुधवार को आंध्र प्रदेश में इसकी घोषणा भी कर दी। अखिल भारतीय समिति के महासचिव और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी ने इस संबंध में कहा था कि आंध्र प्रदेश में सभी 175 विधानसभा सीटों और 25 लोकसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी टीडीपी के साथ हमारा गठबंधन केवल राष्ट्रीय स्तर पर है, ऐसे में हम राज्य में टीडीपी के साथ गठबंधन नहीं करेंगे।

आंध्र प्रदेश में नहीं है कांग्रेस का कोई वजूद:

कांग्रेस

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ओमन चांडी ने कहा कि वे चुनाव की तैयारियों के बारे में चर्चा करने के लिए फिर 31 जनवरी को एकत्र होंगे। उन्होंने कहा कि राज्य कांग्रेस ने फरवरी में सभी 13 जिलों में एक बस यात्रा निकालने का निर्णय किया है। इसका मतलब यह निकलता है कि और टीडीपी के बीच आंध्र प्रदेश में कोई महागठबंधन नहीं होगा। दोनों पार्टियों हाल ही तेलंगाना में हुए विधानसभा चुनाव में साथ लड़ी थीं, लेकिन चुनाव का नतीजा दोनों पार्टियों के लिए काफी भयानक साबित हुआ. शायद यह वजह है कि दोनों पार्टियां आंध्र प्रदेश में अकेले चुनाव लड़ना चाहती हैं। के लिए टीडीपी तेलंगाना में एक डेड वेट के समान साबित हुई, तो नायडू के लिए आंध्र प्रदेश में का कोई वजूद नहीं है।

कांग्रेस और टीडीपी की आपसी समझ को नहीं लिया जा सकता हल्के में:

जहां, आंध्र प्रदेश के विभाजन और तेलंगाना के जन्म की अध्यक्षता करने वाली पार्टी के खिलाफ जनता का भारी गुस्सा है। इसके अलावा, विपक्षी पार्टी वाईएसआर के जगन मोहन रेड्डी आंध्र प्रदेश में कई रोड शो कर रहे हैं और लोगों का समर्थन भी उन्हें मिल रहा है। लेकिन और टीडीपी की आपसी समझ को हल्के में नहीं लिया जा सकता। चंद्रबाबू नायडू ने इससे पहले साफ किया था कि के साथ उनकी पार्टी का गठबंधन केवल तेलंगाना विधानसभा चुनाव के लिए था और महागठबंधन राष्ट्रीय स्तर के चुनाव के लिए है। अगर रणनीतिक रूप से देखा जाए तो दोनों पार्टियों के लिए अलग-अलग चुनाव लड़ना ही बेहतर रणनीति होगी और यह जगन मोहन रेड्डी की सीटों की संख्या को कम करते हुए टीडीपी विरोधी वोटों को विभाजित करेगा।


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