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सर्जिकल स्ट्राइक वाली जगह पर फिर से आबाद है आतंकियों के कैम्प, जानें दो साल बाद की स्थिति

29 सितम्बर को किया जाएगा एक प्रदर्शनी का आयोजन

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सर्जिकल स्ट्राइक को दो साल होने वाले हैं। इसके उपलक्ष्य में केंद्र सरकार 29 सितम्बर को सर्जिकल स्ट्राइक डे मनाने जा रही है। आज से ठीक दो साल पहले पाकिस्तान के POK में भारतीय सेना ने घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक की घटना को अंजाम दिया था। आज दो साल बाद उस जगह की क्या हालत है, यह ग़ौर करने वाली बात है। आपको जानकर हैरानी होगी कि जिस जगह पर भारतीय सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक करके आतंकियों के कैम्प को नष्ट दिया था अब दो साल बाद वहाँ फिर से आतंकियों के नए कैम्प आबाद हो गए हैं। उस समय सेना ने लगभग 30 से ज़्यादा आतंकियों को मार गिराया था। लेकिन अब पहले की तरह ही वहाँ आतंकियों के कैम्प तो बने ही है आतंक की ट्रेनिंग भी जारी है।

 

अभी तक नहीं हुआ पाकिस्तान की सोच में बदलाव:

ख़ुफ़िया रिपोर्ट में यह बात सामने आयी है कि आतंकियों के इन्ही लॉंचिंग पैड से लगभग 250 आतंकी सीमा पार करके भारतीय सीमा में घुसने की तैयारी में हैं। ख़ुफ़िया रिपोर्ट में आतंकियों के कुछ नए लॉंचिंग पैड का भी ज़िक्र किया गया है, जिनमें से कुछ POK के लीपा घाटी में स्थित हैं। सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान भारत ने आतंकियों के दो ठिकानों पर धावा बोला था और उसे पूरी तरह से नष्ट कर दिया था। बढ़ते आतंकी कैम्पों को देखते हुए कहा जा सकता है कि पाकिस्तान में भले ही सत्ता का परिवर्तन हुआ हो, लेकिन पाकिस्तान की सोच में अभी तक कोई बदलाव नहीं आया है। आज भी पाकिस्तान आतंक का पनाहगाह बना हुआ है।

 

बढ़ गयी है आतंकी कैम्पों की संख्या:

आपको बता दें दो साल पहले पाकिस्तानी आतंकियों ने भारत में उरी स्थित आर्मी कैम्प पर हमला कर दिया था। इस हमले का बदला लेने के लिए सर्जिकल स्ट्राइक अंजाम दिया गया। इसके बाद सेना ने अपनी रणनीति में बदलाव लाते हुए 2016 में हिज़बुल कमांडर बुरहान वानी को भी मार गिराया था। इस वजह से घाटी में सेना को पत्थरबाज़ों का भी सामना करना पड़ा। सेना ने आतंकियों की नाक में दम कर दिया। बुरहान वानी की मौत से पहले POK में आतंकियों के लगभग 14 लॉंचिंग पैड थे, जहाँ लगभग 160 आतंकी रहते थे। लेकिन जब बुरहान वानी की मौत हुई आतंकियों की संख्या बढ़कर लगभग 230 हो गयी। POK में आतंकी कैम्प भी बढ़े हैं।

 

सीमा पार करने की फ़िराक़ में बैठे हैं कई आतंकी:

 

जब से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान बने हैं तब से आतंकी कैम्पों में आठ नए कैम्पों की बढ़ोतरी हुई है। अब इनकी संख्या बढ़कर 25-30 हो गयी है। इनमें से ज़्यादातर कैम्प लश्कर-ए-तोयबा के हैं। ये कैम्प लीपा, चकोटी, बाराकोटी, शादी, ज़ूरा, कहुता इलाक़े में चल रहे हैं। जहाँ सर्जिकल स्ट्राइक अंजाम दिया गया था, वहाँ के अलावा बींभर गली में भी आतंकियों के कैम्प लग चुके हैं। जहां तक भारत में घुसने की तैयारी कर रहे आतंकियों की बात है तो लीपा, चनेनियन, मंदोकली, नोकोट से यह घुसपैठ की तैयारियां चल रही हैं। नौगाम सेक्टर से भी पाकिस्तान आतंकियों को सीमा पार कराने की फिराक में बैठा है।

 

म्यांमार में भी की थी सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक:

ख़ुफ़िया रिपोर्ट के अनुसार लगभग 250 आतंकी सिर्फ़ मौकी की तलाश में हैं कि कब वो सीमा पार कर जाएँ। ये आतंकी दक्षिणी कश्मीर के माहौल को ख़राब करना चाहते हैं। आपको यहाँ पर बता दें कि 29 सितम्बर को पाकिस्तानी सीमा में की गयी सर्जिकल स्ट्राइक से पहले भारतीय जवानों ने 9 जून 2015 को म्यांमार की सीमा से लगते इलाके चंदेल में इसी तरह की सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया था। इससे पहले 4 जून एनएससीएन-के के उग्रवादियों ने मणिपुर में सेना के काफिले पर हमला कर 18 जवानों की हत्या कर दी थी। इसका जवाब देने के लिए भारतीय सेना ने यह सर्जिकल स्ट्राइक की थी। उस समय इलाके की कमान मौजूदा जनरल बिपिन रावत के ही हाथों में थी। इस पूरे मिशन को करीब 72 स्पेशल कमांडो ने अंजाम दिया था।

 

किया गया था पाकिस्तान को सबक़ सिखाने की योजना पर काम:

इन जवानों ने म्यांमार के अंदर घुसकर उग्रवादियों को ढेर किया था और उनके कैंपों को ध्वस्त कर दिया था। इसी तर्ज पर ही पाकिस्तान में भी सर्जिकल स्ट्राइल करने का फैसला किया गया था। इस सर्जिकल स्ट्राइल के बाद एक बार तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा था कि जब उनसे जम्मू कश्मीर में जवानों के शवों से हो रही बर्बरता और आर्मी कैंपों पर हो रहे हमलों पर जवाब मांगा गया तो वह उस वक्त कुछ खास नहीं कह सके थे। पत्रकारों ने उनसे यहां तक पूछा था कि म्यांमार की तरह की सरकार पाकिस्तान में भी ऐसा ही कुछ क्यों नहीं करती है। उनके मुताबिक यह प्रश्न उनके मन में तीर की तरह लगे थे, जिसके बाद पाकिस्तान को सबक सिखाने की योजना पर काम किया गया था।

 

सर्जिकल स्ट्राइक के लिए ले गए थे अपने साथ तेंदुए का मल:

इस सर्जिकल स्ट्राइक पर पूरी तरह से गोपनीयता बरती गई थी। आपको बता दें कि सर्जिकल स्ट्राइक में शामिल जवानों को साल 2017 में सम्मानित भी किया गया था। पाकिस्तान में हुई इस सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर कुछ दिन पहले नगरोटा के पूर्व कॉर्प कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल राजेंद्र निंबोरकर ने बड़ा खुलासा किया था। उन्होंने बताया था कि इस सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान कमांडो अपने साथ तेंदुए के पेशाब और मल लेकर गए थे, ताकि कुत्ते उनसे दूर रह सकें। जिस वक्त सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया गया था उस वक्त उत्तरी कमांड की जिम्मेदारी पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा के पास थी। उन्होंने एक बार कहा था कि यदि पाकिस्ताना की सेना सर्जिकल स्ट्राइक का जवाब देने की कोशिश करती तो भारतीय सेना उससे निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार थी।

 

29 सितम्बर को किया जाएगा एक प्रदर्शनी का आयोजन:

हाल ही में इससे जुड़े एक जवान की आतंकियों से लोहा लेते मौत हो गयी। जहां तक सर्जिकल स्ट्राइक डे मनाने की बात है तो इंडिया गेट के पास 29 सितंबर को एक मल्टीमीडिया प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा। भारतीय जवानों ने सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान जिन हथियारों का इस्तेमाल किया उन्हें भी आम लोगों को दिखाया जाएगा। भारतीय जवानों ने इस ऑपरेशन में ट्रिवोर असॉल्ट राइफल का उपयोग किया था। यह इजरायल से मंगवाई गई राइफल थी, जिसे फुल ऑटोमेटिक या सेमी ऑटोमेटिक मोड पर लगाया जा सकता है। इस ऑपरेशन में भारतीय जवानों ने डिस्पोजेबल राकेट लांचर का भी प्रयोग किया था, जिसमें राकेट लांचर को लांच करने के बाद भी ढोने की जरूरत नहीं होती, इसे राकेट की लांचिग के बाद फेंक दिया जाता है। ये सभी हथियार इंडिया गेट पर आम लोगों को दिखाने के लिए रखे जाएंगे।


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