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दिल्ली में शैलो फ़ॉग का क़हर, दृश्यता कम होने के साथ हवा हुई ज़हरीली

फ़ॉग और स्मॉग के मिलने से बनता है शैलो फ़ॉग

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दिल्ली-एनसीआर में अचानक से सोमवार को मौसम ने करवट बदल ली है। राजधानी में पूरे दिन धुँध की चादर फैली रही। पहले से ही दिल्ली-एनसीआर में हवा का स्तर काफ़ी चिंताजनक है, ऐसे में कोहरे के साथ मिलकर दृश्यता भी काफ़ी कम हो गयी है। सेहत के लिए नुक़सानदायक मानें जानें वाले छोटे कण PM 10 का स्तर 400 के पार यानी ख़तरनाक स्तर पर पहुँच गया। इस समय दिल्ली में शैलो फ़ॉग की स्थिति उत्पन्न हो गयी है।

 

फ़ॉग और स्मॉग के मिलने से बनता है शैलो फ़ॉग:

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आपकी जानकारी के लिए बता दें जब फ़ॉग और स्मॉग आपस में मिल जाते हैं तो इसे शैलो फ़ॉग कहा जाता है। इसकी वजह से धुँध काफ़ी बढ़ जाती है। यही वजह है कि अब दिल्ली वालों को खुली हवा में साँस लेने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा लोगों को आँखों में जलन की समस्या का भी सामना करना पड़ रहा है। एयर क्वालिटी इंडेक्स के अनुसार सोमवार को मंदिर मार्ग पर 707, मेजर ध्यानचंद स्टेडियम के पास 676, जवाहरलाल नेहरु स्टेडियम पर 681 अंकों के आसपास रहा।

 

घर से ना निकलें मॉर्निंग वॉक के लिए:

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इसके साथ ही दिल्ली में PM 2.5 और PM 10 का स्तर भी बहुत ख़राब रहा। एजेंसियों की तरफ़ से चेतावनी दी गयी है कि ऐसे मौसम में घरों से बाहर मॉर्निंग वॉक जे लिए ना निकलें। इसके अलावा प्रदूषण से बचने के लिए बेहतर क्वालिटी का मास्क भी पहनें। दिल्ली के ज़्यादातर इलाक़ों की हालत यह हो गयी है कि धुँध की वजह से लोगों का बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। सुबह-सुबह वॉक पर निकले लोगों के लिए मास्क पहनने के अलावा कोई चारा नहीं रह गया है।

 

 

 

इस दिवाली जलाएँ केवल ग्रीन क्रैकर्स:

 

दिल्ली-एनसीआर इलाक़ों में हवा की गुणवत्ता लगातार गिरती जा रही है। राजधानी का तापमान 14.8 डिग्री तक गिर गया है। राजधानी के सफदरजंग इलाक़े में दृश्यता 500-600 मीटर तक है। प्रदूषण की वजह से धुआँ और कोहरा आपस में मिल गए हैं। इसी वजह से दृश्यता पर फ़र्क़ पड़ रहा है। हवा के ख़राब स्तर को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गाइडलाइन जारी की है कि इस साल दिवाली के मौक़े पर केवल ग्रीन क्रैकर्स ही जलाए जाएँ।

 

ट्रक और ट्रैक्टर फैलाते हैं सबसे ज़्यादा प्रदूषण:

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सुप्रीम कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि क्रैकर्स रात के 8 बजे से लेकर केवल 10 बजे तक ही जलाए जाएँ। दिल्ली में हर तरह के कंट्रक्शन पर फ़िलहाल पूरी तरह से रोक लगा दी गयी है, ताकि वायु प्रदूषण पर पूरी तरह से नियंत्रण किया जा सके। एक रिपोर्ट के अनुसार PM 2.5 के लिए सिर्फ़ वाहनों का आँकड़ा देखा जाए तो इससे होने वाले प्रदूषण का कुल योगदान लगभग 28 प्रतिशत है। इस 28 प्रतिशत में भारी वाहन जैसे ट्रक और ट्रैक्टर सबसे ज़्यादा 9 प्रतिशत प्रदूषण फैलाते हैं। वहीं 2 पहिया वाहनों से 7 प्रतिशत प्रदूषण फैलता है।

 

 


 

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