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इस करवाचौथ करें इन मंत्रों का जाप, मिलेगा सुखी जीवन का आशीर्वाद

करवाचौथ व्रत कथा पढ़ना-सुनना दोनों होता है शुभ

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भारत एक धार्मिक देश है। यहाँ कई तरह के व्रत-त्योहार मनाए जाते हैं। हर ख़ास त्योहार और व्रत पर ख़ास तरह की पूजा भी की जाती है। करवाचौथ का पर्व भी ऐसा ही एक पर्व है, जिस दिन विवाहित महिलाएँ अपने पति की लम्बी आयु के लिए व्रत करती हैं। इस दिन महिलाएँ चाँद की पूजा करने के बाद ही भोजन ग्रहण करती हैं। करवाचौथ की पूजा कुछ ख़ास मंत्रों से की जाए तो बहुत ही शुभ माना जाता है। आज हम आपको कुछ ऐसे ही मंत्रों के बारे में बताने जा रहे हैं। इनमें शिव-पार्वती और श्रीगणेश आराधना के मंत्र भी शामिल हैं।

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अखंड सौभाग्य के लिए करें इन मंत्रों का जाप:

*- सुख सौभाग्य प्राप्ति के लिए:

ऊँ अमृतांदाय विदमहे कलारूपाय धीमहि तत्रो सोम: प्रचोदयात

*- माता पार्वती का आर्शिवाद पाने के लिए:

‘ॐ शिवायै नमः’

*- भगवान शिव का आर्शिवाद पाने के लिए:

‘ॐ नमः शिवाय’

*- कार्तिक की प्रार्थना के लिए:

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‘ॐ षण्मुखाय नमः’

*- भगवान श्री गणेश की पूजा के लिए:

‘ॐ गणेशाय नमः’

*- चंद्रदेव की आराधना के लिए:

‘ॐ सोमाय नमः’

आपकी जानकारी के लिए बता दें इस बार करवाचौथ का पर्व शनिवार 27 अक्टूबर को पड़ रहा है। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 36 मिनट से 6 बजकर 54 मिनट तक रहेगा। चंद्रोदय रात्रि 8 बजे होगा। जहाँ पर उगे चाँद की पूजा की जाती है, वहाँ महिलाएँ इसी समय चाँद को अर्ध्य देंगी। जिन जगहों पर पूरे उगे हुए चंद्रमा को अर्ध्य दिया जाता है, वहाँ की महिलाएँ 15-20 मिनट बाद अर्ध्य दे सकती हैं।

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हर सम्प्रदाय की महिलाएँ कर सकती हैं यह व्रत:

बता दें करवाचौथ सौभाग्यवती महिलाओं का पर्व माना जाता है। यह कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। करवाचौथ का व्रत सुबह सूर्योदय से पहले 4 बजे से शुरू होकर रात में चंद्रा दर्शन के बाद ही पूजा होता है। करवाचौथ का व्रत किसी भी आयु, जाति और सम्प्रदाय की महिलाओं को करने का हक़ है। केवल सुहागिन महिलाएँ ही नहीं बल्कि कुँवारी लड़कियाँ भी अपने होने वाले पति के लिए यह व्रत रख सकती हैं।

करवाचौथ व्रत कथा पढ़ना-सुनना दोनों होता है शुभ:

करवाचौथ की पूजा करते समय करवों में लड्डू रखकर अर्पित करें। एक लोटा, एक वस्त्र और एक विशेष करवा बायना के रूप मी रखकर ही पूजा करें। इस दिन करवाचौथ व्रत की कथा पढ़ना और सुनना दोनों शुभ माना जाता है। चंद्र को अर्ध्य देने के बाद ब्राह्मण, सुहागिन महिलाओं, पति और माता-पिता को भोजन करवाएँ। स्वयं भोजन ग्रहण करने से पहले दान-दक्षिणा करना ना भूलें। अपनी सास को बायने का लोटा, वस्त्र और विशेष करवा देकर आशीर्वाद लें। अगर सास ना हो तो घर की किसी बड़ी महिला को यही सब चिजीं देकर उनका आशीर्वाद लें।


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