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केरल में भयानक बाढ़ के बाद अब सूखे की आशंका, तेज़ी से घट रहा नदी-कुओं का जलस्तर

नदियों और कुओं का जलस्तर तेज़ी से हो रहा है कम

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अभी तक देश की जनता ख़ासतौर से केरल की जनता केरल में आयी भयानक बाढ़ को भूली नहीं है। केरल की बाढ़ ने केरल के लोगों की ज़िंदगी को पूरी तरह से बदलकर रख दिया। बाढ़ की वजह से कई लोगों का जीवन हमेशा के लिए बदल गया। जो कल तक करोड़पति हुआ करते थे आज वो सड़कों पर जीवन जीने के लिए मजबूर हैं। केरल की बाढ़ से सरकारी से लेकर निजी दोनो ही सम्पत्तियों को भारी स्तर पर नुक़सान हुआ है। राज्य के अनुमान के हिसाब से लगभग 20 हज़ार करोड़ रुपए की सरकारी सम्पत्ति का नुक़सान हुआ है।

 

पिछले सौ सालों में नहीं आयी भयानक बाढ़:

केरल की बाढ़ के बाद वहाँ के लोगों को रैट फीवर जैसी ख़तरनाक बीमारी का भी सामना करना पड़ा था। बाढ़ के समय पीड़ितों को ज़हरीले जीवों ने भी अपना शिकार बनाया था। बाढ़ का पानी कम होने के बाद जो लोग अपने घरों की तरफ़ लौट रहे थे, उन्हें इन ज़हरीले जीवों का सामना करना पड़ रहा था। केरल के एक अस्पताल में लगभग 50 से ज़्यादा सर्प दंश से पीड़ित लोगों का इलाज भी चल रहा था। केरल की बाढ़ के बारे में कहा जाता है कि ऐसी भयानक बाढ़ पिछले सौ सालों में कभी नहीं आयी थी।

 

नदियों और कुओं का जलस्तर तेज़ी से हो रहा है कम:

drought in kerala

जानकारी के अनुसार केरल की बाढ़ के बाद केरल सरकार ने राज्य के हालात का वैज्ञानिक ढंग से अध्ययन करवाने का फ़ैसला लिया है। सरकार को यह फ़ैसला इसलिए लेना पड़ा क्योंकि, केरल में बाढ़ के एक महीने बाद ही नदियों और कुओं का जलस्तर तेज़ी से कम हो रहा है। विशेषज्ञों ने राज्य के दक्षिणी हिस्से के कई जिलों में सूखे की आशंका ज़ाहिर की है। बता दें मानसूनी बारिश की वजह से पिछले महीने केरल में भयंकर बाढ़ आयी थी। केरल की बाढ़ में 29 मई से लेकर अब तक लगभग 500 लोगों के मारे जानें की ख़बर है।

 

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बाढ़ के बाद तेज़ी से हुई केरल में तापमान की वृद्धि:

केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने राज्य की विज्ञान, तकनीकी और पर्यावरण परिषद को एक अध्ययन करने का निर्देश दिया है। ऐसा इसलिए किया गया है, ताकि बाढ़ के बाद राज्य में उपजी समस्याओं का हल निकाला जा सके। आपको जानकर हैरानी होगी कि केरल में बाढ़ के बाद तेज़ी से तापमान भी बढ़ रहा है। इस वजह से नदियों-कुओं के जलस्तर और भू-जल स्तर में तेज़ी से गिरावट आइ है। इन सभी बातों को देखते हुए विशेषज्ञ चिंता जता रहे हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें केरल में जैव विविधता के लिए मशहूर वायानंद जिले से अचानक ही केंचुए ग़ायब हो गए हैं।

 

नज़र आ रही हैं एक किलोमीटर तक लम्बी दरारें:

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इसकी वजह से वहाँ के किसान काफ़ी परेशान हैं। बता दें इसकी वजह से मिट्टी के ढाँचे में बदलाव हो रहा है और ज़मीन भी तेज़ी से सूख रही है। पेरियार, भारतपूजा, पंपा, और क़बानी सहित कई नदियों के जलस्तर में असामान्य रूप से गिरावट दर्ज की गयी है। जबकि ये सभी नादिया बाढ़ के समय बेक़ाबू हो गयी थी। कई जगहों पर ज़मीनों में दरार भी आ गयी है। राज्य की भौगोलिक स्थितियाँ बदल गयी हैं। इडुक्की और वायानंद जैसे जिलों में एक किलोमीटर लम्बी दरारें नज़र आ रही हैं। बताया जा रहा है कि इन जिलों में बाढ़ के समय कई बार भूस्खलन भी हुआ था।

 

 


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