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इसबार चुनाव आयोग एक साथ पाँच राज्यों में करवा सकता है विधानसभा चुनाव

8 अक्टूबर को जारी होगी आख़िरी मतदाता सूची

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चुनाव आयोग मध्य प्रदेश, मिज़ोरम, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में होने वाले विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने की सम्भावनाओं पर विचार कर रहा है। जानकारी के अनुसार इन पाँच राज्यों में चुनाव की प्रक्रिया दिसम्बर के दूसरे सप्ताह तक पूरी हो सकती है। बता दें चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को कहा कि पुराने चुनावी कार्यक्रम को देखते हुए छत्तीसगढ़ में दो चरणों में मतदान हो सकता है, जबकि अन्य राज्यों में एक ही चरण में मतदान सम्पन्न हो सकता है।

 

8 अक्टूबर को जारी होगी आख़िरी मतदाता सूची:

assembly election

तेलंगाना में हाल ही में राज्यपाल की मंज़ूरी के बाद भंग हुई विधानसभा के बाद विधानसभा चुनाव कराने की तैयारियों को तेज़ करते हुए आयोग ने शनिवार को घोषणा की थी कि 8 अक्टूबर को आख़िरी मतदाता सूची प्रकाशित होगी। आयोग ने राज्य विधानसभा को समय से पूर्व भंग किए जानें के बीच मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया रोक दी थी। 8 अक्टूबर को आख़िरी मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। इसका मतलब यह हुआ कि इस तारीख़ के बाद किसी भी समय चुनाव हो सकता है। नई मतदाता सूची सामने आने के बाद आयोग क़ानूनी रूप से चुनाव कार्यक्रम घोषित करने के लिए पूरी तरह से तैयार होगा।

 

आयोग के पास है कर्मचारियों की भारी कमी:

आपको बता दें कुछ दिनों पहले ही चुनाव आयोग ने यह साफ़ कर दिया कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ नहीं करवाए जा सकते हैं। जबकि भाजपा यह चाहती है कि लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ करवाए जाएँ। इससे भाजपा को बढ़त मिलने की उम्मीद है। हालाँकि भाजपा के सपनों पर पानी फेरते हुए चुनाव आयोग ने यह साफ़ कर दिया कि यह बिलकुल सम्भव ही नहीं है। लोकसभा चुनाव कराने से पहले लगभग 14 महीने की तैयारी की ज़रूरत होती है। इसके अलावा चुनाव आयोग के पास कर्मचारियों की भी काफ़ी कमी है।

 

राजस्थान में हवा है कांग्रेस के पक्ष में:

बता दें चार राज्यों में पहले ही विधानसभा चुनाव के कार्यक्रम तय हो गए थे। लेकिन हाल ही में तेलंगाना विधानसभा समय से पहले भंग होने के बाद तेलंगाना में भी चुनाव साथ में ही करवाए जाएँगे। इसी वजह से चुनाव आयोग इसी साल के अंत तक पाँचों राज्यों में चुनाव करवा सकती है। अगर होने वाले इस विधानसभा चुनाव की बात की जाए तो लगभग 15 सालों से भाजपा का गढ़ रहे मध्य प्रदेश की हवा थोड़ी भाजपा के पक्ष में है, लेकिन राजस्थान में हवा कांग्रेस के पक्ष में बहती हुई दिखाई दे रही है। जानकारों का कहना है कि इस बार राजस्थान में भाजपा का जीत पाना मुश्किल है।

 

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माल्या के ख़ुलासे के बाद जमकर साधे जा रहे हैं भाजपा पर निशाने:

वहीं अगर छत्तीसगढ़ की बात की जाए तो वहाँ की हालत कुछ राजस्थान की तरह ही है। भाजपा कई तरफ़ से विपक्ष के घेरे में आ गयी है। पहले राफ़ेल डील की वजह से भाजपा पर कांग्रेस ने जमकर निशाना साधा। अब बढ़ते हुए पेट्रोल-डीज़ल की वजह से मोदी सरकार की काफ़ी किरकिरी हुई है। इसके साथ ही हाल ही में विजय माल्या के ख़ुलासे के बाद भी भाजपा के ऊपर जमकर निशाने साधे जा रहे हैं। देश के कई बैंकों को चपत लगाकर विदेश भागने वाले भगोड़े विजय माल्या ने हाल में अपने बयान में कहा कि उसने भारत से जानें से पहले वित्तमंत्री अरुण जेटली से मुलाक़ात की थी।

 

गिरता रुपया भी बन गया भाजपा के परेशानी का सबब:

इस मामले से भाजपा की हर जगह खींचाई हो रही है। वहीं इस मामले को कांग्रेस जमकर भुनाना चाहती है। माल्या के बयान के बाद दिल्ली सहित पूरे देश की राजनीति गरमा गयी है। इस समय हर जगह विजय माल्या और मोदी सरकार के रिश्ते की बातें की जा रही हैं। सोशल मीडिया पूरा भाजपा और माल्या के सम्बन्धों वाले मीम से भरा पड़ा है। हर कोई इस समय भाजपा सरकार पर निशाना साध रहा है। डॉलर के मुक़ाबले लगातार गिरता रुपया भी भाजपा के परेशानी का सबब बना हुआ है।

 


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