THE ADDA
THE ADDA: Hindi News, Latest News, Breaking News in Hindi, Viral Stories, Indian Political News

चुनाव आयोग ने सरकार के एक देश एक चुनाव सपने को दिया झटका

वोटिंग के दौरान ईवीएम का इस्तेमाल है बिलकुल सुरक्षित

3,234

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की एक देश एक चुनाव की महत्वाकांक्षी कोशिश को मूर्त रूप लेने की अभी कोई सम्भावना नहीं है। गुरुवार को चुनाव आयोग ने एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव कराने की अटकलों को ख़ारिज कर दिया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने कहा कि देश में एक साथ चुनाव कराए जानें को लेकर लीगल फ़्रेमवर्क पर काफ़ी काम करने की ज़रूरत है। आपको बता दें आयोग की तरफ़ से यह स्पष्टीकरण उस समय आया जब उम्मीद की जा रही थी कि इस साल के अंत में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और मिज़ोरम में होने वाले विधानसभा चुनाव को अगले साल अप्रैल-मई में होने वाले आम चुनाव तक के लिए टाला जा सकता है।

 

कहीं भाजपा की रणनीति तो नहीं है यह:

amit shah

आपको बता दें इस बार राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश विधानसभा के चुनाव में भाजपा की अच्छी स्थिति नहीं रहने की उम्मीद जताई जा रही है। कई लोगों का कहना है कि राजस्थान और मध्य प्रदेश में पूरी उम्मीद है कि सरकार बदल जाएगी हालाँकि छत्तीसगढ़ के बारे में कुछ भी साफ़-साफ़ नहीं कहा जा सकता है। अब ऐसे में कहीं यह भाजपा की सोची-समझी रणनीति तो नहीं है कि लोकसभा और विधान सभा के चुनाव साथ-साथ करवाए हैं। अगर दोनो चुनाव एक साथ हुए तो भाजपा के जितने की सम्भावना ज़्यादा हो जाएगी।

 

अमित शाह ने खुली बहस कराने की बात की:

जानकारी के अनुसार मिज़ोरम विधानसभा का कार्यकाल इस साल 15 दिसम्बर को ख़त्म हो रहा है, जबकि छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में विधानसभा का कार्यकाल अगले साल 5, 7 और 20 जनवरी को ख़त्म हो रहा है। औरंगाबाद में मुख्य चुनाव आयुक्त रावत ने निकट भविष्य में एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव कराए जानें के सवाल पर कहा कि इसका कोई चांस ही नहीं है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने हाल ही में एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव कराए जानें को लेकर स्वस्थ्य खुली बहस कराने की बात कही थी।

 

लोकसभा के चुनाव का कार्यक्रम तय करने में लगते हैं 14 महीने:

amit shah

रावत ने कहा कि चुनाव आयोग को लोकसभा चुनाव कराने से पहले उसका कार्यक्रम तय करने में ही लगभग 14 महीने लगते हैं। आयोग के पास स्टाफ़ की भारी कमी है। आयोग के पास इस समय केवल 400 स्टाफ़ हैं। लेकिन चुनाव के दौरान 1.11 करोड़ लोगों को काम पर लगाया जाता है। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की नाकामी पर उठे सवालों के बारे में रावत ने कहा कि मशीन की नाकामी का औसत 0.5 से लेकर 0.6 तक है जो मशीनी स्तर पर स्वीकार्य है। क्योंकि कोई भी मशीन 100 प्रतिशत तक सही नहीं हो सकती है।

 

वोटिंग के दौरान ईवीएम का इस्तेमाल है बिलकुल सुरक्षित:

आपकी जानकारी के लिए बता दें पिछले कई चुनावों से ईवीएम के ऊपर सवाल उठाए जा रहे हैं। कई लोगों का तो यहाँ तक भी कहना था कि इसे आसानी से हैक किया जा सकता है। कुछ लोगों ने तो पार्लियामेंट में इसका डेमो भी दिया था। उनके अनुसार किसी भी बटन को दबाओं वोट केवल एक ही पार्टी को जाता है। जबकि इस तरह की बातों से चुनाव आयोग हमेशा इनकार करता रहा है। चुनाव आयोग के अनुसार ऐसा सम्भव ही नहीं है। चुनाव आयोग का कहना है कि वोटिंग के दौरान ईवीएम का इस्तेमाल बिलकुल सुरक्षित है और इसमें किसी तरह के धाँधली की उम्मीद नहीं है।

 


इसे भी पढ़ें:

 

 

 

 

 

Comments
Loading...

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More