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जानें क्या है गैसलाइटिंग, कहीं आप भी तो रिलेशनशिप में नहीं हो रहे इसके शिकार?

हर समय ख़ुद की ग़लती मानना

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हर रिश्ते में किसी ना किसी बात को लेकर छोटी-मोटी बहस होती रहती है। किसी भी रिश्ते में छोटी-छोटी नोकझोंक होना कई लगभग आम बात होती है। लेकिन जब ये नोक-झोंक ज़्यादा हो जाती है तो परेशानी बढ़ जाती है। अक्सर आपने देखा होगा जब कोई किसी से बहुत ज़्यादा प्यार करता है तो उसे उसकी ग़लतियाँ उसे दिखाई नहीं देती हैं। इसी में से एक है गैसलाइटिंग। जब कोई व्यक्ति, लड़का या लड़की किसी से बेइंतेहा मुहब्बत करता है या उसपर आँखमूँदकर भरोसा करता है तो वह अक्सर ही गैसलाइटिंग का शिकार हो जाता है।

 

क्या है गैसलाइटिंग?

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आपकी जानकारी के लिए बता दें यह एक तरह का दुर्व्यवहार होता है, जिसके ज़रिए बातों के दबाव में दूसरे व्यक्ति का ब्रेन वाश किया जाता है। बढ़ते हुए मानसिक दबाव की वजह से गैसलाइटिंग से ग्रस्त व्यक्ति ख़ुद को सही होने के बाद भी हर बार अपनी ही ग़लती महसूस करने लगता है। वह ख़ुद को ग़लत समझने लगता है और उसे अपनी क्षमताओं और फ़ैसलों पर भी यक़ीन नहीं रहता है। वह यह समझने में असमर्थ हो जाता है, कि उसके साथ बुरा व्यवहार हो रहा है।

 

गैसलाइटिंग से पीड़ित व्यक्ति करते हैं इसका सामना:

हर समय ख़ुद की ग़लती मानना:

दुर्व्यवहार करने वाला व्यक्ति जब हर बात पर अपनी ग़लती मानने लगता है तो गैसलाइटिंग से पीड़ित व्यक्ति ख़ुद को दोषी मानने लगता है। उसे लगने लगता है कि जो कुछ भी हो रहा है, उसकी वजह से हो रहा है। वो अपनी बात नहीं रख पाता है और अपने आप को इसके लिए कोसना शुरू कर देता है।

 

धमकाने की कोशिश:

दुर्व्यवहार करने वाला व्यक्ति आपको बार-बार धमकाने की कोशिश करता है। अपनी ज़िंदगी में होने वाली हर बुरी चीज़ के लिए वह आपको दोषी ठहराता है। इस तरह से आप ख़ुद के ऊपर पड़ने वाले मानसिक दबाव को समझ ही नहीं पाते हैं।

 

हर चीज़ के लिए परेशान रहना:

गैसलाइटिंग से पीड़ित व्यक्ति बहुत ज़्यादा भ्रमित होता है। वह छोटी से छोटी बात को भी बहुत गम्भीरता से लेने लगता है। चिंता की वजह से उसकी सेहत पर भी बुरा असर पड़ता है।

 

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फ़ैसला ना कर पाना:

जब किसी भी व्यक्ति के ऊपर बात-बात पर दबाव पड़ता है तो वह कुछ भी सोचने-समझने के लायक नहीं रह जाता है। वह फ़ैसला लेने में भी असमर्थ हो जाता है। उसके अंदर पहले की तरह आत्मविश्वास नहीं रहता है। उसके मन की इच्छाएँ धीरे-धीरे मरने लगती हैं।

 

बात-बात पर माफ़ी माँगना:

अगर आप ख़ुद को हर बात के लिए दोषी मानने लगते हैं और बात-बात पर माफ़ी माँगने की आदत बना लेते हैं तो हो सकता है कि आप भी गैसलाइटिंग एक शिकार हों।


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