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क्या राम मंदिर मुद्दे पर आरएसएस और शिवसेना आएँगे आमने-सामने

25 नवम्बर को शिवसेना भी कर रही है बड़ी रैली का आयोजन

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जैसे-जैसे चुनाव नज़दीक आ रहा है, राम मंदिर का मुद्दा देश में गर्माता ही जा रहा है। हर बार चुनाव से पहले भाजपा राम मंदिर मुद्दे को भुनाती है। भाजपा को यह अच्छे से पता है कि हिंदुओं की भावनाएँ राम मंदिर से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में भाजपा का एक दावा कि राम मंदिर अब ज़रूर बनेगा, हिंदुओं को अपनी तरफ़ करने के लिए काफ़ी होता है। विश्व हिंदू परिषद भी राम मंदिर मुद्दे को लेकर काफ़ी समय से अभियान चला रही थी। लेकिन संगठन को जब यह लगने लगा कि राम मंदिर के नाम पर भाजपा सरकार धोखा देने का काम कर रही है तो प्रवीण टोगड़ियाँ ने ख़ुद को संगठन से अलग कर लिया।

 

रैली का आयोजन पसंद नहीं आया शिवसेना को:

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आरएसएस भी राम मंदिर मुद्दे को लेकर काफ़ी समय से उग्र तेवर अपनाती रही है। आरएसएस ने एक दिन पहले ही घोषणा की थी कि वो 25 नवम्बर को अयोध्या में राम मंदिर मुद्दे पर जनाग्रह रैली का आयोजन करेगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें उसी दिन शिव सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे भी राम मंदिर निर्माण मुद्दे को लेकर अयोध्या पहुँच रहे हैं। आरएसएस की तरफ़ से 25 नवम्बर को ही अयोध्या में रैली का आयोजन शिवसेना को पसंद नहीं आया है।

 

25 नवम्बर को शिवसेना भी कर रही है बड़ी रैली का आयोजन:

कई पार्टियों का यह मानना है कि 2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए राम मंदिर मुद्दा सबसे बड़ा मुद्दा बनने जा रहा है। इसी मुद्दे पर आरएसएस की तरफ़ से 25 नवम्बर को जनाग्रह रैली के आयोजन को विश्व हिंदू परिषद का भी समर्थन है। बता दें ऐसी रैलियों का आयोजन नागपुर और बेंगलुरु जैसे शहरों में भी होगा। इनमें हज़ारों साधु-संतों के हिस्सा लेने की भी सम्भावना है। 25 नवम्बर को ही शिवसेना अयोध्या में बड़े आयोजन की तैयारी कर रही है। जानकारी के अनुसार शिवसेना के मुखपत्र सामना में पार्टी ने आरएसएस की जनाग्रह रैली की तारीख़ को लेकर कई सवाल किए हैं।

 

शिवसेना ने रैली का फ़ैसला ले लिए था दशहरे में ही:

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मुखपत्र के लेख में लिखा गया है कि, इस जनाग्रह रैली से कुछ नहीं होने वाला है। अगर ऐसी सूखी रैली से राम मंदिर निर्माण में मदद मिलती तो 25 साल पहले इतने सारे कारसेवकों को अयोध्या में जान की क्यों गँवानी पड़ती। लोगों को इसका जवाब चाहिए। सामना के सम्पादकीय में यह भी कहा गया है कि, सबसे महत्वपूर्ण यह है कि आरएसएस की जनाग्रह रैली के लिए तारीख़ें किसने तय की। जिसने भी आरएसएस से कहा है कि रैली का आयोजन 25 नवम्बर को किया जाए, उसके नाम का ख़ुलासा किया जाना चाहिए। बता दें शिवसेना ने 25 नवम्बर को अपने कार्यक्रम का फ़ैसला दशहरा के समय ही ले लिया था।

 

भाजपा के वाल चुनाव के समय उठाती है मंदिर का मुद्दा:

सामना में कहा गया है कि, आरएसएस ने उसी दिन जनाग्रह रैली रखने का फ़ैसला क्यों किया? आरएसएस ने इसके बारे में पहले क्यों नहीं सोचा। शिवसेना पहले ही कह चुकी है कि भाजपा सरकार बहुत पहले ही राम मंदिर निर्माण करवा सकती थी। लेकिन वो सिर्फ़ चुनाव में ही इस मुद्दे का नाम लेते हैं। वो भी केवल नाम के लिए। शिवसेना के अनुसार भाजपा राम मंदिर निर्माण के लिए गम्भीर नहीं है। सूत्रों का यह भी कहना है कि आरएसएस अगर उसी दिन अयोध्या में रैली करता है, जिस दिन शिवसेना का भी वहाँ कार्यक्रम है तो शिवसेना के कार्यक्रम को ज़्यादा तवज्जो नहीं मिलेगा।

 

 


 

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