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एक-दो दिन की होली तो बहुत देखी होगी, लेकिन यहाँ मनाई जाती है दो महीने होली, जानें

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भारत एक सांस्कृतिक देश है। यहाँ कई संस्कृतियों का मेलजोल देखने को मिलता है। भारत में वैसे तो कई त्योहार मनाए जाते हैं, लेकिन होली की बात ही कुछ और है। अगले महीने में पूरे देश में होली का त्योहार मनाया जाएगा। होली का त्योहार वैसे तो पूरे देश में दो दिनों तक मनाया जाता है, लेकिन देश में एक ऐसी भी जगह है, जहाँ होली की धूम तीन महीने तक रहती है। जी हाँ हम बात कर रहे हैं उत्तराखंड की सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा की। यह शहर तीन महीनों तक होली के रंगों से ही नहीं बल्कि होली की सुरों से गुलज़ार रहता है। पौष महीने की पहले रविवार से शुरू होकर छरडी पर जाकर उद्यापित होता है।

महीने

कुमाऊँ गीतों से होती है सराबोर:

अल्मोड़ा में बैठकी होली, खड़ी होली और महिला होली होती है। सबसे पहले बैठकी होली के बारे में जानते हैं। नाम से ही प्रतीत हो रहा है कि बैठकर गाई जाने वाली होली को बैठकी होली कहा जाता है। यह सदियों पुरानी परम्परा है। ब्रज के साथ कुमाऊनी संगीत का मिश्रण ही बैठकी होली है। बैठकी होली शास्त्रीय संगीत पर आधारित होने की बाद भी कुमाऊँ के लोकगीत से सराबोर रहती है। इसकी शुरुआत किसी मंदिर के प्रांगण से होती है , गायक लोग हारमोनियम, तबला, ढोलक और अन्य लोक वाद्य यंत्रों के साथ मंदिर प्रांगण में इकट्ठा होते हैं। बीच बीच में कुछ विशेष अवसरों पर – जैसे वंसत, शिवरात्रि या रंगभरी एकादशी में होली की ‘विशेष’ बैठकें होती हैं, ये सुबह तक चलती हैं। बाकी दिनों सांयकालीन बैठकें आयोजित की जाती हैं।

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जमती है महिलाओं की टोली और गाती हैं होली:

खड़ी होली भी नाम से ही स्पष्ट हो रहा है कि खड़े होकर गई जाने वाली होली खड़ी होली होती है। हालाँकि इसमें और बैठकी होली में ज़्यादा फ़र्क़ नहीं है। यह होली पूरे गाँव, शहर में फेरी लगाकर गाई जाती है। लोगों के दरवाज़े पर जा-जाकर यह होली गाई जाती है। खड़ी होली में कोई भी भाग ले सकता है। यानी रास्ते में चलते समय इस टोली से कोई भी जुड़कर होली गाते हुए आगे बढ़ सकता है। खड़ी होली के लिए किसी विशेष राग की ज़रूरत नहीं होती है। बिना अश्लीलता के होने वाली इस मस्ती का आनंद ही अलग होता है। जहाँ बैठकी होली में सुरों का ध्यान रखा जाता है, वहीं खड़ी होली में बोलों का ज़्यादा महत्व होता है।

महीने

अब बारी आती है महिला होली की। आनंद लेने का हक़ केवल पुरुषों को ही नहीं बल्कि महिलाओं को भी है। इसमें पुरुषों की तरह महिलाओं की मंडली जमती है और वह जमकर होली गाती हैं।


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