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चीन की नई चाल, कर रहा है भारत के ख़िलाफ़ वॉटर बम का इस्तेमाल, हाई अलर्ट पर सरकारी एजेंसियाँ

लोगों को झेलना पड़ रहा है बाढ़ का ख़तरा

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चीन के बारे में किसी को कुछ भी बताने की ज़रूरत नहीं है। चीन आए दिन अपनी कोई ना कोई नयी चाल चलता रहता है। यह बात सभी लोग जानते हैं कि चीन भारत को हार बार नीचा दिखाने की कोशिश में लगा रहता है। हाल ही में चीन ने भारत को नुक़सान पहुँचाने के लिए कुछ ऐसा ही किया है। चीन ने भारत को जानकारी दी है कि नदी से हर सेकेंड 18 हज़ार क्यूबिक मीटर पानी छोड़ा जा रहा है। ब्रह्मपुत्र से सटे इलाते डूब रहे हैं।

लोगों को झेलना पड़ रहा है बाढ़ का ख़तरा:

चीन

असम के धेमाजी, डिब्रूगढ़, लखीमपुर, तिनसुकिया और ज़ोरहाट जिले में हाई अलर्ट घोषित है। इसी वजह से असम और अरुणाचल प्रदेश के कई इलाक़े बाढ़ का ख़तरे का सामना कर रहे हैं। असम के 10 गाँव पानी में डूब भी गए हैं। सरकारी एजेंसियाँ हाई अलर्ट पर हैं। अभी ज़्यादा दिन नहीं हुआ, जब केरल की भयानक बाढ़ ने लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया था। वहाँ के लोगों को काफ़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। अब भारत के इन दो राज्यों में भी लोगों को बाढ़ का ख़तरा झेलना पड़ रहा है।

अरुणाचल में ब्रह्मपुत्र को जाना जाता है सियांग के नाम से:

दरअसल चीन शासित तिब्बत में लैंडस्लाइड होने की वजह से रास्ता बंद हो गया है। इसके बाद यहाँ एक कृत्रिम झील बन गयी है। पहाड़ से गिरे हुए चट्टानों ने नदी का रास्ता रोक दिया है। जानकारी के अनुसार यह भूस्खलन 16 अक्टूबर को तिब्बत में यारंगुल सांग्पो नदी पर हुआ है। अब ख़तरा यह है कि पानी के दबाव की वजह से यह अस्थाई बाँध टूट गए तो निचले इलाक़े में तेज़ रफ़्तार से पानी आ सकता है। इस नदी के निचले इलाक़े में अरुणाचल प्रदेश और असम के भूभाग शामिल हैं। इस नदी को अरुणाचल प्रदेश में सियांग के नाम से जाना जाता है, जबकि असम में इसे ब्रह्मपुत्र कहा जाता है।

ख़तरे का निशान पार कर गया सियांग नदी में पानी:

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आपकी जानकारी के लिए बता दें अब धीरे-धीरे इस नदी पानी निचले इलाकों की ओर आ रहा है। चीन ने भारत को बताया है कि नदी से प्रति सेकेंड 18 हजार क्यूबिक मीटर पानी छोड़ा जा रहा है। ब्रह्मपुत्र से सटे इलाके डूब रहे हैं। असम के धेमाजी, डिब्रूगढ़, लखीमपुर, तिनसुकिया और जोरहाट जिलों में हाई अलर्ट घोषित है। अगर बाढ़ का पानी धीरे-धीरे निकल गया तब तो ठीक है, लेकिन वहां फ्लैश फ्लड की स्थिति बनी तो निचले इलाकों में स्थिति खराब हो सकती है। अरुणाचल प्रदेश में बाढ़ के हालात पर नजर रख रहे अधिकारियों का कहना है कि सियांग नदी में पानी खतरे के निशान से पार कर कर गया है।

सूचना देकर निचले इलाक़े में किया जा सकता था कम नुक़सान:

चीन की ओर से बताया गया है कि भूस्खलन के पीछे “प्राकृतिक कारण” हैं। पर भारत सरकार तकनीक की मदद से चीन सरकार के इस दावे की हकीकत का पता लगा रही है। भारतीय एजेंसियों का शक है कि प्राकृतिक कारण का हवाला देकर चीन भारतीय भूभाग में तबाही की साजिश रच सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इन इलाकों में लैंडस्लाइड की घटनाएं तो होती हैं, लेकिन सही समय पर इसकी सूचना देकर निचले इलाकों में नुकसान कम किया जा सकता है।

2000 में भी हुई थी भारतीय क्षेत्र में काफ़ी तबाही:

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चीन इस सूचना को भारत के साथ साझा करने में देरी करता है, इसकी वजह से नुकसान होता है। सुरक्षा विशेषज्ञ चीन की इस साजिश को ‘वाटर बम’ रणनीति कहते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि पिछले साल जब असम के काजीरंगा में बाढ़ आई थी तो भी चीन द्वारा अचानक भारतीय क्षेत्र में भारी मात्रा में पानी छोड़ा गया था। साल 2000 में भी ब्रह्मपुत्र नदी में चीन द्वारा बिना सूचना के पानी छोड़े जाने की वजह से अरुणाचल और पूर्वोत्तर राज्यों में काफी तबाही हुई थी।

पिछले साल के बाद ही चीन ने बंद कर दिया आँकड़े साझा करना:

बता दें कि हाल ही में भारत के जल संसाधन मंत्रालय और चीन के जल संसाधन मंत्रालय के बीच हुए समझौता हुआ था और यह तय हुआ था कि चीन हर साल बाढ़ के मौसम यानी 15 मई से 15 अक्तूबर के बीच ब्रह्मपुत्र नदी में जल-प्रवाह से जुड़ी सूचनाएं भारत के साझा करेगा। पिछले साल डोकलाम विवाद के बाद पैदा हुए तनाव की वजह से चीन ने भारत के साथ ब्रह्मपुत्र नदी में पानी छोड़े जाने से जुड़े आंकड़े साझा करने बंद कर दिए थे।


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