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स्वतंत्र रूप से फ़ैसला नहीं ले रहे थे मुख्य न्यायाधीश, इसलिए किया प्रेस कॉन्फ़्रेन्स- जस्टिस कुरियन

चीज़ें नहीं जा रही हैं सही दिशा में

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आपको याद होगा अब से कुछ समय पहले सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने प्रेस कॉन्फ़्रेन्स किया था। यह पहली बार था जब सुप्रीम कोर्ट के जज ऐसा कुछ कर रहे थे। इसके बारे में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज जोसेफ़ कुरियन ने ख़ुलासा किया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हुए और जनवरी में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले 4 जजों में शामिल जस्टिस कुरियन जोसेफ़ ने एक इंटरव्यू में कहा कि पूर्व चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्रा स्वतंत्र तौर पर फ़ैसले नहीं ले रहे थे बल्कि वो किसी बाहरी प्रभाव में फ़ैसले ले रहे थे।

 

चीज़ें नहीं जा रही हैं सही दिशा में:

जस्टिस कुरियन

उन्होंने कहा, यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता का प्रश्न था, लोकतंत्र और सुप्रीम कोर्ट जैसी संस्था की रक्षा का प्रश्न था। जस्टिस कुरियन ने इंटरव्यू में कहा, हमें यकीन था कि चीफ जस्टिस खुद से फैसले नहीं ले रहे थे। हमने पाया कि भारत के मुख्य न्यायाधीश पर बाहरी प्रभाव था। ये एक या दो फ़ैसलों का सवाल नहीं था, लेकिन आम तौर पर मुख्य न्यायाधीश और भारत के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर, उनका जो दायित्व निर्वाह था, हमने पाया कि चीज़ें सही दिशा में नहीं जा रही हैं।

 

की थी जस्टिस मिश्रा के ख़िलाफ़ प्रेस कॉन्फ़्रेन्स:

जनवरी में जस्टिस जोसेफ ने सुप्रीम कोर्ट के तीन अन्य वरिष्ठत्तम जजों जस्टिस जे चेलामेश्वर (जो अब रिटायर हो चुके हैं), रंजन गोगोई (जो अब चीफ जस्टिस बन चुके हैं) और जस्टिस मदन लोकुर के साथ मलिकर तब के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी और चिंताओं से सभी को अवगत कराया था जिसमें एक मामला था जिसका ज़िक्र प्रेस कॉन्फ़रेंस में किया गया, जिसका वास्ता केसों के बंटवारे से था। जस्टिस कुरियन ने कहा कि हम और बहुत सारी दूसरी बातें भी सामने लाए थे जो उनके नाम लिखी हमारी चिट्ठी में थीं।

 

 


 

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