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जैश-ए-मुहम्मद के चार स्नाइपर पाकिस्तान ने भेजे भारत में, सुरक्षा बलों के लिए बने मुसीबत

आईएसआई ने दिया है आतंकियों को प्रशिक्षण

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पाकिस्तान किसी समय में भले ही भारत का हिस्सा हुआ करता था, लेकिन आज वही पाकिस्तान भारत को अपना सबसे बड़ा दुश्मन समझता है। यही वजह है कि पाकिस्तान को भारत की ख़ुशी और इसकी शांति बिलकुल भी रास नहीं आती है। इसी वजह से वह भारत की शांति को भंग करने के लिए आए दिन कोई ना कोई चाल चलता रहता है। पाकिस्तान भारत की शांति भंग करने के लिए अपने आतंकियों को घाटी में भेजता है, जिससे भारत में आतंक बढ़ाया जा सके। हालाँकि भारतीय सेना पाकिस्तान की हर चाल को नाकाम करने के लिए पूरी तरह से तैनात बैठी रहती है।

हमले में हो चुके हैं तीन सुरक्षाकर्मी शहीद:

पाकिस्तान

इस समय जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बाल आतंकियों के सफ़ाये का अभियान चला रहे हैं। खोज-खोजकर आतंकियों का सफ़ाय किया जा रहा है। आतंकी सेना के इस अभियान से काफ़ी परेशान हो गए हैं। इसी वजह से कुछ दिन पहले आतंकियों ने सेना कैम्प पर हमला किया था, जिसमें दो जवान शहीद हो गए थे। अब जानकारी मिली है कि पाकिस्तान से घुसपैठ कर आए जैश-ए-मोहम्मद के चार आतंकी सेना के सामने नई चुनौती खड़ी कर रहे हैं। एम-4 कार्बाइन से लैश ये आतंकी दूर से ही स्नाइपर हमले कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि ये सितम्बर से ही सक्रिय हैं। इनके हमले से अब तकि तीन सुरक्षाकर्मी शहीद हो चुके हैं।

आईएसआई ने दिया है आतंकियों को प्रशिक्षण:

ख़ुफ़िया सूत्रों के अनुसार स्नाइपर अटैक कर रहे आतंकी दो-दो गुटों में बँट गए हैं। सितम्बर में कुछ मददगारों की मदद से ये आतंकी दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले में घुसे थे। जानकारी के अनुसार इन आतंकियों को पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई ने गहन प्रशिक्षण दिया है। आतंकियों को एम-4 कार्बाइन से लैश करके कश्मीर में स्नाइपर अटैक के लिए भेजा गया है। बता दें एम-4 कार्बाइन का इस्तेमाल अफगानिस्तान में अमेरिका के नेतृत्व वाली मित्र देशों की सेना ने किया था। आशंका है कि ये हथियार तालिबान से ज़ब्त किए गए हथियारों के ज़ख़ीरे का हिस्सा हो सकते हैं।

सुरक्षा बलों ने अपनाई है नई रणनीति:

four-terrorists-of-jaish-e-mohammed-sent-to-kashmir-by-pakistan-challange-for-security-forces

यह भी कहा जा रहा है कि पाकिस्तान के विशेष सुरक्षा बाल इसका इस्तेमाल करते हैं। सुरक्षा बलों के ऊपर अभी तक जो तीन स्नाइपर अटैक हुए हैं, वो रात के अंधेरे में छोटी पहाड़ी से सेना या सीआरपीएफ़ के कैम्प पर किए गए। ये हमले उस समय किए गए जब जवान मोबाइल से अपने परिवार या दोस्तों से बात कर रहे थे। जैसे ही संतरी की चौकी या अन्य जगहों पर रात में ड्यूटी दे रहे जवानों की मोबाइल की लाइट जलती है, ऊँचाई पर बैठे आतंकी निशाना लगा देते हैं। आतंकियों के स्नाइपर अटैक बढ़ने की वजह से सुरक्षा बलों ने भी नई रणनीति अपना ली है।

आधा किलोमीटर दूर से लगाया जा सकता है अचूक निशाना:

सेना की नई रणनीति का पर्दाफ़ाश नहीं किया गया है। बता दें कैम्पों में रहने वाले सेना, सीआरपीएफ़ और पुलिस के जवानों को ताज़ा निर्देश दिए गए हैं। जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम फ़ारूख अब्दुल्ला का कहना है कि अब तक स्नाइपर अटैक सीमा से सटे हुए इलाक़े में ही होते थे। लेकिन पहली बार घाटी के अंदरूनी इलाक़ों में भी ऐसे हमले देखे जा रहे हैं। हमें सुरक्षा रणनीति पर दुबारा विचार करना चाहिए। आपको बता दें एम-4 कार्बाइन टेलीस्कोप और नाइट विजन डिवाइस के साथ आती है। इससे लगभग आधा किलोमीटर दूर से ही अचूक निशाना लगाया जा सकता है।


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