THE ADDA
THE ADDA: Hindi News, Latest News, Breaking News in Hindi, Viral Stories, Indian Political News

फ़्रांस के पूर्व राष्ट्रपति का ख़ुलासा, मोदी सरकार ने राफ़ेल डील के लिए दिया था रिलायंस का नाम

ज़बरन थोपा गया था सरकार की तरफ़ से रिलायंस का नाम

4,820
SHEIN -Your Online Fashion Jumpsuit

राफ़ेल डील का मामला थमता हुआ नहीं दिख रहा है। इस मामले की वजह से भाजपा की किरकिरी बहुत ज़्यादा हो रही है। एक तरफ़ कांग्रेस इस मामले में भाजपा पर निशाना साधने का कोई मौक़ा नहीं छोड़ रही है, वहीं भाजपा हर बार अपना बचाव करती हुई दिखाई दे रही है। भारत और फ़्रांस सरकार के बीच हुई इस डील में अनिल अंबानी की एंट्री पर कांग्रेस लगातार सवाल उठा रही है। हाल ही में हुए एक और ख़ुलासे ने भाजपा की नींद उड़ा दी है। बता दें कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अनिल अंबानी को राफ़ेल डील में शामिल किए जानें को लेकर लगातार केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल पूछ रहे हैं।

 

भारत सरकार की तरफ़ से दिया गया था रिलायंस का नाम:

जानकारी के अनुसार एक फ़्रेंच वेबसाइट ने फ़्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ़्रांस्वा ओलांद के हवाले से लिखा है कि राफ़ेल डील के लिए भारत की तरफ़ से अनिल अंबानी की रिलायंस कम्पनी का नाम प्रस्तावित किया था और दसॉ एविएशन कम्पनी के पास कोई और विकल्प नहीं था। ओलांद का कहना है कि भारत सरकार की तरफ़ से रिलायंस का ही नाम दिया गया था। इसे चुनने में दसॉ की कोई भूमिका नहीं है। ओलांद का इंटरव्यू छापने वाली मीडिया परत के अध्यक्ष एडवे प्लेनले ने बताया कि डील को लेकर ओलांद बिलकुल स्पष्ट हैं।

 

ज़बरन थोपा गया था सरकार की तरफ़ से रिलायंस का नाम:

उन्होंने कहा कि ओलांद उस समय भी डील के वक़्त अनिल अंबानी की मौजूदगी को लेकर भारत सरकार से सवाल किए थे। भारत सरकार की तरफ़ से इस मामले में रिलायंस का नाम ज़बरन थोपा गया था। पहले क़रार 100 से ज़्यादा राफ़ेल विमानों को लेकर था। लेकिन बाद में सरकार ने 36 विमानों पर सहमति जताई। मीडिया पार्ट के प्रमुख एडवे ने कहा कि हमने ओलांद से अनिल अंबानी के बारे में सवाल पूछा था, क्योंकि बाद में अंबानी का पैसा जुली जेयट की फ़िल्म में लगाया गया था।

 

प्रशांत भूषण के एक ट्वीट ने ला दिया मामले में नया मोड़:

इसके बारे में ओलांद ने कहा कि इस डील का मतलब यह नहीं है कि वह अपनी गर्लफ़्रेंड को कुछ गिफ़्ट करें। अंबानी इस डील के लिए फ़्रांस सरकार से नहीं मिले। रिलायंस भारत सरकार की माँग के आधार पर इस डील में शामिल था। ओलांद ने साफ़ किया कि यह मामला उनके राष्ट्रपति रहने से सम्बंधित नहीं है। सामाजिक कार्यकर्ता और देश के जानें-मानें वक़ील प्रशांत भूषण के एक ट्वीट ने पूरे मामले में नया मोड़ ला दिया है। उन्होंने अपने ट्वीट में पूर्व फ़्रेंच राष्ट्रपति ओलांद के हवाले से कहा कि अनिल अंबानी को चुनने में फ़्रांस की कोई भूमिका नहीं थी।

 

राफ़ेल मामले में भाजपा का बचाव करने उतरा रक्षा मंत्रालय:

प्रशांत भूषण ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल दागते हुए ट्वीट किया, ‘यह धमाकेदार है। पूर्व फ़्रेंच राष्ट्रपति ओलांद, जिन्होंने मोदी के साथ 36 विमानों को लेकर सौदा किया था, ने कहा कि फ़्रांस या दसॉ ने डील के लिए अंबानी का चयन नहीं किया था। क्या इसकी सिफ़ारिश मोदी ने की थी? क्या यह भी कोई सीक्रेट है मोदी जी?’ राफ़ेल विमान पर बढ़ते विवाद को देखते हुए भाजपा के बचाव में रक्षा मंत्रालय उतर आया। रक्षा मंत्रालय ने ट्वीट करते हुए सफ़ाई दी है। मंत्रालय की तरफ़ से कहा गया है कि व्यावसायिक मामले में भारत सरकार की कोई भूमिका नहीं है। पार्टनर चुनने में ना ही भारत सरकार की कोई भूमिका है और ना ही फ़्रांस सरकार की।

 

SHEIN -Your Online Fashion Blouse

- Advertisement -

साफ़ बात नाम के ट्वीटर हैंडल पर शेयर किया गया लेख:

आपकी जानकारी के लिए बता दें यह पूरा विवाद उस समय सामने आया जब फ़्रेंच न्यूज़ वेबसाइट मीडिया पार्ट में शुक्रवार को इससे सम्बंधित एक लेख छपा। फ़्रेंच भाषा में छपे हुए इस लेख में राफ़ेल डील को लेकर एक नया ही ख़ुलासा किया गया। इस लेख को साफ़ ‘बात नाम’ के ट्वीटर हैंडल पर शेयर किया गया। इसी पोस्ट को आधार बनाकर प्रशांत भूषण ने मोदी सरकार पर इस नए विवाद पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल पूछ दिया। वहीं इस मामले में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कैसे चुप रह सकते थे। इस ख़ुलासे के बाद राहुल गांधी ने भी जमकर भाजपा पर निशाना साधा।

 

ओलांद से डील की क़ीमत बताने का किया आग्रह:

राहुल गांधी ने भाजपा पर हमला करते हुए ट्वीट किया कि, प्रधानमंत्री ने बंद दरवाज़े के पीछे निजी तौर पर राफ़ेल डील पर बात की और इसमें बदलाव करवाया। फ़्रांस्वा ओलांद को धन्यवाद, हम अब जानना चाहते हैं कि उन्होंने दिवालिया हो चुके अनिल अंबानी के लिए बिलियन डॉलर्स की डील करवाई। प्रधानमंत्री मोदी ने देश को धोखा दिया है। उन्होंने हमारे सैनिकों की शहादत का अपमान किया है।’ वहीं कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने इस लेख को री-ट्वीट करते हुए ओलांद से डील की क़ीमत बताने का आग्रह करते हुए कहा कि, ‘आप यह भी बताएँ कि राफ़ेल की 2012 में 590 करोड़ रुपए की क़ीमत 2015 में 1690 करोड़ कैसे हो गयी। लगभग 1100 करोड़ की वृद्धि। में जानता हूँ कि यूरो की वजह से यह कैलकुलेशन की दिक़्क़त नहीं है।’

 

गूगल ट्रांसलेशन की मदद से ना पढ़े यह लेख:

वहीं फ़्रेंच भाषा में लिखे लेख को पढ़ने के लिए गूगल ट्रांसलेशन का सहारा लेने वालों के लिए नई दिल्ली में फ़्रेंच अख़बार ल मान्द के दक्षिणी एशियाई पत्रकार जूलियन वोयूसो ने ट्वीट करते हुए लोगों को हिदायत दी है कि फ़्रेंच भाषा में लिखे गए इस लेख को गूगल ट्रांसलेशन की मदद से ना पढ़ा जाए। उन्होंने इस रिपोर्ट को ट्रांसलेट करते हुए ट्वीट किया कि, ‘ओलांद ने भारतीय सरकार के बयान का खंडन किया है। ओलांद के अनुसार अनिल अंबानी को दसॉ ने नहीं चुना था। हमारे पास विकल्प नहीं था। हमने उसी को पार्टनर चुना जो हमें दिया गया था।’

 

सीतारमण पर राहुल ने लगाया झूठ बोलने का आरोप:

बता दें इससे पहले हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड (HAL) के पूर्व प्रमुख टीएस राजू की तरफ़ से राफ़ेल डील को लेकर किए गए दावों के बाद कांग्रेस ने रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण से इस्तीफ़े की माँग की। पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी के अनुसार रक्षा मंत्री ने बुधवार को जो बयान दिया वो बहुत ही परेशान करने वाला था। इसके साथ ही इन्होंने सरकार से सभी फ़ाइलों को सार्वजनिक करने की माँग की है। कांग्रेस राफ़ेल मामले की संयुक्त संसदीय समिति से जाँच कराने की माँग पहले से ही कर चुकी है। इस मामले के कांग्रेस CAG का दरवाज़ा भी खटखटा चुकी है। अब कांग्रेस इस मामले को CVC तक भी ले जानें वाली है। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस मामले में ट्वीट करके निर्मला सीतारमण पर झूठ बोलने का आरोप भी लगाया है।


यह भी पढ़ें:-

 

Loading...
Loading...

- Advertisement -

SHEIN -Your Online Fashion Blouse

- Advertisement -

Comments
Loading...

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More