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पढ़िए मोदी के नमामी गंगे की पोल खोलने वाले सानंद स्वामी का आख़िरी पत्र

सानंद स्वामी की माँग को कर दिया गया था अनदेखा

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गंगा को अविरल बनाने के लिए ‘गंगा संरक्षण प्रबंधन अधिनियम’ की माँग को लेकर काफ़ी समय से अनशन पर बैठे प्रोफ़ेसर जीडी अग्रवाल यानी गंगा पुत्र सानंद स्वामी का गुरुवार को ऋषिकेश के एम्स में निधन हो गया। आपकी जानकारी के लिए बता दें प्रोफ़ेसर अग्रवाल पिछले 111 दिन से अनशन पर बैठे हुए थे और मंगलवार को उन्होंने जल भी त्याग दिया था। इसके बाद प्रशासन ने ज़बरदस्ती उनको उठाकर अस्पताल में भर्ती करवा दिया था। बता दें प्रोफ़ेसर जीडी अग्रवाल को सानंद स्वामी के नाम से भी जाना जाता था।

 

सानंद स्वामी की माँग को कर दिया गया था अनदेखा:

G.D. Agarwal's Third and Final Letter to PM Modi on Saving the Ganga

इन्होंने गंगा को अविरल बनाने के लिए अपना पूरा जीवन लगा दिया। इनकी सरकार से माँग थी कि गंगा की सहायक नदियों पर बन रहे पनबिजली परियोजना को बंद किया जाए और गंगा संरक्षण अधिनियम लागू किया जाए। उन्होंने गंगा को पुनर्जीवित करके ने लिए ज़िम्मेदार मंत्रियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कई पत्र भी लिखे थे। लेकिन उनके किसी पत्र पर सम्बंधित अधिकारियों की तरफ़ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी, जिसकी उन्हें उम्मीद थी। एक तरफ़ तो मोदी सरकार नमामी गंगे के नाम पर अरबों रुपए लूटा रही है, वहीं सानंद स्वामी की माँग को अनदेखा कर दिया गया।

 

मुझसे मिलने आयी थी साध्वी उमा भारती:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपनी तीसरी और अंतिम चिट्ठी में उन्होंने लिखा, ‘3.08.2018 को केंद्रीय मंत्री साध्वी उमा भारती जी मुझसे मिलने आई थीं। उन्होंने फोन पर नितिन गडकरी जी से मेरी बात कराई, लेकिन प्रतिक्रिया की उम्मीद आपसे है। इसीलिए मैने सुश्री उमा भारती जी को कोई जवाब नहीं दिया। मेरा यह अनुरोध है कि आप निम्नलिखित चार वांछित आवश्यकताओं को स्वीकार करें जो मेरे 13 जून 2018 को आपको लिखे गए पत्र में सूचीबद्ध है यदि आप असफल रहें तो मैं अनशन जारी रखते हुए अपना जीवन त्याग दूंगा।’ इसके बाद भी मोदी सरकार ने कोई क़दम नहीं उठाया। आज हम आपको प्रोफ़ेसर जीडी अग्रवाल द्वारा पीएम मोदी को लिखी गयी पूरी चिट्ठी की बारे में बताएँगे।

 

सानंद स्वामी द्वारा मोदी को लिखी गयी आख़िरी चिट्ठी:

सेवा में,

श्री नरेंद्र भाई मोदीजी, आदरणीय प्रधानमंत्री, भारत सरकार, नई दिल्ली

आदरणीय प्रधानमंत्री,

गंगाजी से संबंधित मामलों का उल्लेख करते हुए मैंने अतीत में आपको कुछ पत्र लिखे थे, लेकिन आपकी तरफ से अब तक मुझे इस संबंध कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। मुझे काफी भरोसा था कि प्रधानमंत्री बनने के बाद आप गंगाजी के बारे गंभीरता से सोचेंगे। क्योंकि आपने 2014 चुनावों के दौरान बनारस में स्वयं कहा था कि आप वहां इसलिए आए हैं, क्योंकि आपको मां गंगाजी ने बुलाया है- उस पल मुझे विश्वास हो गया कि शायद गंगाजी के लिए कुछ सार्थक करेंगे। इस विश्वास के चलते मैं पिछले साढ़े चार साल से शांति से इंतजार कर रहा था।

 

सरकार को सहना पड़ा करोड़ों का घाटा:

G.D. Agarwal's Third and Final Letter to PM Modi on Saving the Ganga

शायद आपको मालूम होगा कि मैं पहले भी कई बार गंगाजी के हित में कार्यों को लेकर अनशन कर चुका हूं। इससे पहले मेरे आग्रह के आधार को स्वीकार करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी ने लोहारी नागपाला जैसे बड़े प्रोजेक्ट (जो कि 90 फीसदी पूरा हो चुका था) पर चल रही सभी तरह की गतिविधीयों को न सिर्फ बंद करने का निर्णय लिया बल्कि उसे रद्द भी कर दिया था। इस कारण सरकार को हजारों करोड़ का घाटा भी सहना पड़ा, फिर भी मनमोहन सिंह जी आगे बढ़े और गंगाजी के हित में यह सब किया। इसके अतिरिक्त तत्कालीन सरकार ने आगे बढ़ते हुए गंगोत्री से लेकर उत्तरकाशी तक भगीरथी जी की धारा को ईको सेंसिटिव जोन घोषित किया। ताकि गंगाजी को नुकसान पहुंचा सकने वाली गतिविधियां फिर कभी न हों।

 

गंगा जी से लेना नहीं बल्कि हमारी तरफ़ से कुछ देना है:

मुझे आपसे उम्मीद थी कि आप गंगाजी के लिए दो कदम आगे बढ़ते हुए विशेष प्रयास करेंगे, क्योंकि आपने आगे आते हुए गंगा पर अलग से मंत्रालय बनाया था। लेकिन पिछले चार वर्षों में आपकी सरकार द्वारा किए गए सभी कार्य गंगाजी के लिए तो लाभकारी नहीं रहे, लेकिन उनके स्थान पर केवल कॉरपोरेट क्षेत्र और व्यावसायिक घरानों का लाभ देखने को मिला। अब तक आपने केवल गंगाजी से लाभ अर्जित करने के मुद्दे पर सोचा है। गंगाजी के संबंध में आपकी सभी परियोजनाओं से धारणा बनती है कि आप गंगाजी को कुछ भी नहीं दे रहे हैं। यहां तक कि महज बयान को तौर पर आप कह सकते हैं कि गंगाजी से कुछ लेना नहीं है लेकिन उन्हें हमारी तरफ से कुछ देना है।

 

गंगा जी का मुद्दा है प्राथमिकता वाला:

G.D. Agarwal's Third and Final Letter to PM Modi on Saving the Ganga

3.08.2018 को केंद्रीय मंत्री साध्वी उमा भारती जी मुझसे मिलने आईं थी। उन्होंने फोन पर नितिन गडकरी जी से मेरी बात कराई, लेकिन प्रतिक्रिया की उम्मीद आपसे है। इसीलिए मैंने सुश्री उमा भारती जी को कोई जवाब नहीं दिया। मेरा यह अनुरोध है कि आप निम्मलिखित चार वांछित आवश्यकताओं को स्वीकार करें जो मेरे 13 जून 2018 को आपको लिखे गए पत्र में सूचीबद्ध है। यदि आप असफल रहे तो मैं अनशन जारी रखते हुए अपना जीवन त्याग दूंगा। मुझे अपना जीवन त्यागने में कोई हिचक नहीं होगी, क्योंकि गंगाजी का मुद्दा मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण और अत्यंत प्रथमिकता वाला है।

 

उमा जी के ज़रिए भेज रहा हूँ यह चिट्ठी:

मैं आईआईटी में प्रोफेसर, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का सदस्य होने साथ गंगाजी पर बने सरकारी संगठनों का सदस्य रहा हूं। इन संस्थाओं का हिस्सा होने के चलते इतने सालों से अर्जित अपने अनुभव के आधार पर मैं कह सकता हूं कि आपकी सरकार के चार सालों में गंगाजी को बचाने की दिशा में किए गए एक भी कार्य को फलदायक नहीं कहा जा सकता है। मेरा आपसे अनुरोध है, मैं दोहराता हूं। कि निम्नलिखित आवश्यक कार्यों को स्वीकार किया जाए और क्रियान्वित किया जाए। मैं यह चिट्ठी उमाजी के जरिए भेज रहा हूं।

 

आवश्यक कार्यों के लिए मेरे चार अनुरोध इस प्रकार हैं:

*- साल 2012 में हुए गंगा महासभा द्वारा तैयार किया गया मसौदा विधेयक तत्काल संसद में लाया जाए और पास कराया जाए (इस मसौदे को तैयार करने वाली कमेटी में मै, एडवोकेट एमसी मेहता और डॉ परितोष त्यागी शामिल थे)। यदि ये नहीं हो पाए तो इस मसौदा विधेयक के चैप्टर 1 (अनुच्छेद 1 से अनुच्छेद 9) पर अध्याधेश लाकर तत्काल राष्ट्रपति से मंजूरी दिलाते हुए लागू किया जाए।

 

*- उपर्युक्त कार्य के हिस्से के रूप में अलकनंदा, धौलीगंगा, नंदाकिनी, पिंडर और मंदाकिनी पर निर्माणाधीन सभी पनबिजली परियोजनाओं को रद्द किया जाए। इसके साथ ही गंगाजी और उनके पोषित करने वाली सभी धाराओं पर बनने वाले सभी प्रस्तावित पनबिजली परियोजनाओं को भी रद्द किया जाए।

 

G.D. Agarwal's Third and Final Letter to PM Modi on Saving the Ganga

 

*- मसौदा विधेयक के अनुच्छेद 4(D)-1 वनों की कटाई, 4 (F) जीवित प्रजातियों की हत्या/प्रसंस्करण और 4(G) सभी तरह की खनन गतिविधियों को पूरी तरह से रोका जाए और लागू किया जाए। इसे हरिद्वार कुम्भ क्षेत्र में विशेषकर लागू किया जाए।

 

*- जून 2019 तक गंगा भक्त परिषद का गठन किया जाए जिसमें आपके द्वारा नामित 20 सदस्य हों, जो गंगाजी के पानी में शपथ ले कि वे गंगाजी और केवल गंगाजी के अनुकूल हितों को लाभ पहुंचाने के हित में ही कार्य करेंगे और गंगाजी से संबंधित सभी कार्यों के संबंध में, इस परिषद की राय निर्णायक के रूप में ली जाएगी।

 

उन्होंने आगे अपने पत्र में लिखा कि, चूंकि मुझे 13 जून 2018 को आपको भेजे गए पत्र का उत्तर नहीं मिला, इसलिए मैं 22 जून 2018 से अपना अनशन शुरू किया है जैसा कि मैने इस पत्र में लिखा है। इस प्रकाश में यह पत्र आपकी जल्द से जल्द उचित कार्रवाई की उम्मीद के साथ आपका धन्यवाद।

आपका

स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद

(पूर्व में प्रो. जी.डी. अग्रवाल)


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