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गणेश चतुर्थी 2018: 13 सितम्बर को होगी गणपति स्थापना, जानिए मूर्ति स्थापना से जुड़े कुछ नियम

मूर्ति स्थापना के समय हो जाती हैं कुछ ग़लतियाँ

ganesh chaturthi 2018 13 September
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हिंदू धर्म में देवी-देवताओं की पूजा-पाठ का ख़ास महत्व माना गया है। इस्लाम में भी पूजा तो होती है, लेकिन वो मूर्ति पूजा को महत्व नहीं देते हैं। लेकिन हिंदू धर्म में ऐस नहीं होता है। इसमें देवी-देवताओं की पूजा का महत्व मूर्ति के साथ ही होता है। हिंदू धर्म के अनुसार 33 करोड़ देवी-देवता हैं। लेकिन इनमें से कुछ ही देवी-देवता हैं, जिनकी हर जगह समान रूप से पूजा की जाती है। कुछ देवी-देवता तो ऐसे भी हैं, जिनकी केवल भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी पूजा की जाती है।

 

किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले होती है श्री गणेश की पूजा:

ganesh chaturthi 2018 13 September
ganesh chaturthi

हिंदू धर्म में प्रथम पूज्य के रूप में श्री गणेश को माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि बिना श्री गणेश की पूजा किए किसी पूजा की शुरुआत करने पर उसका फल नहीं मिलता है। कोई भी शुभ कार्य शुरू करने से पहले भी श्री गणेश की ही पूजा की जाती है। गणेश जी के प्रथम पूज्य बनने के पीछे एक कहानी है। धार्मिक कथाओं के अनुसार एक बार भगवान शिव और माता पार्वती ने अपने दोनो पुत्र कार्तिकेय और गणेश के सामने यह शर्त रखी कि कौन सबसे पहले इस दुनिया का चक्कर लगाकर आ सकता है। दोनो ने शर्त मान ली।

 

दिया श्री गणेश को प्रथम पूज्य देवता का वरदान:

 

कार्तिकेय के पास मोर था, जिसपर वह बैठकर दुनिया का चक्कर लगाने के लिए उड़ गए। लेकिन गणेश जी के पास चूहा था, जिसपर वह बैठकर कार्तिकेय से पहले दुनिया का चक्कर नहीं लगा पाते। इसी वजह से उन्होंने अपने माता-पिता के चरो तरफ़ चक्कर लगाना शुरू किया। यह देखकर जब भगवान शिव और माता पार्वती ने गणेश जी से पूछा कि क्या कर रहे हो तो उन्होंने कहा कि आप दोनों की मेरी दुनिया हैं। इसी वजह से मैं आप दोनो के चक्कर लगा रहा हूँ। यह सुनकर दोनो प्रसन्न हो गए और श्रीगनेश को प्रथम पूज्य देवता का वरदान दिया।

 

मूर्ति स्थापना के समय हो जाती हैं कुछ ग़लतियाँ:

ganesh chaturthi 2018 13 September
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इस बार 13 सितम्बर को गणेश चतुर्थी पड़ रही है। गणेश चतुर्थी के दिन कई घरों और ऑफ़िस में गणपति की स्थापना होती है। बार श्री गणेश की स्थापना करते समय लोगों से अनजानें में कई ग़लतियाँ हो जाती हैं। वास्तु के अनुसार श्री गणेश की प्रतिमा ग़लत दिशा में स्थापित हो जाती है। इसकी वजह से पूजा का फल नहीं मिल पाता है। इसके साथ ही पूजा का उल्टा दोष भी मिलता है। श्री गणेश की स्थापना से पूर्व दिशा और शुद्धता का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी होता है। श्री गणेश की प्रतिमा स्थापित करने से पहले इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि गणेश जी की पीठ किस दिशा में होनी चाहिए। आज हम आपको श्री गणेश की प्रतिमा स्थापित करने के कुछ नियमों के बारे में बताने जा रहे हैं।

 

श्री गणेश की प्रतिमा स्थापित करने से पहले रखें इन बातों का ध्यान:

*- श्री गणेश को स्थापित करने के लिए ब्रह्म स्थान, पूर्व दिशा और उत्तर-पूर्व दिशा को शुभ माना जाता है। लेकिन भूलकर भी श्री गणेश को दक्षिण-पश्चिम कोण यानी नैतृत्य में नहीं स्थापित करना चाहिए।

*- भूलकर भी श्री गणेश की दो प्रतिमा को घर या ऑफ़िस में स्थापित में एक ही स्थान पर नहीं करना चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार ऐस करने से ऊर्जा का आपस में टकराव होता है और शुभ फल मिलने की बजाय अशुभ फल मिलता है। अगर आपके पास एक से ज़्यादा श्री गणेश की मूर्ति हो तो दोनों को अलग-अलग स्थानों पर रखें।

ganesh chaturthi 2018 13 September
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*- श्री गणेश को मंगलकारी देवता माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि श्री गणेश के मुख की तरफ़ समृद्धि, सिद्धि, सुख और सौभाग्य होता है। वहीं श्री गणेश के पिछले भाग में दुःख और दरिद्रता होती है। इसलिए हर समय इस बात का ध्यान रखें कि जब भी श्री गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाए तो उनका मुख दरवाज़े की तरफ़ ना हो। श्री गणेश की प्रतिमा का मुख हमेशा घर में अंदर की तरफ़ हो।

*- घर में श्री गणेश की बायीं तरफ़ सूँड़ वाली मूर्ति को रखना शुभ माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि ऐसी मूर्ति की पूजा से जल्दी शुभ फल की प्राप्ति होती है। जबकि दायीं तरफ़ सूँड़ वाली गणेश जी की प्रतिमा की पूजा करने से देर से फल मिलता है, क्योंकि ये देर से प्रसन्न होते हैं।

*- श्री गणेश की प्रतिमा स्थापित करते समय यह ध्यान दें कि उनकी पीठ के पीछे दीवार होनी चाहिए। प्रतिमा के पीछे ख़ाली जगह रखना अशुभ माना जाता है।

 

 


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