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गूगल ने बनाया मीना कुमारी का डूडल, जन्मदिन के मौक़े पर जानिए मीना कुमारी की कुछ ख़ास बातें

जन्म के बाद पिता ने छोड़ दिया था अनाथालय के बाहर

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बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री मीना कुमारी के बारे में किसी को कुछ बताने की ज़रूरत नहीं है। आज मीना कुमारी की 85वीं जयंती है। फ़िल्मी दुनिया में इन्हें मीना कुमारी के नाम से जाना जाता था, लेकिन इनका असली नाम महजबीन बेगम था। इनका जन्म 1 अगस्त 1931 को हुआ था। हिंदी सिनेमा की सबसे बेहतरीन अभिनेत्रियों की जहाँ बात की जाती है तो मीना कुमारी का नाम सबसे पहले आता है। मीना कुमारी ने बॉलीवुड में लगभग 30 सालों का लम्बा सफ़र तय किया। इस दौरान इन्होंने 90 से ज़्यादा फ़िल्मों में अभिनय किया था।

जन्म से लेकर मृत्यु तक किया मुसीबतों का सामना:

आज मीना कुमारी की कई फ़िल्मों को उनके चाहने वाले सद्भाव से देखते हैं। मीना कुमारी के फ़िल्मी जीवन के बारे में तो सभी लोग जानते हैं, लेकिन मीना कुमारी का जीवन बहुत ही संघर्षों से बार हुआ था। फ़िल्मों में अपने दमदार अभिनय के दम पर यह दर्शकों की आँखों में आँसू ला देती थीं, इसी वजह से इन्हें ट्रेजेडी क्वीन के नाम से जाना जाने लगा। इन्होंने अपने जन्म से लेकर मृत्यु तक कई मुसीबतों का सामना किया था। इस वजह से इनके ऊपर ट्रेजेडी क्वीन का ये टैग बिलकुल सही लगता है।

 

31 मार्च 1972 को अलविदा कह दिया इस दुनिया को:

साल 1962 में आयी फ़िल्म साहेब, बीबी और ग़ुलाम में इन्होंने छोटी बहु का किरदार निभाया था। उसी किरदार की तरह इनकी असली ज़िंदगी भी हो गयी थी इन्होंने अपने असली जीवन में काफ़ी शराब पीना शुरू कर दिया। इनकी शादी असफल रही थी और इनके पिता से भी अच्छे सम्बंध नहीं थे। इस वजह से इन्होंने शराब का सेवन और भी ज़्यादा शुरू कर दिया था। इनकी तबियत ख़राब होती चली गयी और अंत में 31 मार्च 1972 को लिवर सिरोसिस की वजह से इनकी मौत हो गयी।

 

जन्म के बाद पिता ने छोड़ दिया था अनाथालय के बाहर:

Meena Kumari

मीना कुमारी इक़बाल बेगम और अली बक्श की तीसरी बेटी थीं। इनकी दो बड़ी बहने इरशाद और मधु थीं। मीना कुमारी के बारे में कहा जाता है कि जब इनका जन्म हुआ था तो इनके पिता के पास डॉक्टर की फ़ीस चुकाने के पैसे नहीं थे। इसके बाद माता-पिता ने यह निर्णय लिया कि मीना कुमारी को किसी मुस्लिम अनाथालय के बाहर छोड़ देंगे और उन्होंने ऐसा किया भी। लेकिन उनका मन नहीं माना और मासूम बच्ची को पुनः घर वापस ले आए। जानकारी के अनुसार मीना कुमारी के पिता एक पारसी थिएटर में हरमोनीययम बजाने का काम करते थे।

 

7 साल की उम्र में ही शुरू कर दिया फ़िल्मों में काम करना:

इनके पिता अली बक्श ईद का चाँद जैसी कुछ छोटे बजट की फ़िल्मों में अभिनय और शाही लुटेरे जैसी फ़िल्म में संगीत भी दिया था। मीना कुमारी स्कूल जाना चाहती थीं, लेकिन पिता ने उन्हें बचपन में ही फ़िल्मी दुनिया में धकेल दिया। मीना कुमारी ने कहा था कि मुझे फ़िल्मों में काम नहीं करना है, मुझे स्कूल जाना है लेकिन पिता ने उनकी एक ना सुनी और केवल 7 साल की उम्र में इन्हें फ़िल्मों में काम करना पड़ा। तभी से महजबीन बेगम के मीना कुमारी बनने का सफ़र शुरू हो गया था। मीना कुमारी की पहली फ़िल्म 1939 में ‘फरजंद-ए-वतन’ रिलीज़ हुई थी।बड़ी होने के बाद इन्होंने 1949 में पहली बार मीना कुमारी नाम से वीर घटोत्कच फ़िल्म में काम किया था।

 

साहब, बीबी और ग़ुलाम के लिए मिला बेस्ट एक्ट्रेस का फ़िल्म फ़ेयर अवार्ड:

Meena Kumari

 

1952 में बैजू बावरा से मीना कुमारी को बॉलीवुड में एक हीरोइन के तौर पर पहचान मिली। इसके बाद इन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और 1953 में परिणिता, 1955 ए आज़ाद, 1956 में एक ही रास्ता, 1957 में मिस मैरी और शारदा, 1960 में कोहिनूर और दिल अपना और प्रीत पराई में काम किया। 1962 में रिलीज़ हुई साहेब, बीबी और ग़ुलाम से इन्हें बॉलीवुड में एक ख़ास पहचान मिली। इस फ़िल्म के लिए उन्हें बेस्ट एक्ट्रेस का फ़िल्म फ़ेयर अवार्ड भी दिया गया। 1963 में दिल एक मंदिर, 1965 में काजल और 1966 में आयी फूल और पत्थर उनकी बेहतरीन फ़िल्मों में से है।

 

मीना कुमारी की मौत के बाद सुपरहिट हुई पाकीज़ा:

शराब की वजह से 1968 में मीना कुमारी की तबियत बहुत ज़्यादा ख़राब हो गयी। इलाज के लिए इन्हें लंदन और स्विट्ज़रलैंड जाना पड़ा। जब ठीक होकर वापस आयीं तो इन्होंने कैरेक्टर रोल करने शुरू कर दिए। मीना कुमारी की आख़िरी फ़िल्म पाकीज़ा थी जो 1972 में रिलीज़ हुई थी। शुरुआत में यह फ़िल्म ज़्यादा चली नहीं, लेकिन 31 मार्च 1972 में अचानक मीना कुमारी की मौत के बाद यह फ़िल्म जमकर चली और सुपरहिट हुई। मीना कुमारी एक अच्छी अभिनेत्री के साथ-साथ एक बेहतरीन उर्दू शायरा भी थीं। फ़िल्मी दुनिया में इतना नाम कमाने के बाद अपने आख़िरी समय में मीना कुमारी फिर से उसी हालत में पहुँच गयी थी, जिसमें उनके जन्म के समय उनके पिता थे।


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