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रुपए की हालत सुधारने के लिए सरकार ने उठाया यह क़दम, लगेगी ग़ैर ज़रूरी आयात पर रोक

अमेरिका में लिए गए हैं कुछ नीतिगत फ़ैसले इसलिए डॉलर हुआ महँगा

Prime Minister Narendra Modi (R) listens to Finance Minister Arun Jaitley during the Global Business Summit in New Delhi January 16, 2015. REUTERS/Anindito Mukherjee/Files
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लगातार गिरते रुपए ने सराकर की मुसीबतों को काफ़ी बढ़ा दिया है। इससे बचने के लिए सरकार ने विदेशों से क़र्ज़ लेने के नियमों में ढील देने और ग़ैर ज़रूरी आयतों पर पाबंदी लगाने का निर्णय लिया है। बता दें शुक्रवार को अर्थव्यवस्था की सेहत समीक्षा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। इस बैठक में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संवाददाताओं से कहा कि प्रधानमंत्री को रिज़र्व बैंक के गवर्नर ऊर्जित पटेल और वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने स्थिति की जानकारी दी।

समाधान के लिए सरकार उठाएगी ज़रूरी क़दम:

जेटली ने आगे कहा कि सरकार के इन निर्णय का मक़सद चालू खाते के घाटे (कैड) पर रोक लगाना है तथा विदेशी मुद्रा प्रवाह को भी बढ़ाना है। जेटली ने आगे कहा कि इसके साथ ही सरकार ने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए ग़ैर ज़रूरी आयतों पर अंकुश लगाने का भी फ़ैसला किया है। हालाँकि जेटली ने अपने सम्बोधन के दौरान साफ़ तौर पर यह नहीं कहा कि किन चीज़ों के आयात पर प्रतिबंध लगेगा। जेटली ने कहा, बढ़ते कैड के मामले के समाधान के लिए सरकार ज़रूरी क़दम उठाएगी। इसके तहत ग़ैर ज़रूरी आयात में कटौती तथा निर्यात बढ़ाने के उपाय किए जाएँगे।

अमेरिका में लिए गए हैं कुछ नीतिगत फ़ैसले इसलिए डॉलर हुआ महँगा:

जेटली ने आगे कहा कि, जिन चीज़ों के आयात पर अंकुश लगाया जाएगा, उसके बारे में निर्णय सम्बंधित मंत्रालयों से विचार-विमर्श के बाद ही किया जाएगा। वह विश्व व्यापार संगठन के नियमों के ही अनुरूप होगा। देश की अर्थव्यवस्था पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई समीक्षा के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर बहुत ज़्यादा है। दूसरे देशों की अपेक्षा भारत में महँगाई क़ाबू में है। तेल की क़ीमतों में बढ़ोतरी और डॉलर के मुक़ाबले लगातार गिरते रुपए पर अरुण जेटली ने कहा कि, अमेरिका में कुछ नीतिगत फ़ैसले लिए गए हैं, जिसकी वजह से डॉलर मज़बूत हुआ है।

पेट्रोल और डीज़ल के दाम भी बढ़ गए बहुत ज़्यादा:

अन्तर्राष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमत बढ़ी है। इस सबका प्रभाव हमारी अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें इस बैठक में रिज़र्व बैंक के गवर्नर और वित्त मंत्री अरुण जेटली के साथ ही वित्त मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारी भी मौजूद थे। बता दें अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले भारतीय रुपए 12 सितम्बर को 72.91 के स्तर पर रहा। घरेलू मुद्रा अगस्त से लेकर अब तक लगभग 6 प्रतिशत तक टूटी है। पेट्रोल और डीज़ल के दाम भी बहुत ज़्यादा बढ़ गए हैं।

अभी भारत के पास है काफ़ी विदेशी मुद्रा भंडार:

वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार संजीव सान्याल ने शुक्रवार को कहा कि रिज़र्व बैंक को रुपए की गिरावट को थामने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि इस परिस्थिति से निपटने के लिए अभी उनके पास पर्याप्त उपाय बचे हुए हैं। उन्होंने रिज़र्व बैंक द्वारा स्थिति पर लगातार नज़र रखने की बात स्वीकारते हुए कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था 400 अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा भंडार के साथ मज़बूत स्थिति में है। सान्याल ने आगे कहा कि, हमारे पास अभी काफ़ी विदेशी मुद्रा भंडार है। हमारे पास लगभग 400 अरब डॉलर है।

फ़िलहाल मुद्रास्फीति है बेहतर स्थिति में:

सान्याल ने आगे बताया कि वृहद आर्थिक मोर्चे पर मुद्रास्फीति तथा अन्य दिक्कतें नहीं है। अभी हम ऐसी स्थिति में हैं कि रुपए को गिरने दिया जा सकता है। सान्याल ने कहा कि कई उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं ने व्यापार युद्ध को देखते हुए अपनी मुद्राओं को गिरने दिया है। सवाल यह उठता है कि इसे रोकने के लिए हमें तुरंत ब्याज दर को बढ़ा देना चाहिए। मेरा मानना है कि यह इस समय ज़रूरी नहीं होगा। मेरे हिसाब से यह अनावश्यक है, क्योंकि ब्याज दर की जहाँ तक बात है, मौद्रिक नीति समिति की पहली चिंता मुद्रास्फीति है और फ़िलहाल बेहतर स्थिति में है।


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