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बिहार में अब हाजीपुर शेल्टर होम में लड़कियों के साथ यौन दुर्व्यवहार

ज़िलाधिकारी ने जाँच के लिए गठित की पाँच लोगों की टीम

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मुज़फ़्फ़रपुर कांड को अभी ज़्यादा दिन नहीं हुए कि एक-एक करके कई कांड सामने आ गए हैं। अब ख़बर आ रही है कि बिहार की राजधानी पटना के पास स्थित हाजीपुर शेल्टर होम में बच्चियों के साथ छेड़खानी और मारपीट की घटना हुई है। इसके आरोप में हाजीपुर के ज़िला परियोजना प्रबंधक मनमोहन प्रसाद को गिरफ़्तार कर लिया गया है। जानकारी के अनुसार मनमोहन प्रसाद के साथ ही अल्पावास गृह की प्रबंधक करना कुमारी सहित कुल पाँच लोगों के ख़िलाफ़ पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदम दर्ज किया गया है।

 

खड़ी होने वाली है नीतीश कुमार सरकार के लिए मुसीबत:

hajipur shelter home

आपको बता दें शेल्टर होम में रहने वाली लड़कियों ने यौन दुर्व्यवहार के आरोप लगाए हैं। बिहार में लगातार हो रही इस तरह की घटनाओं से नीतीश सरकार के सामने यक़ीनन बड़ी मुसीबत खड़ी होने वाली है। बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर के शेल्टर होम में 34 लड़कियों के साथ यौन उत्पीड़न की घटना सामने आने के बाद पूरा देश सकते में आ गया था। लोगों को यक़ीन नहीं हो रहा था कि शेल्टर होम में रहने वाली लड़कियों के साथ भी ऐसा कुछ हो सकता है। इस घटना के मुख्य आरोपी ब्रजेश सिंह को पुलिस ने गिरफ़्तार करके जेल भेज दिया। बताया जा रहा है कि ब्रजेश सिंह पहले एक पत्रकार था और उसके राजनेताओं से अच्छे सम्बंध भी हैं।

 

ज़िलाधिकारी ने जाँच के लिए गठित की पाँच लोगों की टीम:

बिहार की राजधानी पटना से नज़दीक हाजीपुर में निदान संस्था की तरफ़ से संचालित अल्पावास में रहने वाली बच्चियों ने महिला विकास निगम के ज़िला परियोजना प्रबंधक पर यौन दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है। इसके साथ ही लड़कियों ने मारपीट का भी आरोप लगाया है। जानकारी के अनुसार पिछले महीने ही सरकार के आदेश के बाद हाजीपुर अल्पावास गृह में रहने वाली लड़कियों को समस्तीपुर अल्पावास गृह में शिफ़्ट किया जाना था। लेकिन इसी दौरान वहाँ रहने वाली लड़कियों ने ज़िला परियोजना प्रबंधक पर कई गम्भीर आरोप लगाए। इसके बाद हाजीपुर के ज़िलाधिकारी ने इन आरोपों की जाँच करने के लिए पाँच लोगों की एक टीम गठित की।

 

मनमोहन प्रसाद गिरफ़्तार, अन्य आरोपी फ़रार:

आपको जानकर हैरानी होगी कि ज़िलाधिकारी द्वारा गठित टीम ने जब जाँच की तो सभी आरोप सही पाए गए। इसके बाद ज़िलाधिकारी के आदेश के बाद हाजीपुर अल्पावास गृह में संवासिनों के साथ यौन दुर्व्यवहार के मामले में पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदम दर्ज किया गया। लड़कियों से दुर्व्यवहार और मारपीट करने के आरोप में मनमोहन प्रसाद और इस घटना की जानकारी होने के बाद भी लापरवाही बरतने के आरोप में अल्पावास गृह की प्रबंधक करुणा कुमारी, प्रियंका कुमारी, अमन कुमार और कार्तिकेय कुमार पर मामला दर्ज किया गया है। इनमे से अभी तक केवल मनमोहन प्रसाद को ही गिरफ़्तार किया गया है। बाक़ी अन्य आरोपी अभी फ़रार हैं।

 

लड़कियों के साथ करते थे अश्लील हरकत:

मिली जानकारी के अनुसार बीते 20 जुलाई को हाजीपुर के अल्पावास गृह में रहने वाली लड़कियों ने मनमोहन प्रसाद के ऊपर यौन उत्पीड़न और मारपीट का आरोप लगाया था। लड़कियों का आरोप था कि जाँच के नाम पर अक्सर ही मनमोहन प्रसाद अल्पावास गृह में आकर लड़कियों के साथ अश्लील हरकत करते थे। केवल यही नहीं मनमोहन प्रसाद लड़कियों को धमकी भी देते थे कि अगर इसके बारे में किसी को बताया गया तो उसे जान से मार दिया जाएगा। पीड़ित लड़कियों ने यह भी आरोप लगाया है कि अधिकारी अकेले ही कमरे में आ जाते थे और हाथ-पैर दबाने के लिए दबाव डालते थे। इसके बाद वो लड़कियों के साथ अश्लील हरकत भी करते थे।

 

छेड़खानी करने से मना करने पर फाड़ दिया कपड़ा:

एक लड़की ने यह भी दावा किया था कि छेड़खानी से माना करने पर ज़िला परियोजना प्रबंधक ने उसके कपड़े भी फाड़ दिए थे। बिहार में लगातार घट रही इन घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि सुशासन के नाम पर नीतीश कुमार की सरकार में पिछले कई सालों से यही हो रहा है। इधर नरेंद्र मोदी देश में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की बात करते है, वहीं उनके सहयोगी नीतीश की सरकार में यह सब हो रहा है। पहले मुज़फ़्फ़रपुर शेल्टर होम का ख़ुलासा हुआ। इस ख़ुलासे के बाद यह तीसरा ख़ुलासा है, जिसने जनता को हैरानी में डाल दिया है। इस तरह की घटनाएँ बताती हैं कि नीतीश कुमार की सरकार में भी बिहार वैसे का वैसा ही है, जैसे पहले हुआ करता था।

 

समाज सेवा के नाम पर कर रहे हैं खिलवाड़:

समाज सेवा के नाम पर काम करने वाले ये एनजीओ किस तरह से समाज को अंदर ही अंदर खोखला कर रहे हैं, इसके बारे में किसी को बताने की ज़रूरत नहीं है। बिहार में एक के बाद एक तीनों घटनाओं का सम्बंध एनजीओ से ही है। एनजीओ जहाँ समाज की भलाई के लिए काम करने के लिए बनाए जाते हैं, वहीं अब एनजीओ किस तरह के कामों में संलिप्त हैं, यह सभी लोग जान चुके हैं। हालाँकि आज भी कई ऐसे एनजीओ हैं जो सही मायनों में जनता की भलाई के लिए काम करते हैं, लेकिन ऐसा बहुत कम ही देखने को मिलता है। आज एनजीओ लोगों के लिए कमाई का सबसे अच्छा ज़रिया बन गया है। एनजीओ की आड़ में ग़लत धंधे होते हैं और लोगों को इसपर शक भी नहीं होता है।

 


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