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हिंदी दिवस विशेष: अ, आ, इ, ई के दीवाने हो गए थे बिल गेट्स, जानिए पूरी कहानी

देवनागरी लिपि मानी जाती है दुनिया की सर्वश्रेष्ठ लिपि

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भारत में कई तरह की कहावतें कहीं जाती हैं। इसमें से ही एक सबसे प्रसिद्ध कहावत है कि, देश में चार कोस पर वाणी यानी भाषा बदल जाती है। इस हिसाब से देखा जाए तो हिंदी में ही देश को एक सूत्र में बांधे रखने की क्षमता है। हिंदी भाषा के बारे में कहा जाता है कि यह देश में एकता का मंत्र है। गुजरात में जन्म लिए आर्यसमज के प्रवर्तक महर्षि दयानंद ने अपनी रचना सत्यार्थ प्रकाश को हिंदी में लिखा और इस बात का उद्घोष किया कि आज़ादी की लड़ाई में हिंदी की भूमिका ज़बरदस्त रही है।

 

रोज़गारपरक होना है सबसे बड़ी ख़ूबी:

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बता दें आज़ादी के समय हिंदी भाषा को ही शक्ति समझा गया। आज़ादी के समय महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, रविंद्रनाथ टैगोर, बाल गंगाधर तिलक, चक्रवर्ती राजगोपालाचार्य और लाला लाजपत राय जैसे महापुरुषों ने अपनी मातृ भाषा हिंदी ना होने के बाद भी देश की जनता को जगाने के लिए हिंदी भाषा का ही इस्तेमाल किया। 21वीं सदी में हिंदी ने नए ऊँचाई को छुआ और नए-नए आयाम भी गढ़े हैं। 21वीं सदी में हिंदी का रोज़गारपरक होना इसकी सबसे बड़ी ख़ूबी है। आज केवल अंग्रेज़ी ही रोज़गारके लिए ज़रूरी नहीं है, हिंदी भी महत्वपूर्ण हैं। भूमंडलीकरण और बाज़ारीकरण के इस युग में हिंदी एक ज़रूरत बन गयी है।

 

देवनागरी लिपि मानी जाती है दुनिया की सर्वश्रेष्ठ लिपि:

हिंदी की वजह से ही देश के लाखों-करोड़ों युवाओं को रोज़गार मिला हुआ है। हिंदी की प्रासंगिकता और उपयोगिता ने हिंदी में अनुवाद कार्य का मार्ग भी प्रशस्त किया है। इसकी वजह से हिंदी बाज़ार और रोज़गार से जुड़ी हुई मानी जाती है। हालाँकि आज भी कई लोग ऐसे हैं जो हिंदी को हीन भावना से देखते हैं और अंग्रेज़ी और अन्य विदेशी भाषाओं को कूल समझते हैं। जबकि आज के समय में हिंदी एक कूल भाषा मानी जाती है। आपको जानकर हैरानी होगी कि हिंदी की देवनागरी लिपि को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ लिपि मानी जाती है।

 

दस सबसे शक्तिशाली भाषाओं में से एक है हिंदी:

माइक्रोसॉफ़्ट के संस्थापक विल गेट्स भी हिंदी के दीवाने रह चुके हैं। गेट्स ने एक बार अपने बयान में कहा था कि जब बोलकर लिखने की तकनीकी उन्नत हो जाएगी, उस समय हिंदी अपनी लिपि की श्रेष्ठता की वजह से सबसे सफल भाषा होगी। उनकी कही गयी बात को आज सच साबित होते हुए देखा जा सकता है। आज सोशल मीडिया के युग में हिंदी को सबसे ज़्यादा महत्व दिया जानें लगा है। जबकि कुछ समय पहले ऐस नहीं था। विश्व आर्थिक मंच की गणना के अनुसार विश्व की दस सबसे शक्तिशाली भाषाओं में से हिंदी भी एक है।

 

अफगानिस्तान में भी लोग बोलते और समझते हैं हिंदी:

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आपको यह जानकर काफ़ी आश्चर्य होगा कि हिंदी केवल अंग्रेज़ी से ही नहीं बल्कि मैंडरिन से भी आगे है। चीन की भाषा मैंडरिन को पूरे चीन में भी नहीं बोला जाता है। जो भाषा बीजिंग में बोली जाती है, वह संघाई में बोली जानें वाली भाषा से अलग है। संख्या के लिहाज़ से देखा जाए तो दुनियाभर में जितने भी लोग अंग्रेज़ी बोलते हैं, उससे कहीं ज़्यादा लोग भारत में अकेले हिंदी बोलते हैं।हिंदी पूरे पाकिस्तान में बोली जाती है। बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, अफगानिस्तान में भी हज़ारों लोग हिंदी बोलते और समझते हैं।

 

अंग्रेज़ी को लगे हुए हैं सर्वश्रेष्ठ भाषा साबित करने में:

केवल यही नहीं फ़िजी, गुयाना, सुरिनाम, त्रिनिदाद जैसे देश तो हिंदी भाषी लोगों द्वारा ही बसाया गया है। इस हिसाब से देखा जाए तो हिंदी बोलने वाले लोगों का आँकड़ा लगभग 1 अरब का है। लेकिन यह दुर्भाग्य ही है कि दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी भाषा होने के बाद भी अब तक संयुक्त राष्ट्र संघ में हिंदी को भाषा के तौर पर शामिल नहीं किया गया है। हिंदी के पास भाषिक क्षमता इतनी ज़्यादा है कि यह आसानी से पूरे विश्व की भाषा बन सकती है। दुनिया के कुछ ताक़तवर देशों ने अंग्रेज़ी के प्रचार की कमान सम्भाल रखी है। ये लोग हर समय अंग्रेज़ी को विश्व की सबसे सर्वश्रेष्ठ भाषा स्थापित करने में जुटे हुए हैं।

 

हर साल 14 सितम्बर को मनाया जाता है हिंदी दिवस:

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स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ही हिंदी को लेकर चिंता और चिंतन दोनो शुरू हो गया था। 1917 में महात्मा गांधी ने गुजरात के भरुच में सबसे पहले राष्ट्रभाषा के रूप में हिंदी को मान्यता प्रदान की थी। इसके बाद 14 सितम्बर 1949 को देश की संविधान सभा से सर्वसम्मति से हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिए जानें का फ़ैसला किया। आज़ादी के बाद यानी 1950 में संविधान के अनुच्छेद 343 (1) के तहत हिंदी को देवनागरी लिपि में राजभाषा का दर्जा दिया गया। पहली बार हिंदी दिवस 14 सितम्बर 1953 को मनाया गया था। उसके बाद से हर साल 14 सितम्बर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।

 

कई बार हो चुकी है भाषा को लेकर राजनीति:

भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन राजभाषा विभाग का गठन किया गया। राष्ट्रपति के आदेश द्वारा 1960 में आयोग की स्थापना के बाद 1963 में राजभाषा अधिनियम पारित हुआ था। उसके बाद 1968 में राजभाषा सम्बंधी प्रस्ताव पारित किया गया। पूरे देश में हिंदी के प्रचार-प्रसार में बॉलीवुड सिनेमा का बहुत बड़ा योगदान है। भारत में हिंदी जानने वाले देश के कोने-कोने में बसे हुए हैं। कई बार यहाँ भर भाषा को लेकर राजनीति भी हो जाती है।

 

 


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