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क्या आप जानते हैं क्यों सावन का महीना होता है शिवभक्तों के लिए ख़ास, जानें

पर्वतराज हिमालय के यहाँ पार्वती के रूप में जन्म लेती हैं सती

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सावन के महीने की महिमा का जितना गुणगान किया जाए कम है। सावन के महीने के बारे में कहा जाता है कि यह 12 महीनों में सबसे पवित्र महीना होता है। सावन का महीना भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना होता है। 28 जुलाई से सावन महीने की शुरुआत हो गयी है और 26 अगस्त को यह रक्षाबंधन के दिन ख़त्म होगा, सावन के महीने में शिवभक्तों की धूम देखी जा सकती है। शिवभक्त सावन के महीने में सैकड़ों किलोमीटर दूर तक पैदल चलकर भगवान शिव का अभिषेक करने जाते हैं। भगवान शिव भी उनकी सभी मनोकामनाओं को पूर्ण कर देते हैं।

 

पर्वतराज हिमालय के यहाँ पार्वती के रूप में जन्म लेती हैं सती:

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धर्मशास्त्रों में कहा गया है कि सावन का महीना भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना होता है। क्या आपने कभी इसपर विचार किया है कि आख़िर क्यों सावन का ही महीना भगवान शिव को सबसे प्रिय होता है। अगर आप नहीं जानते है तो आज हम आपको बताते हैं। दरअसल भगवान शिव की पत्नी सती जब हवन कुंड में ख़ुद को भस्म कर लेती हैं तो उनका दुबारा जन्म पर्वतराज हिमालय के यहाँ होता है। पर्वतराज हिमलयाय के यहाँ सती पार्वती के रूप में जन्म लेती हैं। वह भगवान शिव को पाने के लिए सावन के महीने में तप करती हैं।

 

पूरे एक महीने के लिए पृथ्वी पर आते हैं भगवान शिव:

पार्वती के तप से भगवान शिव इतने प्रसन्न होते हैं कि उनकी मनोकामना पूर्ण कर देते हैं और दोनो का विवाह हो जाता है। सती को दुबारा पार्वती के रूप में पाकर भगवान शिव को भी बहुत ज़्यादा ख़ुशी होती है। तभी से भगवान शिव को सावन का महीना प्रिय हो गया, क्योंकि इसी महीने में उन्हें सती दुबारा पार्वती के रूप में प्राप्त हुई थी। मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि भगवान शिव सावन के महीने में पूरे एक महीने के लिए कैलाश मानसरोवर को छोड़कर पृथ्वी पर आते हैं और अपने सभी भक्तों की मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं।

 

राक्षस राज रावण था भगवान शिव का सच्चा भक्त:

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सावन के महीने में जो भी भक्त भगवान शिव की सच्चे मन से आराधना करता है, भगवान शिव उसकी सभी मनोकामनाओं को पूर्ण कर देते हैं। भगवान शिव के बारे में कहा जाता है कि यह बहुत ही भोले हैं, तभी तो लोग इन्हें भोलेनाथ के नाम से जानते हैं। यह अपने भक्तों में कोई भेद-भाव नहीं करते हैं। इनका भक्त अगर राक्षस भी हो तो वह उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर उसे वरदान दे देते थे। इन्होंने कई राक्षसों को वरदान भी दिया था। राक्षस राज रावण भी भगवान शिव का सच्चा भक्त था। रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करके वरदान पाया था।

 

शिव की आराधना करने से होती है जीवन में आनंद की प्राप्ति:

सावन के महीने की महिमा के बारे में जितना भी बताया जाएगा कम ही होगा। सावन के महीने में महिलाएँ और कन्याएँ दोनो सोमवार के दिन भगवान शिव की आराधना करती हैं। कहा जाता है कि जो महिला सावन के महीने में सोमवार को भगवान शिव की आराधना और व्रत करती है उसे अखंड सौभाग्यवती का वरदान मिलता है, वहीं कन्याओं को सुखी जीवन के आशीर्वाद के साथ-साथ मनचाहे वर की प्राप्ति होती है। इसके वाला भगवान शिव की आराधना करने वाले पुरुषों के जीवन में आनंद की प्राप्ति होती है। भोलेनाथ लोगों का जीवन बदल देते हैं।

 

भगवान शिव कर देते हैं जीवन की सभी मनोकामनाओं को पूर्ण:

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सावन के महीने में भगवान शिव का अभिषेक करने की ख़ास मान्यता है। भगवान शिव केवल जल और बेलपत्र से ही ख़ुश हो जाते हैं और व्यक्ति का भाग्य चमका देते हैं। शिवपुराण के अनुसार केवल बेलपत्र ही नहीं बल्कि कई ऐसी चीज़ें भी हैं, जिन्हें अर्पित करने से भगवान शिव बहुत ज़्यादा प्रसन्न होते हैं और सुखी जीवन का आशीर्वाद देते हैं एवं सभी मनोकामनाएँ पूर्ण कर देते हैं। सावन के सोमवार को आप भी भगवान शिव को बेलपत्र, भांग और धतूरा सहित ये पाँच चीज़ें अर्पित करें फिर देखें चमत्कार, कैसे भगवान शिव आपका जीवन हमेशा के लिए बदल देते हैं।

 

 

भगवान शिव को सोमवार को अर्पित करें ये चीज़ें:

भांग:

भगवान शिव को भांग बहुत ही ज़्यादा प्रिय है। ज्योतिष मान्यता के अनुसार अगर भांग का पत्ता या भांग का शर्बत भगवान शिव को चढ़ाया जाए तो भगवान शिव बहुत ज़्यादा प्रसन्न होते हैं। तभी तो लोग शिवरात्रि के दिन भगवान शिव को भांग चढ़ाकर इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।

धतूरा:

भांग की तरह धतूरा भी भगवान शिव को बहुत ज़्यादा पसंद है। धतूरे का फल या फूल भगवान शिव को अर्पित करने से घर में धन-दौलत की कमी दूर हो सकती है।

आक:

आक अर्पित करने से भगवान शिव मानसिक और शारीरिक कष्ट दूर कर देते हैं और साथ ही व्यक्ति को दरिद्रता से भी मुक्ति मिलती है।

पीपल का पत्ता:

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार पीपल में सभी देवी-देवताओं के साथ तृदेवों का वास माना गया है। इसे भगवान शिव को अर्पित करने से सभी तरह के ग्रह दोषों से मुक्ति मिल जाती है।

दूर्वा:

दूर्वा के बारे में पुराणों में कहा गया है कि इसमें अमृत का वास होता है। यह भगवान शिव और उनके पुत्र श्रीगणेश को अत्यंत ही प्रिय है। इसी वजह से भगवान शिव के साथ ही श्रीगणेश को भी दूर्वा अर्पित किया जाता है। इसे भगवान शिव को अर्पित करने से अकाल मृत्यु और दुश्मन के भय से मुक्ति मिल जाती है।


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