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भारत ने तैयार की पहली बिना इंजन वाली ट्रेन, जानिए इसकी लागत और क्या है इसकी ख़ासियत

सभी ट्रेनों में लगायी जाती है अलग से पावर कार

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ट्रेन में सफ़र करने में बड़ा ही मज़ा आता है। आप लोगों ने भी ट्रेन का सफ़र किया होगा। ट्रेन के बारे में किसी को बताने की ज़रूरत नहीं है कि एक बहुत बड़ा इंजन रेल के कई डिब्बों को बड़ी आसानी से खींचता है। अब ज़रा सोचिए वो कितना मज़बूत इंजन होगा जो अपने पीछे 15-20 बड़े-बड़े लोगों से भरे हुए डिब्बों को खींचता होगा। सोचकर ही दिमाग़ चकरा जा रहा होगा। हालाँकि आज हम आपको इंजन की ताक़त या किसी और चीज़ के बारे में नहीं बताने जा रहे हैं। आज जो हम आपको बताएँगे, वह जानकर आप यक़ीनन हैरान हो जाएँगे।

 

लोकार्पण के बाद कुछ दूरी तक चली ट्रेन:

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आपने अब तक जो भी ट्रेन देखी होगी, उसमें एक बड़ा इंजन ज़रूर लगा रहता होगा। लेकिन अगर हम आपसे कहें कि अब बिना इंजन के ही ट्रेन रफ़्तार से पटरी पर भाग सकती है तो शायद आपको मेरी बातों पर यक़ीन ही ना हो। लेकिन जनाब यह पूरी तरह सच है। आपकी जानकारी के लिए बता दें सौ करोड़ की लागत से पूरी तरह भारत में विकसित, ऊर्जा बचाने वाली व बिना इंजन की ट्रेन का सोमवार को रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्विनी लोहानी ने लोकार्पण किया। बता दें लोहानी के हरी झंडी दिखाने के बाद सफ़ेद रंग की ये ट्रेन इंटिग्रल कोच फ़ैक्टरी (आईसीएफ़) में कुछ दूर तक चली।

 

सभी ट्रेनों में लगायी जाती है अलग से पावर कार:

अधिकारी दावा करते हैं कि ट्रेन-18 नमक यह रेलगाड़ी भारतीय रेलवे के लिए गेम चेंजर साबित होगी। 160 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ़्तार से चलने वाली यह रेलगाड़ी भविष्य में शताब्दी एक्सप्रेस का विकल्प बनेगी। आईसीएफ़ के महाप्रबंधक एस मणि ने बताया कि इस ट्रेन को आधी लागत में विकसित किया गया है। इसमें 16 कोच होंगे। इस रेलगाड़ी में 1128 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था होगी। इसमें अलग से पावर कार नहीं होगी। अब तक आपने जो भी ट्रेन देखी होगी, उसमें अलग से एक पावर कार लगायी जाती है।

 

ट्रेन का हर दूसरा कोच होगा मोटरयुक्त:

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बता दें हर दूसरा कोच मोटरयुक्त होगा, जिससे उसकी गति को तेज़ी से बढ़ाया और घटाया जा सकता है। इससे 20 प्रतिशत तक ऊर्जा भी बचेगी। यह ट्रेन बहुत कम मात्रा में कार्बन का भी उत्सर्जन करेगी। साधारणतया ऐसी ट्रेनों के विकास में 3-4 साल का समय लग जाता है, लेकिन भारत ने यह कारनामा केवल 18 महीनों में ही कर दिखाया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें ट्रेन में चालकों के लिए दोनो तरफ़ केबिन होंगे। इस वजह से ट्रेन को वापस मोड़ने में लगने वाले अतिरिक्त समय की बर्बादी से बचा जा सकता है।

 

ट्रेन में दरवाज़े होंगे ऑटोमेटिक:

बता दें पूरी तरह वातनुकूलित इस ट्रेन में यात्री सुविधाओं और सुरक्षा का भी भरपूर ध्यान रखा गया है। ड्राइवर सहित सभी कोचों में सीसीटीवी कैमरे भी लगे हुए हैं। एक्ज़ीक्यूटिव क्लास की सीटें घुमावदार हैं, जिन्हें ट्रेन की दिशा में सेट किया जा सकता है। ट्रेन मैनेजमेंट सिस्टम ड्राइवर की केबिन में होगा। इसके दरवाज़े पूरी तरह से ऑटोमेटिक होंगे। जब ट्रेन रुकेगी तभी ये दरवाज़े खुलेंगे और ट्रेन के चलने से पहले अपने आप ही बंद भी हो जाएँगे। हर कोच में संवाद इकाई भी होगी। इसके ज़रिए यात्री आपातकाल में क्रू के सदस्यों से आसानी से बात कर सकेंगे।

 

 


 

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