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अमेरिका की नाराज़गी के बाद भी ईरान से तेल का आयात जारी रखेगा भारत

अमेरिका ने दी थी दंडात्मक प्रतिबंध लगाने की चेतावनी

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दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका के बारे में किसी को बताने की ज़रूरत नहीं है। वह शक्तिशाली है, इसका अहसास वह समय-समय पर करवाता रहता है। कई बार अमेरिका को अपनी शक्तियों का ग़लत इस्तेमाल करते हुए भी देखा गया है। अमेरिका की तानाशाही वाली आदत धीरे-धीरे उभरकर सामने आ रही है। अमेरिका अपने से कमज़ोर देशों को धमकाने में बिलकुल भी पीछे नहीं हटता है। हाल ही में अमेरिका ने यह धमकी दी थी कि अगर कोई भी देश रूस के साथ किसी तरह के हथियारों का सौदा करता है तो वह उसके ऊपर प्रतिबंध लगा देगा।

 

दी थी दंडात्मक प्रतिबंध लगाने की चेतावनी:

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भारत में अमेरिका की चेतावनी के बाद भी रूस के साथ शुक्रवार को S-400 वायु रक्षा प्रणाली सौदे पर हस्ताक्षर किया। भारत ने अमेरिका की चेतावनी को नज़रअन्दाज़ करते हुए उसे आँख दिखाते हुए शुक्रवार को ना सिर्फ़ इस सौदे को हरी झंडी दिखाई, बल्कि ईरान के साथ तेल व्यापार को जारी रखने का भी संकेत दिया। ग़ौरतलब हो कि अमेरिका ने रूस के साथ किसी भी देश द्वारा S-400 वायु रक्षा प्रणाली सौदा करने पर उनके खिलाफ दंडात्मक प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी थी।

 

कर रहे हैं डॉलर की जगह रुपए में व्यापार करने की तैयारी:

जब भारत और रूस के बीच इस सौदे के हो जाने के बाद अमेरिका की तरफ से बयान जारी किया गया कि सीएएटीएसए मास्को को लक्षित है और इसके सहयोगी एवं साझेदार देशों की सैन्य क्षमताओं को नुकसान पहुंचाने का इरादा नहीं रखता है। भारत ने अमेरिकी पाबंदी के बावजूद ईरान से तेल व्यापार का पहला स्पष्ट संकेत दिया है। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों ने पश्चिम एशियाई देश से 12.5 लाख टन कच्चे तेल के आयात के लिये अनुबंध किया है और वे डॉलर की जगह रुपये में व्यापार की तैयारी कर रहे हैं।

 

प्रतिबंध मामले में किया जाएगा कुछ छूट देने का विचार:

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बता दें उद्योग जगत के शीर्ष सूत्र ने कहा कि इंडियन आयल कारपोरेशन (आईओसी) तथा मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोरसायन लि. (एमआरपीएल) ने नवंबर में ईरान से आयात के लिये 12.5 लाख टन तेल के लिये अनुबंध किया किया है। उसी माह से ईरान के तेल क्षेत्र पर पाबंदी शुरू होगी। अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने पिछले महीने कहा था कि प्रतिबंध के मामले में कुछ छूट देने पर विचार किया जाएगा लेकिन उन्होंने यह साफ किया कि यह सीमित अवधि के लिये होगी। दरअसल, अमेरिका ने चेतावनी दी थी कि रूस के साथ यह खास सौदा करने वाले राष्ट्रों के खिलाफ वह दंडात्मक प्रतिबंध लगाएगा।

 

रुपए का इस्तेमाल करता है औषधि और अन्य चीज़ों के आयात के लिए:

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सूत्रों के मुताबिक़ आईओसी ईरान से जो तेल आयात कर रहा है, वह सामान्य है। उसने 2018-19 में 90 लाख टन ईरानी तेल के आयात की योजना बनायी थी। मासिक आधार पर यह 7.5 लाख टन बैठता है। ईरान पर अमेरिकी पाबंदी चार नवंबर से शुरू होगी। सूत्रों ने कहा कि भारत और ईरान चार नवंबर के बाद रुपये में व्यापार पर चर्चा कर रहे हैं। एक सूत्र ने कहा, ‘ईरान तेल के लिये पूर्व में रुपये का भुगतान लेता रहा है। वह रुपये का उपयोग औषधि और अन्य चीज़ों के आयात में करता है। इस प्रकार की व्यवस्था पर काम जारी है।’

 

अगले साल साफ़ हो जाएगी भुगतान व्यवस्था की चीज़ें:

उसने आगे कहा कि अगले कुछ सप्ताह भुगतान व्यवस्था पर चीजें साफ हो जाएगी। सूत्रों के अनुसार आईओसी और एमआरपीएल जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की तेल रिफाइनरी कंपनियां तेल आयात के लिये ईरान को भुगतान को लेकर यूको बैंक या आईडीबीआई बैंक का उपयोग कर सकती हैं। भारत की ईरान से करीब 2.5 करोड़ टन कच्चे तेल के आयात की योजना है जो 2017-18 में आयातित 2.26 करोड़ टन से अधिक है। हालांकि वास्तविक मात्रा कम हो सकती है, क्योंकि रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियां पूरी तरह तेल खरीद बंद कर चुकी हैं अन्य भी पाबंदी को देखते हुए खरीद घटा रही हैं।


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