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इन दो वजहों से भारत ने लिया बड़ा फ़ैसला अब नहीं होगी पाकिस्तान के साथ कोई बातचीत

दुनिया के सामने आ गया इमरान खान का असली चेहरा

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पाकिस्तान की नीतियों के बारे में सभी को पता है। एक तरफ़ दोस्ती का हाथ बढ़ाकर पीठ में ख़ंजर घोपना पाकिस्तान की पुरानी आदत है। इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ है। कुछ दिनों पहले पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने भारत से वार्ता की पेशकश की थी। लेकिन उसकी बढ़ती आतंकवादी गतिविधियों को देखते हुए भारत ने अपना मन बदल दिया है। एक तरफ़ रिश्ते सुधारने के लिए वार्ता का प्रस्ताव और दूसरी तरफ़ आतंकियों को बढ़ावा देने की सरकारी नीति को पाकिस्तान ने जारी रखा है। पाकिस्तान की इस चाल में कोई बदलाव होते हुए दिखाई नहीं दे रहा है।

घोषणा के साथ ही हुई बहुत चिंताजनक गतिविधियाँ:

इसी वजह से भारत ने दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच अगले हप्ते प्रस्तावित वार्ता को रद्द कर दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने 24 घंटे पहले ही सुषमा स्वराज और उनके समकक्ष शाह महमूद कुरेशी की बातचीत को अधिकारिक तौर पर स्वीकार किया था। शुक्रवार को इस वार्ता को रद्द करने की घोषणा करते हुए पाकिस्तानी पीएम इमरान खान ने भी बहुत तीखे हमले किए। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रविश कुमार ने भारत के फ़ैसले को सुनाते हुए कहा कि पाकिस्तान के विदेश मंत्री के साथ सुषमा स्वराज की बैठक की घोषणा के साथ ही बेहद चिंताजनक गतिविधियाँ हुई हैं।

आतंकी को सम्मान देते हुए जारी किया डाक टिकट:

एक तरफ़ पाकिस्तान स्थित संगठनों ने हमारे सुरक्षाकर्मियों की नृशंस हत्या की है, जबकि दूसरी तरफ़ पाकिस्तान सरकार इस तरफ़ से एक आतंकी को सम्मान देते हुए 20 डाक टिकट जारी किए गए। इससे साफ़ पता चलता है कि अभी भी पाकिस्तान ने अपना रास्ता बदला नहीं है और वह इसे बदलने को तैयार भी नहीं है। भारत ने यह भी दलील दी है कि वह पाकिस्तान के नए पीएम और विदेश मंत्री के पत्रों में व्यक्त भावना के जवाब में वार्ता के लिए तैयार हुआ। दोनों ने भारत और पाकिस्तान के बीच मौजूदा माहौल में सकारात्मक बदलाव लानें की बात कही थी।

दुनिया के सामने आ गया इमरान खान का असली चेहरा:

इसके साथ ही उन्होंने आतंक पर बात करते हुए शांति लानें की भी बात कही थी थी। भारत ने वार्ता रद्द करने के साथ ही पाकिस्तान के नए पीएम इमरान खान को भी कटघरे में खड़ा किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अनुसार पाकिस्तान की वार्ता की नई शुरुआत पाकिस्तान की एक सोची-समझी साज़िश का हिस्सा था, जो अब सामने आ चुका है। पीएम इमरान खान का असली चेहरा दुनिया के सामने उनके कार्यकाल सम्भालने के कुछ दिनों के अंदर ही सामने आ गया है। ऐसे में मौजूदा माहौल में पाकिस्तान के साथ कोई बातचीत करने का मतलब नहीं है।

भारत के दिए हुए तर्क नहीं उतर रहे गले:

भारत ने यह भी कहा है कि, ‘बदले हालात में न्यूयॉर्क में भारत और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों की बैठक नहीं होगी।’ निश्चित तौर पर पाकिस्तान के रवैए को देखते हुए भारत के इस फ़ैसले को ग़लत नहीं ठहराया जा सकता है। ख़ासतौर पर जिस तरह शुक्रवार को कश्मीर में चार पुलिसकर्मियों की हत्या पाक परस्त आतंकियों ने की है। लेकिन जिस तरह से 24 घंटे में वार्ता करने और उसे रद्द करने का फ़ैसला किया जाता है, वह भारत की पाकिस्तान नीति के बारे में बहुत कुछ कहता है। भारत ने जो तर्क दिए हैं वह गले नहीं उतरते हैं।

आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए नहीं उठाना चाहती कोई जोखिम:

बीएसएफ़ के एक जवान की नृशंस हत्या दो दिन पहले हुई थी, जबकि आतंकी बुरहान वानी को शहीद बताते हुए उसके लिए डाक टिकट जुलाई 2018 में वहाँ आम चुनाव से पहले जारी किया गया था। इसके बाद भी भारत ने 20 सितम्बर को पाकिस्तान विदेश मंत्री से मुलाक़ात की पुष्टि की थी। कांग्रेस ने इसका सख़्त विरोध भी किया था। ऐसे में यह क़यास लगाए जा रहे हैं कि संभवतः राजग सरकार ने आगामी चुनावों के मद्देनज़र फ़िलहाल पाकिस्तान को लेकर कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती है।

भारत ने गँवा दिया शांति का एक और मौक़ा:

इस मामले पर पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरेशी ने कहा कि, ‘भारत में आम चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में लगता है कि आंतरिक मुद्दों को ध्यान में रखते हुए भारत ने वार्ता को रद्द कर दिया है। ऐसा लगता है कि भारत की प्राथमिकता अभी कुछ और ही है। दुर्भाग्य की बात है कि भारत ने सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी और शांति का एक और मौक़ा गँवा दिया। भारत की तरफ़ से उठाये गए इस क़दम की की कई लोग तारीफ़ भी कर रहे हैं, वहीं भारत के इस क़दम को कई लोग दुर्भाग्यपूर्ण भी बता रहे हैं। भाजपा के ऊपर आरोप लग रहे हैं कि अपना राजनीतिक हित साधने के चक्कर में विदेश मंत्रालय ने इस वार्ता को रद्द कर दिया है।


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