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सेना को आज मिलेगा वज्र, जो 38 किलोमीटर तक दुश्मनों को करेगा तबाह

भारतीय निजी क्षेत्र ने बनाया है तोप को

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भारत दोनों तरफ़ से ऐसे देशों से घिरा हुआ है जो कभी भी भारत का अच्छा नहीं चाहते हैं। समय-समय पर दोनों भारत को आँखें भी दिखाते रहते हैं। आए दिन पाकिस्तान और चीन सीमा पर विवाद की स्थिति देखी जा सकती है। विवाद की स्थिति को देखते हुए और सीमा पर बढ़ती चुनौतियों के बीच लगातार भारतीय सेना अपना क़िला मज़बूत करने में लगी हुई है। इसी क्रम में शुक्रवार को सेना को कुछ ऐसे हथियार मिलने जा रहे हैं, जिससे दुश्मन हिल सकता है। शुक्रवार को सेना के बेड़े में के. 9 वज्र (कोरियन) और एम 777 होवित्जर (अमेरिकन) टॉप शामिल होगी।

नवम्बर 2020 तक होगा काम पूरा:

सेना

आपकी जानकारी के लिए बता दें इन तोपों के भारतीय सेना में शामिल होने के बाद भारत की आर्टिलरी क्षमता काफ़ी बढ़ जाएगी। बता दें इन उपकरणों को शामिल करनी के लिए नासिक के देवलाली तोपख़ाना केंद्र मी शुक्रवार को एक समारोह में रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण भी शामिल होंगी। रक्षामंत्री के साथ-साथ वहाँ पर भारतीय थल सेना के प्रमुख बिपिन रावत भी रहेंगे। रक्षा मंत्रालय के अनुसार के. 9 वज्र को 4366 करोड़ रुपए की लागत से भारतीय सेना में शामिल किया जा रहा है। यह काम नवम्बर 2020 तक पूरा हो जाएगा।

तोप को बनाया है भारतीय निजी क्षेत्र ने:

कुल 100 तोपें ख़रीदी जानी हैं, जिसमें से 10 तोपें पहली खेप के तहत इसी महीने में आपूर्ति की जाएगी। अगली की 40 तोपें नवम्बर 2019 में और बाक़ी की बची 50 तोपों की आपूर्ति नवम्बर 2020 में की जाएगी। आपको बता दें के. 9 वज्र की प्रथम रेजिमेंट जुलाई 2019 तक पूरी होने की उम्मीद है। बताया जा रहा है कि यह पहली ऐसी तोप है, जिसे भारतीय निजी क्षेत्र ने बनाया है। इस तोप की अधिकतम रेंज 28-38 किलोमीटर है। यह 30 सेकेंड में 3 गोले दागने में सक्षम है, यानी हर 10 सेकेंड में 1 गोले दागे जा सकते हैं।

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बढ़ जाएगी भारतीय सेना की ताक़त:

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इसके अलावा यह तोप तीन मिनट में 15 गोले दाग़ सकती है। थल सेना 145 एम 777 होवित्जर की सात रेजिमेंट भी बनाने जा रही है। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि सेना को इन तोपों की आपूर्ति अगस्त 2019 से शुरू हो जाएगी। इसकी पूरी प्रक्रिया 24 महीने में ख़त्म हो जाएगी। पहली रेजिमेंट अगले साल अक्टूबर तक पूरी होगी। इस तोप की रेंज 30 किलोमीटर तक है। इसे हेलिकॉप्टर या विमान के ज़रिए हमले वाली जगह पर आसानी से ले जाया जा सकता है। जानकारों का कहना है कि इन दोनों तोपों के भारतीय सेना में शामिल होने के बाद से भारतीय सेना की ताक़त काफ़ी बढ़ जाएगी।

राजनीतिक गलियारों में हमेशा घूमता रहता है बोफ़ोर्स नाम:

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आज से लगभग तीन दशक पहले भारतीय सेना को बोफ़ोर्स जैसी तोप मिली थी। जिसने भारतीय सेना की ताक़त बढ़ाई थी। हालाँकि बोफ़ोर्स को लेकर घोटाला भी हुआ था, इस वजह से यह नाम राजनीतिक गलियारों में हमेशा घूमता रहा है। के. 9 वज्र के अलावा एम 777 अल्ट्रालाइट होवित्जर तोप भी सेना के बेड़े में शामिल हो रहा है। यह प्रोजेक्ट 5000 करोड़ रुपए का है। भारतीय सेना की आर्टिलरी रेजिमेंट में 2021 तक कुल 145 एम -777 अल्ट्रालाइट होवित्जर तोपें शामिल होंगी। इनका वज़न 4.2 टन है।


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