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बैलेट पेपर पर चुनाव हुआ तो हो सकता है भारत के लोकतंत्र को ख़तरा, शुरू हो जाएगी बूथ कैप्चरिंग

कई राज्यों में सामने आयी वोटिंग मशीन में ख़राबी की समस्या

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नई दिल्ली: काफ़ी समय से देश की कई विपक्षी पार्टियाँ इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन से चुनाव कराने का विरोध कर रही हैं। उनके अनुसार पुनः बैलेट पेपर पर चुनाव कराया जाना चाहिए। इन पार्टियों का आरोप है कि वोटिंग मशीन के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है, जबकि बैलेट पेपर से चुनाव कराने पर इस तरह के ख़तरे का सामना नहीं करना पड़ेगा। राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के साथ बैठक करने के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने कहा कि देश की कुछ राजनीतिक पार्टियाँ बैलेट पेपर से चुनाव नहीं चाहती हैं।

 

बैलेट पेपर पर चुनाव कराने के लिए कभी नहीं होंगे तैयार:

जो पार्टियाँ बैलेट पेपर से चुनाव कराने के ख़िलाफ़ हैं, उन पार्टी के नेताओं का कहना है कि अगर फिर से बैलेट पेपर पर चुनाव हुए तो यह भारतीय लोकतंत्र के लिए वास्तव में बहुत ही घातक निर्णय साबित होगा। इससे भारत में फिर से बूथ कैप्चरिंग जैसी घटनाएँ होने लगेंगी। इसकी वजह से चुनाव में होने वाली हिंसक घटनाओं में बढ़ोत्तरी भी हो जाएगी। ऐसी पार्टियों के नताओं ने बैठक में इस बात पर ख़ास ज़ोर दिया कि हम बैलेट पेपर पर चुनाव कराए जानें के लिए कभी तैयार नहीं होंगे।

 

कई राज्यों में सामने आयी वोटिंग मशीन में ख़राबी की समस्या:

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कुछ पार्टियों ने कहा कि वोटिंग मशीन और वीवीपैट की गिनती के साथ कई समस्याएँ हैं। चुनाव आयोग को इसमें सुधार करने के लिए कुछ और काम पर ज़ोर देने की आवश्यकता है। आयोग को इन समस्याओं के निपटारे के लिए ध्यान देना चाहिए। चुनाव आयोग के साथ राजनीतिक दलों की बैठक में कांग्रेस ने कहा कि 70 प्रतिशत से ज़्यादा पार्टियाँ बैलेट पेपर से चुनाव कराने के पुराने तरीक़े को पुनः लागू करवाना चाहती हैं। कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि कई राज्यों के हालिया चुनावों में वोटिंग मशीन में आयी ख़राबी की समस्या काफ़ी चिंताजनकि है।

 

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पुनः बैलेट पेपर से चुनाव कराए जानें पर दे रहे हैं ज़ोर:

इसी वजह से भारत के ज़्यादातर राजनीतिक दल पुनः बैलेट पेपर से चुनाव कराने पर ज़ोर दे रही हैं। बैठक में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधियों ने वोटिंग मशीन में ख़राबी का मुद्दा ज़ोर-शोर से उठाया। इसके बाद इन पार्टियों ने बैलेट पेपर से चुनाव कराए जाने का सुझाव दिया। विपक्षी पार्टियों ने विकल्प के तौर पर कम से कम 30 प्रतिशत मतदान केंद्रों में वोटों की प्रमाणिकता की जाँच के लिए वोटिंग मशीन के साथ ही वीवीपैट लगाने का भी सुझाव दिया।

 

फ़र्ज़ी मतदाताओं को मतदाता सूची से बाहर निकालने की की माँग:

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वहीं कांग्रेस ने बैठक के दौरान यह मुद्दा भी ज़ोर से उठाया कि चुनाव अभियान के दौरान राजनीतिक पार्टियों द्वारा किए जानें वाले ख़र्च की अधिकतम सीमा निर्धारित करने के लिए कहा। इस समय लोकसभा और विधानसभा चुनाव के दौरान उम्मीदवारों द्वारा चुनाव में ख़र्च किए जानें की एक सीमा है, लेकिन राजनीतिक दलों द्वारा कितना ख़र्च किया जाएगा, इसकी कोई सीमा नहीं है। कांग्रेस ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए मतदाताओं की सूची से सभी झूठे और फ़र्ज़ी मतदाताओं को बाहर करने की भी माँग की। कांग्रेस ने बैठक के दौरान मध्यप्रदेश और राजस्थान का उदाहरण देते हुए कहा कि क्रमशः दोनो जगह 60 लाख और 35 लाख फ़र्ज़ी मतदाताओं का नाम सूची में शामिल है। इस साल के अंत तक दोनो ही राज्यों में चुनाव होने वाले हैं।

 


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