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ITBP के बघेरा के कारनामे जानकर हो जाएँगे दंग, नक्सली हैं इससे परेशान

नक्सलियों के आँख की किरकिरी बना हुआ है बघेरा

Source: Aajtak
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जब से इंसानी सभ्यता की शुरुआत हुई है तब से वो अपने काम के लिए कुछ जानवरों को पालन शुरू किया। सबसे पहले इंसानों ने कुत्ते को अपना पालतू बनाया जो शिकार में उनकी मदद करते थे। शिकार के दौरान कुत्ते झट से शिकार को पहचान लेते थे और दूर तक उनका पीछा करते थे। तब से कुत्ता इंसानों का सबसे वफ़ादार जानवर बना हुआ है। आज कई लोग अपने घर में कुत्ता पालते हैं। कुत्ते के पालने से उन्हें कई तरह के फ़ायदे होते हैं। कुत्ते रातभर जागकर घर की रखवाली भी करते हैं।

नक्सलियों के ख़िलाफ़ मिशन में करता है मदद:

Indo-Tibetan Border Police
Source: Aajtak

कुत्ते केवल घर की रखवाली ही नहीं बल्कि सीमा की भी रखवाली अच्छे से कर लेते हैं, भारतीय सेना में भी कई कुत्ते रखे हुए हैं जो बम खोजने का काम करते हैं। हालाँकि आज हम आपको भारतीय सेना के नहीं बल्कि इंडो बॉर्डर तिब्बत पुलिस (ITBP) के कुत्ते बघेरा के बारे में बताने जा रहे हैं। ITBP के जवानों को अपने साथी कुत्ते बघेरा के ऊपर काफ़ी भरोसा है और उन्हें फ़क्र है कि उनकी टीम में बघेरा जैसा कुत्ता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें बघेरा डाबरमैन नस्ल का कुत्ता है जो नक्सलियों के ख़िलाफ़ मिशन में ख़ूब मदद करता है।

कर दिया नक्सलियों की चाल को नाकाम:

यह जाँबाज़ कुत्ता जवानों को बचाने में भी काफ़ी मदद करता है। बघेरा को PEDD यानी पेट्रोल एक्सप्लोसिव डिटेक्शन डॉग भी कहा जाता है। आपको यक़ीन नहीं होगा कि बघेरा बम को केवल सूंघकर ही ढूँढ निकालता है। बघेरा के देखभाल की ज़िम्मेदारी हवलदार पी संभा शिवा राव के कंधों पर है। राव ने बताया कि 29 जुलाई को छत्तीसगढ़ के राजनांदगाँव जिले में मानपुर-बसेली रोड पर नक्सलियों ने 20 किलो एक्सप्लोसिव दबाया हुआ था, लेकिन बघेरा ने नक्सलियों की इस चाल को नाकाम कर दिया। बघेरा ने विस्फोटक को खोजकर ना केवल जवानों की जान बचाई बल्कि एक बड़े नक्सली हमले को भी नाकाम कर दिया।

विस्फोटक में स्पार्क प्लग का इस्तेमाल करते थे तालिबानी आतंकी:

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पहले कई बार इसी तरह से नक्सलियों ने जवानों पर हमले किए हैं, लेकिन इस बार नक्सलियों को शायद यह पता नहीं था कि उनकी यह कोशिश नाकाम हो जाएगी। जी विस्फोटक बरामद हुए हैं, उसे बाइक के स्पार्क प्लग से जोड़ा गया था। नक्सलियों की तरफ़ से यह पहली बार किया गया है कि किसी विस्फोट के लिए स्पार्क प्लग का इस्तेमाल किया हो। आपकी जानकारी के लिए बता दें विस्फोट करने के लिए स्पार्क प्लग का इस्तेमाल पहले ISI की तरफ़ से प्रशिक्षित तालिबानी आतंकी ही करते थे। नक्सलियों ने अपनी तरफ़ से ITPB के जवानों को बहुत ज़्यादा नुक़सान पहुँचाने की कोशिश की हुई थी।

विस्फोटक वाली जगह पर पहुँचकर कर दिया मालिक को इशारा:

Indo-Tibetan Border Police
Source: Aajtak

नक्सलियों की इस कोशिश को बघेरा ने पलभर में ही नाकाम कर दिया। जो विस्फोटक बरामद हुआ है, उसे वैक्यूम पैक की पाँच सतहों में लपेटने के बाद पॉली कवर से ढका गया था। इससे विस्फोट की गंधा का पता K9 स्क्वाड को नहीं लग पाता। लेकिन बघेरा जैसे ही विस्फोटक वाली जगह पर पहुँचा उसने अपने मालिक को इसके बारे में इशारा करने में ज़रा भी समय नहीं लगाया। बघेरा की कोशिशों की वजह से कई जवान मौत के मुँह में जाने से बच गए। ITBP की 27वीं बटालियन के कमांडेंट विशाल आनंद की तरफ़ से असिस्टेंट कमांडेंट सूबे सिंह की कमान में K9 स्क्वाड की 29 जुलाई को क्षेत्र के 14 किलोमीटर लम्बी मुख्य सड़क को सेनेटाइज करने की ज़िम्मेदारी सौंपी गयी थी।

 

 

 

नक्सलियों के आँख की किरकिरी बना हुआ है बघेरा:

बघेरा उसी दल का हिस्सा था। भयानक उमस वाली गर्मी में भी बघेरा ने चालाकी और सूझबूझ से नक्सलियों की इस कोशिश को नाकाम कर दिया। आपको बता दें ITBP पहला ऐसा सुरक्षाबल है जिसने डाबरमैन कुत्तों की सेवाएँ दुबारा लेना शुरू किया है। ITBP ने 2016 में ट्रेनिंग पूरी करने के बाद जिन 20 डाबरमैन कुत्तों को अपनी टीम में शामिल किया था, उनमें से एक बघेरा भी है। बघेरा की इस सूझबुझ की वजह से हर जगह उसी की चर्चा हो रही है। अब ITBP के पास नक्सलियों के हर हमले का तोड़ मिल गया है। बघेरा इस समय नक्सलियों की आँख की किरकिरी बना हुआ है। अगर बघेरा ऐसे ही करता रहा नक्सलियों को बहुत मुश्किल होने वाली है।


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