THE ADDA
THE ADDA: Hindi News, Latest News, Breaking News in Hindi, Viral Stories, Indian Political News

एक व्यक्ति ने बदल दी गाँव के युवाओं की ज़िंदगी, कोई आईएएस तो कोई आईपीएस बनकर कमा रहा नाम

हर घर में है कोई ना कोई सरकारी कर्मचारी और अधिकारी

inspiring story
15

इस दुनिया में कई ऐसे लोग हैं, जो अपने बेहतर काम की वजह से लोगों के लिए प्रेरणा बन जाते हैं। हालाँकि दुनिया में ऐसे लोगों की कमी नहीं है, लेकिन कुछ लोग ऐसे हैं जो अद्भुत कारनामा करके हमेशा के लिए अमर हो जाते हैं। कई लोगों को आपने देखा होगा जो किसी की ज़िंदइस दुनिया में कई ऐसे लोग हैं, जो अपने बेहतर काम की वजह से लोगों के लिए प्रेरणा बन जाते हैं। हालाँकि दुनिया में ऐसे लोगों की कमी नहीं है, गी को बेहतर बनाने के लिए अपना पूरा जीवन ही लगा देते हैं। ऐसे लोगों के रास्ते में कई मुश्किलें भी आती हैं, लेकिन वो हार नहीं मानते हैं और जो सपना देखते हैं, उसे पूरा करके ही मानते हैं।

 

हर घर में है कोई ना कोई सरकारी कर्मचारी और अधिकारी:

आज हम आपको एक ऐसे ही व्यक्ति के बारे में बताने जा रहे हैं जो अपने बेहतर काम की वजह से आज लाखों लोगों के लिए प्रेरणा श्रोत बने हुए हैं। यही नहीं इनकी ही बदौलत आज करोड़ों लोगों का जीवन बेहतर हो रहा है। आप सोच रहे होंगे कैसे? तो आपको बताते हैं पूरी कहानी। उत्तर प्रदेश के चित्रकुल जिले के रैपुरा गाँव के तीस युवा आईएएस, आईपीएस, पीसीएस, और पीपीएस अफ़सर बने हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस गाँव के हर घर में कोई ना कोई सरकारी कर्मचारी और अधिकारी है।

 

पहले राजकीय इंटरकॉलेज में थे प्रधानाचार्य:

इस गाँव में आख़िर ऐसा कैसे ऐसा चमत्कार हो गया। इस गाँव की इस ख़ासियत के लिए एक ख़ास व्यक्ति का हाथ है, जो अब बागवान बनकर मेधा की सुंदर फुलवारी को सींचने का काम कर रहे हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें गाँव के ही पूर्व प्रधानाचार्य डॉक्टर महेंद्र प्रसाद सिंह ही वह व्यक्ति हैं जो इस गाँव के युवाओं की ज़िंदगी को बदल रहे हैं। इनकी ही प्रेरणा और प्रयासों की वजह से आज गाँव की यह हालत है। यहाँ के युवा देश में एक ऊँचा मुक़ाम पा रहे हैं। बता दें डॉक्टर महेंद्र प्रसाद पहले राजकीय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य थे।

 

ट्रस्ट का गठन करके शुरू कर दिया युवाओं का भविष्य सँवारना:

वो प्रधानाचार्य के अपने दायित्व के साथ इतिहास विषय के अपने अनुभव से छात्रों के मददगार बने और सेवानिवृत्त होने के बाद एक ट्रस्ट बनाकर गाँव के बच्चों को भविष्य गढ़ने में सहायता कर रहे हैं। ट्रस्ट का नाम ग्रामोत्थान संस्था है, जो महेंद्र प्रसाद के संकल्प और उद्देश्य को स्पष्ट करता है। वर्ष 1993 में जालौन में राजकीय इंटर कॉलेज से सेवानिवृत्त होने के बाद जब गाँव लौटे तो युवाओं का भविष्य सँवारने में जुट गए। इंटरमीडिएट के पास युवाओं को इतिहास विषय के टिप्स दिए। इसके बाद वर्ष 2008 में ग्रामोंत्थान ट्रस्ट का गठन करके सरकारी नौकरी करने वालों को जोड़ लिया। इस तरह से कारवाँ बढ़ता गया।

 

आर्थिक दिक्कतें होने पर मुहैया करवाता है मदद:

गाँव में हर साल दशहरा के दिन दंगल व मेधा सम्मान समारोह का आयोजन किया जाता है। जिसमें इनका ट्रस्ट किसी भी कक्षा में पहला, दूसरा और तीसरा स्थान पानें वाले बच्चों को सम्मानित करता है। इसके साथ ही इंजीनियरिंगऔर मेडिकल की प्रवेश परीक्षाओं में की तैयारी और प्रेवश में आर्थिक डिक्कातों पर मदद मुहैया कराता है। अफ़सर से लेकर कर्मचारी की नौकरी वाले लोग दशहरा के समय गाँव ज़रूर पहुँचते हैं। डॉक्टर महेंद्र प्रसाद ने ट्रस्ट की तरफ़ से मेधा स्मारिका का प्रकाशन शुरू किया है। इसमें गाँव से निकले IAS-पीसीएस, प्रोफ़ेसर, डॉक्टर, इंजीनियर को भी जोड़ा गया है। उनका मानना है कि इससे युवाओं में पढ़ाई की ललक जागेगी।

 

 


यह भी पढ़े:

 

 

 

 

 

 

Comments
Loading...

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More