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चीन पर लगाम लगाने के लिए भारत-अमेरिका ने मिलाया हाथ, बनी इन मुद्दों पर भी सहमति

सेनाओं के बीच आपसी तालमेल स्थापित करने में मिलेगी मदद

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भारत और अमेरिका के बीच गुरुवार को रणनीतिक साझेदारी को नई बुलंदी प्रदान करते हुए काफ़ी लम्बी बातचीत के बाद रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत भारतीय सशस्त्र बाल वाशिंगटन से ज़्यादा संवेदनशील सैन्य उपकरण ख़रीद सकेगा। आपको बता दें चीन की लगातार विस्तारवादी आकांक्षाओं पर रोक लगाने के लिए भारत और अमेरिका ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र को एक उन्मुक्त और खुला क्षेत्र रखने को लेकर सहयोग करने का भी वादा किया। इस क़रार के बाद दोनो देशों के बीच अति आधुनिक लड़ाकू विमानों के हार्डवेयर की अदल-बदली हो सकती है।

 

दोनो देशों के रक्षामंत्री ने किए समझौते पर हस्ताक्षर:

आपकी जानकारी के लिए बता दें इसमें सी-130 जे, सी-17, पी-81 आदि आधुनिक विमान शामिल हैं। भारत अब अमेरिका के अति आधुनिक रक्षा संचार उपकरणों का भी इस्तेमाल कर सकेगा। आपको बता दें दोनो देशों की तरफ़ से दो-दो मंत्रियों के बीच हुई वार्ता में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने अमेरिकी समकक्ष विदेश मंत्री माइक पोंपियो और रक्षामंत्री जेम्स मैटिस के साथ बातचीत की। बता दें वार्ता के दौरान कई प्रमुख नतीजों के साथ-साथ कम्यूनिकेशन, कम्पैटिबिलिटी, सिक्यूरिटी एगरिमेंट (COMCASA) पर हस्ताक्षर किए गए। भारतीय रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण और अमेरिकी रक्षामंत्री मैटिस ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।

 

मज़बूत होगी भारत की रक्षा सम्बंधी मुस्तैदी:

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इस तरह दुनिया के दो सबसे शक्तिशाली लोगों ने भारत की दो शीर्ष महिला मंत्रियों के साथ समझौता किया। वार्ता ख़त्म होने के बाद मीडिया को सम्बोधित करते हुए सुषमा स्वराज और निर्मला सीतारमण ने कहा कि दोनो पक्षों के बीच कॉमकासा समझौता किया गया है, जिसके बाद दोनो देशों के बीच पहले से ही गहरे रणनीतिक और रक्षा साझेदारी को अब एक नई ऊँचाई मिली है। रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि, ‘आज हमारी बातचीत में रक्षा सबसे बड़ा मुद्दा रहा।’ उन्होंने कहा कि हम अपने रक्षाबलों के बीच घनिष्ठ सहयोग के लिए एक रूपरेखा तैयार कर रहे हैं। कॉमकासा पर आज हस्ताक्षर होने से भारत को अमेरिका से उच्च प्रद्योगिकी हासिल करने में मदद मिलेगी और भारत की रक्षा सम्बंधी मुस्तैदी मज़बूत होगी।

 

सेनाओं के बीच आपसी तालमेल स्थापित करने में मिलेगी मदद:

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समझौते में भारत को अमेरिका की महत्वपूर्ण रक्षा प्रद्योगिकी और संचार नेटवर्क में पैठ बढ़ाने की गारंटी दी गयी है। जिससे दोनो देशों के सेनाओं को आपसी तालमेल स्थापित करने में मदद मिलेगी। भारतीय सैन्य बाल को अब अमेरिका में निर्मित उच्च सुरक्षा संचार उपकरण स्थापित करने की अनुमति होगी। वार्ता के बाद संयुक्त बयान में यह स्वीकार किया गया कि दोनो देश वैश्विक मामलों में रणनीतिक साझेदारी और प्रमुख व स्वतंत्र हितधारक हैं।

 

ज़ाहिर की हिंद-प्रशांत महासागर में साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता:

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भारत-अमेरिका ने अन्य साझेदारों के साथ उन्मुक्त, खुला और समग्र हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता भी ज़ाहिर की। इसके तहत आसियान की मान्यता की प्रमुखता के आधार पर संप्रभुत का सम्मान, क्षेत्रीय अखंडता, शासन व्यवस्था, सुशासन, स्वतंत्र और निष्पक्ष व्यापार, नौवाहन एवं विमान उड़ान की स्वतंत्रता भी शामिल है। दोनो देशों ने सामूहिक रूप से अन्य साझेदार देशों के साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में ढाँचागत विकास और सम्पर्क के क्षेत्र में पारदर्शी, ज़िम्मेदार और लम्बे समय तक के लिए ऋण मुहैया करने में सहयोग करने पर ज़ोर दिया।

 

कई गुणा बढ़ जाएगी भारत की सैन्य ताक़त:

आपको बता दें चीन की पुरानी आदत रही है कि वह दूसरे देशों की सीमाओं में घुसकर ज़बरदस्ती अपनी दावेदारी पेश करता है। चीन हिंद महासागर क्षेत्र में भी अपना हक़ ज़माना चाहता है। लेकिन इस समझौते के बाद चीन शायद अब ऐसा करने से बचे, क्योंकि दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका अब भारत के साथ है। दोनो देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर समझौता हुआ है। जिस वजह से अमेरिका अब भारत की हर क़दम पर सहायता करेगा। इसके साथ ही सीमा पर तैनात जवानों को भी उन्नत क़िस्म की तकनीकी का इस्तेमाल करने की छूट मिल जाएगी। इससे भारत की सैन्य ताक़त पहले से कई गुणा बढ़ जाएगी।

 

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