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करुणानिधि को उनके चाहने वालों ने बना दिया भगवान, जबकि वो ख़ुद एक नास्तिक थे

तमिलनाडु की जनता भगवान की तरह पूजती थी करुणानिधि को

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दक्षिण भारत के दिग्गज नेता, फ़िल्म सस्क्रिप्ट राइटर और 5 बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रह चुके एम. करुणानिधि अब हमारे बीच नहीं रहे। करुणानिधि ने अपनी आख़िरी साँस मंगलवार की शाम को 6:10 मिनट पर चेन्नई के कावेरी अस्पताल में ली। करुणानिधि की मौत की ख़बर सुनते ही उनके चाहने वाले दुःख के सागर में डूब गए। आपको बता दें करुणानिधि लम्बी बीमारी के बाद आख़िरकार इस दुनिया को अलविदा कह गए। करुणानिधि की मौत के बाद देश के तमाम बड़े नेताओं ने इनकी मौत पर शोक व्यक्त किया है। लोग इनके मौत की ख़बर सुनते ही दहाड़े मारकर रोने भी लगे थे।

 

पहले घर पर ही चल रहा था करुणानिधि का इलाज:

प्राप्त जानकारी के अनुसार 94 साल के जूझरू नेता और द्रविड़ आंदोलन में मुखिया करुणानिधि को ब्लड प्रेशर की वजह से अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। अस्पताल में भर्ती करवाए जाने के बाद से लगातार उनकी हालत बिगड़ती गयी। सोमवार को डॉक्टरों ने कहा कि अगले 24 घंटे इनके लिए काफ़ी मुश्किल भरे होने वाले हैं। मंगलवार को भी इनकी हालत में सुधार नहीं हुआ। आख़िरकार डॉक्टरों ने जवाब दे दिया। इसके बाद अस्पताल के बाहर भारी सुरक्षा बालों की तैनाती भी कर दी गयी। जानकारी के अनुसार करुणानिधि का इलाज पहले घर पर ही चल रहा था।

 

2016 में ले ली थी राजनीति से विदाई:

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लेकिन जब इनकी तबियत ज़्यादा बिगड़ने लगी तो इन्हें अस्पताल में भर्ती करवा दिया गया। अस्पताल की तरफ़ से जारी बुलेटिन में कहा गया था कि बढ़ती उम्र के कारण करुणानिधि की तबियत और भी ख़राब हो गयी है। डॉक्टरों ने कहा था कि इनके शरीर से सभी ऑर्गंन्स ने काम करना बंद कर दिया है। मंगलवार को अस्पताल की तरफ़ से 6:40 पर जारी किए गए प्रेस रिलीज़ में कहा गया कि शाम को 6:10 बजे करुणानिधि ने आख़िरी साँस ली। करुणानिधि इसी साल 94 साल के हुए थे। करुणानिधि लगातार 49 सालों तक DMK के मुखिया भी रहे। 2016 में ही इन्होंने राजनीति से विदाई ले ली थी।

 

तमिलनाडु की जनता भगवान की तरह पूजती थी करुणानिधि को:

करुणानिधि के 94वें जन्मदिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवगौड़ा और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बधाई दी थी। आपको जानकर हैरानी होगी कि दक्षिण भारत की राजनीति का यह दिग्गज वहाँ पर किसी भगवान से कम नहीं था। इन्हें वहाँ की जनता भगवान की तरह पूजती थी। इन्होंने समाज की भलाई के लिए इतने काम किए हैं कि ये तमिलनाडु के लोगों के दिलों में हमेशा के लिए अमर हो गए हैं। तमिलनाडु के लोग इन्हें सदियों तक याद करेंगे। करुणानिधि के सम्मान में कार्यकर्ताओं ने इनका एक मंदिर भी बनवाया हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार करुणानिधि का एक मंदिर गुदियाथम के पास समीरड्डीपल्ली में स्थित है।

 

करुणानिधि ख़ुद थे एक नास्तिक:

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बहुत कम लोग यह जानते हैं कि तमिलनाडु के लोग भले ही करुणानिधि को भगवान की तरह पूजते थे, लेकिन ख़ुद करुणानिधि एक नास्तिक थे। इन्होंने भगवान राम के ख़िलाफ़ कई विवादित बयान भी दिए थे, जो चर्चा का विषय बना था। 2007 में करुणानिधि का एक बयान आया था कि कुछ लोग कहते है कि 17 लाख साल पहले एक व्यक्ति था, जिसका नाम राम था। उसके द्वारा बनाए गए पुल रामसेतु को मत छुओ। यह राम कौन है? वह कौन से इंजीनियरिंग कॉलेज के ग्रेजुएट थे? क्या इसका कोई सबूत है। राम बस एक काल्पनिक चरित्र है। करुणानिधि के इस बयान के बाद हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले लोगों ने इनका ख़ूब विरोध किया था।

 

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आगे भी करते रहेंगे रामायण का विरोध:

2009 में रामायण पर आधारित एक किताब के विमोचन में करुणानिधि ने कहा था, वह रामायण के आलोचक रहे हैं और आगे भी इसका विरोध करते रहेंगे। तमिलनाडु में करुणानिधि को एंटी ब्राह्मणवादी राजनीति का प्रतीक भी माना जाता था। इनके राजनैतिक गुरु DMK के संस्थापक अन्नादुरई  और वैचारिक आदर्श पेरियार थे। ये इन्ही के क़दमों पर चलते हुए सालों तक तमिलनाडु के दिग्गज नेता बने रहे। आपको बता दें करुणानिधि का जन्म 1924 को थिरुक्कवालाई गाँव में हुआ था। आज उनके घर को म्यूज़ियम में बदल दिया गया है। उनके घर या यूँ कहें म्यूज़ियम में उनकी पोप से लेकर इंदिरा गांधी तक के साथ की तस्वीरें लगी हुई हैं।

 

इनके आगे कई नेता आए और चले गए:

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करुणानिधि 5 बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। पहली बार जब करुणानिधि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने थे उस समय भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थी। जब तीसरी बार मुख्यमंत्री बने तो उस समय देश के प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे। जब करुणानिधि चौथी बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने तो उस समय भारत के प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव थे और जब पाँचवी और आख़िरी बार मुख्यमंत्री बने तो उस समय भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह थे। इसी बात से यह समझा जा सकता है कि करुणानिधि का राजनीतिक कैरियर कितना लम्बा था। इनके आगे कई नेता आए और चले गए लेकिन ये जस के तस बने रहे।

 

 

राजनीति में आने से पहले थे नाटककार और फ़िल्म पटकथा लेखक:

करुणानिधि के समर्थक इन्हें कलाईनार यानी कला का जादूगर कहते थे। ऐसा इसलिए क्योंकि करुणानिधि राजनीति में आने से पहले एक नाटककार और फ़िल्मों के पठकथा लेखक भी थे। तमिल फ़िल्मों में इनका योगदान अतुलनीय है। फ़िल्मों में काम करने की वजह से ये एमजी रामचन्द्रन के नज़दीक भी आ गए थे। जिन्हें एमजीआर के नाम से जाना जाता था। उन दिनों दोनो की जोड़ी फ़िल्मों के लिए काफ़ी हिट थी। राजनीति में आने के बाद एमजीआर का क़द बढ़ने की वजह से दोनो के रिश्तों में खटास आ गयी। इसके बाद DMK का विभाजन हुआ और AIADMK का जन्म हुआ। एमजीआर के बाद पार्टी की कमान जयललिता को मिली थी।

 

करुणानिधि के कामों की वजह से भूल नहीं पाएगी जनता:

उस समय एमजीआर काफ़ी लोकप्रिय थे। उनकी लोकप्रियता की वजह से करुणानिधि को झुकना पड़ गया था। इसी वजह से करुणानिधि को चुनावों में हार का सामना भी करना पड़ा। आजतक करुणानिधि ने जिस भी सीट से चुनाव लड़ा, जीत ही हासिल की। करुणानिधि 13 बार विधायक भी चुने गए थे। 1969 में अन्नादुरई की मौत के बाद DMK की कमान करुणानिधि ने सम्भाली थी। करुणानिधि की मौत के बाद ऐसा लग रहा है जैसे तमिल राजनीति के एक युग का अंत हो गया है। करुणानिधि अपने कामों की वजह से तमिलनाडु की जनता के दिलों में हमेशा के लिए जीवित रहेंगे। इन्हें तमिलनाडु की जनता कभी नहीं भूल पाएगी।

 


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